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8 साल बाद मिर्चपुर कांड में सजा का ऐलान, पर अब आगे क्या करेंगे, एक दोषी ने दिया बयान बोला...

Sun, 26 Aug 2018 08:34 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
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दलित परिवारों का पलायन - फोटो : अमर उजाला
8 साल बाद बहुचर्चित मिर्चपुर कांड में सजा का ऐलान किया गया है, लेकिन दोषी इससे असंतुष्ट हैं और आगे एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में हैं। एक दोषी का कहना है कि...

अपील करेंगे, सीबीआई जांच होनी चाहिए: धर्मबीर
मिर्चपुर मामले में पांच साल तक जेल में रह चुके धर्मवीर ने फैसले पर असंतुष्टि जताई। धर्मबीर ने कहा कि वो एक बार पांच साल की सजा काट चुके हैं। मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए। कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन इस तरह के फैसले की उम्मीद नहीं थी। अब आगे अपील दायर करेंगे

33 दोषी करार, 12 को आजीवन कारावास
दिल्ली हाईकोर्ट ने हरियाणा के मिर्चपुर दलित हत्याकांड में 20 आरोपियों को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए 33 आरोपियों को दोषी करार दिया है। इनमें 12 को आजीवन कारावास और 21 को एक से दो साल की सजा सुनाई है। सभी पर जुर्माना भी लगाया गया है।

हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ 13 दोषियों की याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि आजादी के 71 साल बाद भी देश में दलितों पर अत्याचार की घटनाएं खत्म नहीं हुई हैं।

 
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209 पन्नों का फैसला सुनाया गया

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मिर्चपुर में दलितों और जाटों के बीच टकराव
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस एस. मुरलीधर और आईएस मेहता की खंडपीठ ने 209 पन्नों के फैसले में कहा कि जाट समुदाय ने जानबूझकर सुनियोजित तरीके से बाल्मीकि समुदाय के घरों पर हमला किया। कई लोग घायल हुए। उनकी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। कोर्ट ने हरियाणा सरकार को आदेश दिया कि दोषियों से वसूली जाने वाली जुर्माना राशि पीड़ितों के पुनर्वास और राहत कार्यों में खर्च की जाए। एजेंसी

दोषियों को राहत का कोई आधार नहीं
निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा कि दोषियों को राहत देने का कोई आधार नहीं है। निचली अदालत का फैसला पूरी तरह सही था। वहीं, पीड़ितों व पुलिस ने 82 आरोपियों को बरी करने के खिलाफ अपील की थी। निचली अदालत ने 24 सितंबर, 2011 को 97 में 15 को दोषी ठहराया था। इनमें दो की मौत हो चुकी है।

हाईकोर्ट ने बदली धाराओं में दी सजा
रोहिणी जिला अदालत ने 2011 में कुलविंदर, धरमबीर व रामफल को आईपीसी की धारा-304 में गैरइरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वहीं हाईकोर्ट ने सभी को धारा-302 में हत्या का दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। इनके अलावा करमबीर, प्रदीप पुत्र जयबीर, राजपाल, प्रदीप पुत्र सुरेश, जोगल, सत्यवान, पवन, धर्मवीर और संजय को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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कुत्ते को डंडा मारने को लेकर हुआ था विवाद

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मिर्चपुर में दलितों और जाटों के बीच टकराव - फोटो : अमर उजाला
10 अप्रैल 2010 को मिर्चपुर में एक कुत्ते को डंडा मारने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया। 21 अप्रैल, 2010 को जाटों ने दलितों के घरों में आग लगा दी थी। इसमें ताराचंद (60) और उनकी दिव्यांग बेटी (17) की मौत हो गई थी। घटना के बाद 250 से ज्यादा दलित परिवार गांव से पलायन कर गए थे। अब वाल्मीकि बस्ती के 55 परिवार गांव में रह रहे हैं। करीब 125 से 150 के करीब परिवार हिसार के तंवर फार्म हाउस में रह रहे हैं।

258 पीड़ित परिवारों का ढंढूर में किया जाएगा पुनर्वास
करीब आठ साल से घर छोड़कर टेंट में रह रहे मिर्चपुर के पीड़ितों को अब भी सरकार पर भरोसा नहीं है। पीड़ितों ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुनर्वास की उम्मीद जगी है। सरकार ने आखिरी चुनावी साल में जमीन तलाशी है। चुनाव तक रजिस्ट्री ही नहीं मिल पाएंगी। आवास का सपना तो सालों बाद पूरा होगा। घरों को अपनी आंखों के सामने जलता देखकर गांव से पलायन कर टेंट में बसे मिर्चपुर के पीड़ितों का जीवन अब भी नहीं बदला है।

पिछले आठ साल से इन परिवारों का पुनर्वास नहीं किया गया है। दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से पुनर्वास के आदेश होने के बाद पीड़ितों को घर मिलने की संभावना जगी है। हिसार के तंवर फार्म हाउस में रहने वाले परिवारों के सिर पर छत तक नहीं है। टेंट फटने पर पैबंद लगाकर रह रह रहे हैं। परिवारों ने कहा कि हमने आठ साल बड़ी मुश्किलों से काटे हैं। अब न्याय मिला है। अदालत से ही न्याय की उम्मीद थी। न्याय मिलने में लंबा समय लगा है।

सात जुलाई 2018 को पुनर्वास योजना का रखा था पत्थर
प्रदेश सरकार ने मिर्चपुर के 258 पीड़ित परिवारों का ढंढूर गांव में पुनर्वास करने के लिए योजना बनाई है। करीब 12 एकड़ में इन्हें बसाया जाएगा। सीएम मनोहर लाल ने सात जुलाई 2018 को इस जमीन पर पुनर्वास योजना का पत्थर रखा। अब तक परिवारों को जमीन की रजिस्ट्री नहीं मिली है। पुनर्वास के तहत बसाए गए इस गांव का नाम दीनदयालपुरम रखा जाएगा।

पीड़ित बोले- मंत्री ने मांगे थे शपथ-पत्र
पीड़ितों ने कहा कि राज्यमंत्री कृष्ण बेदी ने हमसे पुनर्वास के शपथ-पत्र मांगे थे। हमने कहा कि पहले हमें जमीन की रजिस्ट्री दिला दो। आठ साल से केवल आश्वासन ही मिल रहा है।
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