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सावन का महीना शुरू, इस विधि से शिव पूजा करें और भूल कर भी ये सब काम न करें

Tue, 11 Jul 2017 09:17 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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शिव पूजा
सावन का महीना आज से शुरू हो चुका है। अगर आप भगवान शिव को मनाना चाहते हैं तो इस तरीके से पूजा करें और भूल कर भी ये सभी काम न करें।
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शिव पूजा
इस साल सावन का महीना बेहद खास है। ऐसे में अगर भक्तजन इस विधि से पूजन करेंगे तो भगवान शिव मेहरबान होंगे और सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी। इस वर्ष सावन का शुभारंभ सोमवार से और समाप्ति भी सोमवार को हो रहा है। सावन 10 जुलाई को सुबह पांच बजकर 32 मिनट पर शुरू हो रहा है। सावन का महीना सोमवार कृष्ण पक्ष प्रतिपदा को प्रारंभ हो रहा है। श्रावण शुक्ल पक्ष प्रतिपदा भी सोमवार से शुरू हो रहा है।

 
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शिव पूजा
चंडीगढ़ में सेक्टर 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि इस बार सावन में शिव महा जयंती योग बन रहा है। यह योग 26 वर्षो के बाद आया है। बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि सावन का प्रारंभ और अंत सोमवार को होने, इसके अलावा दोनों पक्षों की प्रतिपदा सोमवार को होने सावन में पांच सोमवार होने और कन्या राशि में बृहस्पति होने के कारण शिव महा जयंती योग बन रहा है।

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शिव पूजा
देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष डॉ लाल बहादुर दुबे ने बताया कि सावन का पूरा महीना ही शिव अराधना के लिए विशेष होता है, लेकिन इस बार शिवभक्तों को 5 दिन सावन सोमवार के व्रत रखने को मिलेंगे। प्रथम सावन सोमवार 10 जुलाई को, दूसरा 17 जुलाई को, तीसरा 24 जुलाई, चौथा सोमवार 31 जुलाई और 7 अगस्त को 5वां सोमवार होगा। तीसरे सोमवार 24 जुलाई को पुष्य नक्षत्र रहेगा।
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शिव पूजा
सावन के आखिरी सोमवार 7 अगस्त को भाई बहन के पवित्र बंधन का त्यौहार रक्षाबंधन भी मनेगा। राखी का शुभ समय सुबह 10:39 से दोपहर 1:53 तक रहेगा। इस दिन सुबह 10:30 बजे तक भद्रा काल भी है। इसलिए भद्रा काल समाप्त होने और सूतक लगने के पूर्व ही बहनें अपने भाइयों की कलाई में रक्षा सूत्र बांध सकेंगी। रक्षा सूत्र बांधने के लिए सुबह 10:39 के बाद और दोपहर 1:53 तक का ही मुहूर्त शुभ है।

 
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7 अगस्त को राखी के राखी के दिन ही चंद्रग्रहण पड़ेगा। मकर राशि में खंडग्रास चंद्रग्रहण भारत सहित यूरोप, एशिया, अफ्रीका, रूस, आस्ट्रेलिया, पेसिफिक महासागर, हिंद महासागर, अटलांटिक महासागर में दिखाई देगा। चंद्रग्रहण का स्पर्श काल रात 10:53 बजे और मोक्ष रात्रि 12:48 बजे होगा। चंद्रग्रहण का सूतक तीन प्रहर पूर्व दोपहर 1:53 मिनट से लगेगा।
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शिव पूजा
ऐसे करें शिव पूजन
कहते हैं कि भगवान शिव एक लोटा जल में भी प्रसन्न होने वाले देवता हैं। यदि कोई व्यक्ति शिवजी की कृपा प्राप्त करना चाहता है तो उसे रोज शिवलिंग पर जल अर्पित करना चाहिए। विशेष रूप से सावन के हर सोमवार शिवजी का पूजन करें। इस नियम से शिवजी की कृपा प्राप्त की जा सकती है। भगवान की प्रसन्नता से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और परेशानियों दूर सकती हैं।

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शिव पूजा
पूजन की सामान्य विधि
सोमवार को सुबह जल्दी उठें और स्नान आदि नित्य कर्मों से निवृत्त होकर शिवजी के मंदिर जाएं। मंदिर पहुंचकर भगवान के सामने व्रत का संकल्प लें। इस व्रत में एक समय रात्रि में भोजन चाहिए। दिन फलाहार किया जा सकता है। साथ ही दूध का सेवन भी किया जा सकता है। संकल्प के बाद शिवलिंग पर जल अर्पित करें। गाय का दूध अर्पित करें। इसके बाद पुष्प हार और चावल, कुमकुम, बिल्व पत्र, मिठाई आदि सामग्री चढ़ाएं।

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शिव पूजा - फोटो : Amar Ujala
पूजन में शिव मंत्र का जप करें
सावन के महीने में शिव पूजन के साथ ही शिव मंत्र 1- ऊँ महाशिवाय सोमाय नम:। या शिव मंत्र 2-ऊँ नम: शिवाय। मंत्र जप की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए। जप के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग सर्वश्रेष्ठ रहता है। शिव परिवार (प्रथम पूज्य श्री गणेश, माता पार्वती, कार्तिकेय, नंदी, नाग देवता) का भी पूजन करें।

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शिव पूजा - फोटो : amar ujala
बीरेंद्र नारायण मिश्र देवी कहते हैं कि पार्वती ने भी सावन में श‌िव जी को प्रसन्न करके उन्हें पत‌ि रूप में पाया था। लड़कियां भी मनचाहा वर पा सकी हैं, बस सावन के महीने में सूर्योदय से पहले उठकर भगवान श‌िव का ध्यान करें और न‌ियम‌ित श‌िवल‌िंग का जल से अभ‌िषेक करें। पुराणों के अनुसार सावन में क‌िया गया जलाभ‌‌िषेक अन्य द‌िनों में की अपेक्षा अध‌िक फलदायी होता है।

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शिव पूजा
सावन के सोमवार के द‌िन व्रत रखें। अगर नर्जल व्रत नहीं रख सकते तो फलाहर के साथ व्रत रखा जा सकता है। श‌िव पुराण का पाठ करें। इस पुराण में बताया गया है क‌ि सावन में इसका पाठ और श्रवण मुक्त‌िदायी होता है। भगवान श‌िव की पूजा में बेलपत्र शाम‌िल करें। तांबे का नाग भगवान श‌िव को अर्प‌ित करें। ज्योत‌िषशास्‍त्र के अनुसार इससे कालसर्प, सर्प योग और राहु केतु के अशुभ प्रभाव में कमी आती है।

 

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धतूरा और भांग भगवान श‌िव को अर्प‌ित करें। म‌िट्टी से श‌िवल‌िंग बनाकर न‌ियम‌ित इसकी पूजा करें। दूध दान करें। शाम के समय भगवान श‌िव की आरती पूजा करें। सावन के महीने में मांस-मदिरा आदि के सेवन नहीं करना चाहिए। शादी जैसा शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। इसके अलावा ब्रह्मचर्य व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए। सावन के महीने में एक व्रती को हरी सब्जियां और साग नहीं खाना चाहिए।

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शिव पूजा
शरीर पर तेल नहीं लगाना चाहिए और न ही कांसे के बर्तन में खाना-खाना चाहिए। पूजा के समय में शिवलिंग पर हल्दी न चढ़ाएं। शिवलिंग पर न चढ़ाएं हल्दी। सावन के महीने में दूध का सेवन अच्छा नही होता है। यही कारण है क‌ि सावन में भगवान श‌िव का दूध से अभ‌िषेक करने की बात कही गई है। इससे वात संबंधी दोष से बचाव होता है। सावन के महीने में द‌िन के समय नहीं सोना चाह‌िए।

 

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शिव पूजा
सावन के महीने में बैंगन नहीं खाना चाह‌िए। बैंगन को अशुद्ध माना गया है इसल‌िए द्वादशी, चतुर्दशी के द‌िन और कार्त‌िक मास में भी इसे खाने की मनाही है। इस महीने में अगर घर के दरवाजे पर सांड आ आए तो उसे मार कर भगाने की बजाय कुछ खाने को दें। सांड को मारना श‌िव की सावारी नंदी का अपमान माना जाता है। सावन के महीने में श‌िव भक्तों का अपमान न करें।

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भगवान श‌िव के भक्तों का सम्मान श‌िव की सेवा के समान फलदायी होता है। यही कारण है क‌ि कई लोग कांवड़‌ियों की सेवा करते हैं। सावन के महीने में क्रोध में क‌िसी को अपशब्द नहीं कहें और बड़े बुजुर्गों सम्मान करें। जीवनसाथी के साथ वाद-व‌िवाद और अपश्‍ब्दों का प्रयोग हान‌िकारक होता है। इन द‌िनों श‌िव पार्वती की पूजा से दांपत्य जीवन में प्रेम और तालमेल बढ़ता है, इसल‌िए क‌िसी बात से मन मुटाव की आशंका होने पर श‌िव पार्वती की पूजा करनी चाह‌िए।
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शिव पूजा
सावन के महीने में प्रत‌ि ‌द‌िन भगवान श‌िव का जलाभ‌िषेक करना चाहिए। इससे कई जन्मों के पाप का प्रभाव कम ​हो जाता है। शास्‍त्रों में बताया गया है सावन में सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान ध्यान करके भगवान श‌िव का अभ‌िषेक करना चाह‌िए। देर तक सोने से यह अवसर हाथ से चला जाता है और श‌िव की कृपा से वंच‌ित रह जाते हैं।
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