किरण खेर के लिए इस साल लोकसभा चुनाव जीतना आसान नहीं रहा। पार्टी के अंदर और बाहर तमाम तरह के विवादों को झेलते हुए, भाजपा को यह जीत हासिल हुई है। किरण खेर की इस सफलता के पीछे भाजपा के कुछ चेहरे हैं, जिन्होंने न सिर्फ पार्टी को एकजुट किया बल्कि माइक्रो लेवल पर पार्टी को नई मजबूती दी। इससे किरण की राह आसान हुई और वे दोबारा से सांसद चुनी गईं। जानिए कौन हैं वे पांच पांडव...
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चंद्रकांत
- फोटो : फाइल फोटो
चंद्रकांत : पर्दे के पीछे रहकर किया काम
चंद्रकांत राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रचारक हैं। चुनाव से डेढ़ महीने पहले उन्होंने शहर में डेरा जमा लिया था। पर्दे के पीछे बिना किसी मंच पर चढ़े, बिना किसी जनसभा के 100 फीसदी मतदान के लिए डोर-टू-डोर प्रचार किया। पुराने लोगों से संपर्क बनाकर उन्हें दोबारा एकजुट कर राष्ट्र के हित में मतदान करने के लिए प्रेरित किया। बोलचाल से बेहद मीठे चंद्रकांत लोगों को प्रभावित करने में माहिर माने जाते हैं। शहर में संघ के विस्तार में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। साल 1980 में संघ में उनका प्रवेश हुआ, जिसके बाद 1991 में वे प्रचारक बने। चंडीगढ़ में भी प्रचारक रह चुके हैं। फिलहाल वे पंजाब के गो सेवा प्रमुख का काम देख रहे हैं।
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संजय टंडन
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संजय टंडन : बूथ मैनेजमेंट को मजबूत किया
चंडीगढ़ से टिकट के लिए संजय टंडन खुद भी किरण खेर के साथ दावेदार थे। टिकट नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने पार्टी को मजबूत करने का काम किया। 50 से ज्यादा जनसभाएं कीं। बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की फौज तैयार की, जिन्होंने भाजपा को जीत दिलाई। संजय टंडन पिछले करीब 10 साल से चंडीगढ़ अध्यक्ष पद पर काबिज हैं। उनके पिता स्व. बलराम दास टंडन पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री व छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रह चुके थे। संजय टंडन ने 10 साल में शहर में भाजपा को खड़ा किया। कार्यकारिणी तैयार की, शहर में काफी साल से सक्रिय राजनेता की भूमिका निभाई है। उनकी व्यापारी वर्ग में अच्छी पकड़ मानी जाती है।
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अजय जामवाल
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अजय जामवाल : शाह की रैली के बाद संभाला मोर्चा
नॉर्थ ईस्ट के संगठन मंत्री अजय जामवाल ने चुनाव से एक महीने पहले शहर की बागडोर संभाली। पार्टी के विभिन्न मोर्चों की बैठक कर उन्हें जिम्मा सौंपा। अमित शाह की रैली के बाद उन्होंने शहर में भाजपा की स्थिति को भांपकर चुनावी अभियान को और तेज किया। उन्होंने पार्टी के नेताओं को दो टूक कह दिया था कि जो पार्षद अपने वार्ड से वोट दिला पाने में असफल रहेगा, उसे नगर निगम चुनाव में टिकट नहीं मिलेगी। शहर में आरएसएस के विस्तार का श्रेय भी उनके खाते में जाता है। उनकी गांव-कॉलोनियों में अच्छी पकड़ है। वे चंडीगढ़ और पंजाब के संगठन मंत्री रह चुके हैं। शहर के हर कार्यकर्ता को वे करीब से जानते हैं। चंडीगढ़ के संगठन मंत्री रहते हुए उन्होंने भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया। युवाओं में खासे लोकप्रिय हैं। अपने बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाते हैं।
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सतिंदर सिंह
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सतिंदर सिंह : चुनाव संचालन की बागडोर संभाली
ईमानदार व साफ छवि के धनी सतिंदर सिंह रूठे नेताओं को मनाने में कामयाब रहे। उन्होंने पार्टी में बढ़ रही गुटबाजी को कम करने का काम किया। चुनाव संचालन समिति के सह-संयोजक के तौर पर पार्टी की चुनावी गतिविधियों का काम देखा। पेशे से वकील सतिंदर सिंह वार्ड नंबर-18 से पार्षद भी रह चुके हैं। किरण खेर के करीबियों में से एक सतेंद्र सिंह कई भाजपा के नेताओं का लीगल काम भी देखते हैं। उनकी वार्ड में लोगों के बीच अच्छी पकड़ है। गुटबाजी में न पड़कर सिर्फ पार्टी के लिए काम किया। समाजसेवा के क्षेत्र में भी वे सक्रिय रहे हैं।
रामवीर भट्टी : ग्रामीण वोटों को साधने का काम किया
भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष रामवीर भट्टी पार्टी के पुराने नेताओं में से एक हैं। आरएसएस के बैकग्राउंड से आने वाले भट्टी शहर को अच्छी तरह से पहचानते हैं। उनकी गांवों व कॉलोनियों में अच्छी पकड़ है। शहर की राजनीति में काफी साल से सक्रिय हैं। भाजपा की रणनीति तैयार करने में भट्टी की बड़ी भूमिका है। रामवीर भट्टी ने चुनाव संचालन समिति की कमान संभाली और पार्टी की प्रत्येक गतिविधियों में शामिल रहे। समय-समय पर अन्य पार्टियों के नेताओं को भाजपा में शामिल भी कराया। चुनाव की घोषणा के बाद से वे पूरे समय सक्रिय रहे।