बुढ़ापे में परिवार के बच्चे और अन्य छोड़कर चले जाए तो सहा जा सकता है, लेकिन पति या पत्नी में से कोई एक छोड़कर चला जाए तो यह दर्द असहनीय हो जाता है। यही कुछ दिखा मिस्टर एंड मिसेज मुरारीलाल नाटक में।
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मिस्टर एंड मिसेज मुरारीलाल
- फोटो : अमर उजाला
बालीवुड डायरेक्टर एवं सतीश कौशिक और अभिनेत्री मेघना मलिक ने मिस्टर एंड मिसेज मुरारीलाल की भूमिका निभाई, जबकि नाटक को सैफ हैदर हसन ने डायरेक्ट किया। इस नाटक का मंचन चंडीगढ़ पर्यटन विभाग और टैगोर थिएटर के संयुक्त सहयोग से टैगोर थिएटर सेक्टर-18 में आयोजित किया गया। नाटक में मुख्य तौर पर एक बूढ़े दंपति के जीवन को दिखाया गया जो किन्हीं कारणों से अलग हो जाते हैं।
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मिस्टर एंड मिसेज मुरारीलाल
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद उनके जीवन में किस प्रकार से उतार-चढ़ाव आते हैं। इसे नाटक में दिखाया गया। इस मौके पर डायरेक्टर हैदर हसन ने बताया कि एक अरसे तक साथ रहने के बाद जब कोई अलग होता है तो उस दर्द को बयां कर पाना बहुत मुश्किल होता है। कई युवा अपने बूढ़े मां-बाप को छोड़ देते हैं। बच्चों की जुदाई को वह सहन कर लेते हैं, लेकि न पति या पत्नी के बिछुड़ने के दर्द को वह बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं।
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मिस्टर एंड मिसेज मुरारीलाल
- फोटो : अमर उजाला
पार्क में मिलते हैं तीनों किरदार
नाटक में तीनों किरदार एक रात को पार्क में मिलते हैं जिनमें पार्क का चौकीदार अमित पाठक, मिस्टर मुरारीलाल सतीश कौशिक, मिसेज मुरारी लाल मेघना मलिक पहुंचते हैं और यहीं सारी कहानी को दर्शाया गया हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
नाटक के लिए टिकट सही : हैदर
इस नाटक के लिए 300 और 500 रुपये की टिकट थी। इस बारे में डायरेक्टर सैफ हैदर हसन ने कहा नाटकों के लिए टिकट रखना बिल्कुल जरूरी है। इसी से तो कलाकार की रोजी रोटी चलती है। हालांकि, टिकट होने के कारण दर्शकों से पूरा हाल भर नहीं पाया।
सतीश यारों के यार: हसन
बॉलीवुड की कई फिल्मों में अभिनेता और डायरेक्टर और प्रोड्यूसर रह चुके सतीश कौशिक को अपने डायरेक्शन में काम करवाना आपके लिए कितना चैलेंजिंग रहा, इस सवाल के जवाब में हैदर हसन का कहना था कि नाटक में सतीश को लेने से पहले तीन महीने तक बातचीत की, उन्हें समझा। सतीश कौशिक एकदम यारों के यार हैं। वह हमारे थिएटर परिवार का अब अहम हिस्सा बन चुके हैं।