वहीं शहीद की बुजुर्ग मां और पत्नी का रो-रो कर बुरा हाल था। चिता को मुखाग्नि देने से पहले जब परिजनों ने शहीद के अंतिम दर्शन किए तो उनकी चीत्कार सुनकर हर आंख नम हो गई। शहीद की यूनिट 60 फील्ड मीडियम रेजीमेंट ऑर्टिलरी से नायब सूबेदार परमजीत सिंह, लांस नायक शवेग सिंह, गनर शंकर और विक्रम शव लेकर पहुंचे। 18 फील्ड उच्ची बस्सी से कैप्टन गुंजर ठाकुर के नेतृत्व में सेना की टुकड़ी ने शहीद को अंतिम सलामी दी।