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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत का दिन ये है, इस बार बेहद शुभ संयोग

Wed, 29 Aug 2018 03:02 PM IST
नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तारीख और व्रत के दिन को लेकर असमंजस बना हुआ है। अगर आप सही जानकारी और पूजा का शुभ मुहूर्त जानना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें, सब पता चल जाएगा।

 
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krishna janmashtami 2018 - फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ में सेक्टर-30 स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र कहते हैं कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है। इस बार जनमाष्टमी 3 सितंबर दिन सोमवार को है, जबकि व्रत का दिन दो सितंबर दिन रविवार रहेगा। क्योंकि इस बार दो सितंबर को सप्तमी खत्म हो रही है और रात 8 बजकर 47 मिनट पर अष्टमी शुरू हो रही है। 3 सितंबर, 2018 को सायंकाल 5 बजकर 20 मिनट तक रहेगी।
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krishna janmashtami 2018 - फोटो : अमर उजाला
बीरेंद्र नारायण मिश्र कहते हैं कि रोहिणी नक्षत्र 2 सितंबर, 2018 को 8:48 बजे शुरू होगा और 3 सितंबर, 2018 को रात्रि 8:04 बजे तक रहेगा। निशीथ काल पूजन का समय 2 सितंबर, 2018 को रात्रि 11:57 से 12:48 तक रहेगा। इसलिए व्रत दो तारीख को होगा। माना जाता है इस दिन व्रत रखने से संतान की प्राप्ति होती है और संतान की दीर्घायु की कामना पूरी होती है।

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krishna janmashtami - फोटो : अमर उजाला
बीरेंद्र नारायण मिश्र कहते हैं कि व्रत वाले दिन एक ही समय का भोजन किया जाता है। भक्त स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद, पूरे दिन उपवास रखकर अगले दिन रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि के खत्म होने के बाद व्रत कर पारण का संकल्प लेते हैं। जन्माष्टमी के दिन, श्रीकृष्ण पूजा निशीथ समय पर की जाती है। निशीथ मध्यरात्रि का समय होता है, जिसमें भक्त पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
व्रत में इन बातों का रखें विशेष ध्यान
एकादशी उपवास के दौरान पालन किए जाने वाले सभी नियम जन्माष्टमी उपवास के दौरान भी पालन किये जाते हैं। जन्माष्टमी के व्रत के दौरान किसी भी प्रकार के अन्न का ग्रहण नहीं करना चाहिए। ये व्रत अगले दिन सूर्योदय के बाद एक निश्चित समय पर तोड़ा जाता है, जिसे जन्माष्टमी का पारण समय कहते हैं। जन्माष्टमी का पारण अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के समाप्त होने के बाद किया जाता है।
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happy janmashtami
यदि अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र सूर्यास्त तक समाप्त नहीं होते तो पारण किसी एक के समाप्त होने के पश्चात किया जा सकता है। अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में से किसी के भी सूर्यास्त तक समाप्त ना होने पर जन्माष्टमी का व्रत दिन के समय नहीं तोड़ना चाहिए। इस तरह अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र के समाप्त होने के अनुसार जन्माष्टमी का व्रत दो दिनों तक भी हो सकता है।

 
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