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करवाचौथ आज: चांद देखने से पहले भूलकर भी न करें ये काम, नहीं मिलेगा फल

Sun, 08 Oct 2017 05:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Karwa Chauth 2017
करवा चौथ का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी के चंद्रमा के उदय में किया जाता है। इस बार व्रत 8 अक्टूबर, यानि आज है। इस दिन शाम चार बजकर 58 मिनट पर तृतीया समाप्त हो रही है। आठ अक्तूबर को ही शाम चार बजकर 59 मिनट से चतुर्थी तिथि का शुभारंभ होगा। यह कहना है चंडीगढ़ के सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र का।
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Karwa Chauth in Chandigarh - फोटो : File Photo
चंद्रमा के दर्शन और उपवास खोलने से पहले कुछ चीजें हैं जिनका खास ध्यान रखा जाना चाहिए। माना जाता है ऐसा नहीं करने पर चंद्रमा नाराज हो जाते हैं और पत्नी को उसकी पूजा का फल नहीं मिलता। जैसे उपवास वाले दिन महिलाओं को किसी को दूध, दही, चावल और सफेद कपड़ा नहीं देने चाहिए।
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- फोटो : File Photo
करवा चौथ वाले दिन महिलाओं को अपने से बड़ी उम्र की किसी भी बुजुर्ग महिलाओं का अपमान नहीं करना चाहिए। ऐसा करना अशुभ माना जाता है। चांद देखने से पहले महिलाओं को मां गौरी की पूजा करना नहीं भूलना चाहिए। पूजा अर्चना करने के बाद मां को पूरी और हलवा का प्रसाद जरूर अर्पित करना चाहिए।

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- फोटो : File Photo
उधर, बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि करवा चौथ पर चंद्रमा रात आठ बजकर 13 मिनट पर निकलेगा। नौ अक्तूबर दिन सोमवार को चतुर्थी तिथि दोपहर में दो बजकर 17 मिनट पर समाप्त हो रही है। इसलिए करवाचौथ का व्रत आठ अक्तूबर को ही होगा। देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ लाल बहादुर दुबे ने बताया कि शास्त्रों में यह व्रत कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी के दिन करने का विधान है।
 
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करवा चौथ - फोटो : File Photo
सेक्टर-15 के जय श्रीराम ज्योतिष केंद्र के प्रमुख स्वामी राम बहादुर मिश्र और सेक्टर-30 के शिव शक्ति मंदिर के पुजारी श्याम सुंदर शास्त्री के अनुसार, करवा चौथ पर पति की दीर्घायु एवं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए भालचंद्र गणेश जी की अर्चना की जाती है। इस दिन विवाहित महिलाएं सूरज निकलने से पहले उठकर सरगी खाती हैं, जोकि उन्हें उनकी सास द्वारा तैयार करके दी जाती है।
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करवा चौथ का चांद - फोटो : File Photo
सरगी खाने के बाद, महिलाएं तब तक बिना और पानी के रहती हैं जब वह रात को चांद नहीं देख लेती। इस दिन भगवान शिव, देवी पार्वती और कार्तिक की पूजा की जाती है। शाम के समय पूजा कर भगवान को भोग लगाया जाता है और अपने पति की लम्बी आयु की कामना की जाती है। चांद निकलने के बाद महिलाएं चांद के सामने छलनी से अपने पति का चेहरा देखती हैं और चांद को जल अर्पित करती हैं। इसके बाद पुरूष पानी पिलाकर अपनी पत्नियों का उपवास पूरा करवाते हैं।
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करवा चौथ
बीरेंद्र नारायण मिश्र बताते हैं कि चंद्रमा को देखने से पहले एक समारोह का आयोजन किया जाता है, जिसमें महिलाएं लाल रंग की साड़ी और लहंगे पहनकर हिस्सा लेती हैं। इस दौरान करवाचौथ की कहानी सुनी जाती है। इसके बाद महिलाएं देवी पार्वती की मूर्ति की पूजा कर अपने करवे को सात बार घुमाती हैं। भगवान को हलवा, पूरी, मठरी, मीठी मठरी और खीर का भोग लगाया जाता है। यह पूजा अकेले या फिर समूह भी की जा सकती है।
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करवा चौथ - फोटो : File Photo
करवाचौथ के दिन सूर्योदय से पहले जो सरगी खाई जाती है, उसमें मठरी, मिठाई, काजू-किशमिश, ड्राई फ्रूट्स और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। वहीं उपवास पूरा होने के बाद महिलाएं अपने परिवार के साथ खीर, छोले पूरी, चाट, दही भल्ला, पुलाव जैसे व्यंजन बनाए जा सकते हैं। वहीं खासतौर पर इस दिन महिलाओं को लाल कपड़े ही पहनने चाहिए क्योंकि लाल रंग हिन्दू धर्म में शुभ रंग होने का प्रतीक माना जाता है।
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