जैन मुनि तरुण सागर नहीं रहे, लेकिन वे बॉलीवुड के मशहूर सिंगर विशाल ददलानी को ताउम्र याद रहेंगे। क्योंकि उनके साथ ऐसा विवाद हुआ था कि सिंगर को हाथ जोड़कर माफी मांगनी पड़ी थी।
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जैन मुनि तरुण सागर
दरअसल, विशाल डडलानी ने हरियाणा विधानसभा में जैन मुनि के प्रवचनों के बाद आपत्तिजनक ट्वीट कर दिया था। मामला 2016 का है, जब तरुण सागर हरियाणा विधानसभा में प्रवचन देने आए थे। ट्वीट को लेकर जैन समाज में काफी बवाल हुआ था। फिर अंबाला निवासी पुनीत अरोड़ा ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी।
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जैन मुनि तरुण सागर
पुलिस ने संगीतकार व गायक विशाल डडलानी और कांग्रेस कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला के खिलाफ आईपीसी की धारा 153-ए (धर्म के आधार पर विभिन्न वर्गों में शत्रुता को बढ़ावा देना) और 509 (शब्दों, इशारे या कृत्य से किसी महिला के सम्मान को ठेस पहुंचाने का इरादा) के तहत एफआईआर दर्ज की।
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जैन मुनि तरुण सागर
विशाल डडलानी मामले में लगातार आलोचना झेल रहे थे, वहीं उन पर गिरफ्तारी की तलवार भी लटकी हुई थी तो डडलानी ने एफआईआर रद कराने और अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस वी. गोपाला गौडा और जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की बेंच ने 7 सितंबर 2016 को उन्हें कोई राहत नहीं देते हुए, कहा कि डडलानी पहले हाईकोर्ट में जाएं।
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जैन मुनि तरुण सागर
फिर मामला पहुंचा पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट, जहां उन्हें अंबाला पुलिस के समक्ष पेश होकर तफ्तीश में शामिल होने का आदेश दिया गया। इसके बाद विशाल के पास दो ही ऑप्शन थे कि वे या तो कानूनी लड़ाई लड़ें या माफी मांग कर निपटारा करें। 21 सितंबर 2016 को विशाल डडलानी तरुण सागर से माफी मांगने के लिए चंडीगढ़ आए।
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तरुण सागर
- फोटो : self
चंडीगढ़ के सेक्टर-27 स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर पहुंचकर जैन मुनि तरुण सागर से पंचमाफी मांगी। पंचमाफी में हाथ जोड़ना, सिर झुकाना, दिल पर हाथ रखना, कान पकड़ना और किसी भी धर्म पर कोई गलत टिप्पणी न करने का प्रण लेना आता है। डडलानी ने जैन मुनि से कहा कि उन्हें ऐसी टिप्पणी करने पर बेहद दुख और खेद है, वह ऐसी भूल फिर कभी नहीं करेंगे। जैन मुनि ने जैन समाज के लोगों से कहा कि वे डडलानी के खिलाफ की गई एफआईआर वापस ले लें और विशाल डडलानी के खिलाफ चल रहे विवाद को समाप्त करें।
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जैन मुनि तरुण सागर
- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान तरुण सागर ने विशाल डडलानी को अपने प्रवचनों की किताबें भी दीं। जैन मुनि तरुण सागर ने कहा कि उन्होंने तो विशाल डडलानी को पहले ही माफ कर दिया था, लेकिन उनके संस्कारों व उनकी आत्मा की आवाज ने ही उन्हें खुद यहां चलकर आने और पंचमाफी मांगने को मजबूर किया। वहीं विशाल डडलानी ने कहा कि वह किसी के कहने पर माफी मांगने नहीं आए हैं, बल्कि खुद अपने दिल की आवाज पर प्रायश्चित करने व महाराज के दर्शन करने चंडीगढ़ आए हैं।
ऐसे संत बहुत कम होते हैं
विशाल डडलानी ने कहा कि यहां आने से पहले उन्होंने जैन मुनि के प्रवचनों को ध्यान से देखा व सुना है। यहां आकर उन्हें बहुत प्रसन्नता हुई व उन्होंने महसूस किया है कि तरुण सागर सच्चे अर्थों में संत हैं। ऐसे संत बहुत कम होते हैं यहीं आकर उन्हें आत्म संतुष्टि प्राप्त हुई है। विशाल डडलानी ने यह भी कहा कि इस घटनाक्रम के दौरान उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला है। उन्होंने दोबारा जैन मुनि के पास आने की इच्छा भी जाहिर की।