लिवर से जुड़ी दो जुड़वां बहनें जन्नत और मन्नत को सफलतापूर्वक अलग करने में पीजीआई ने कामयाबी हासिल कर ली है। देखिए तस्वीरें।
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लीवर से जुड़ी थीं बहनें, एक सर्जरी से अलग हुईं जन्नत-मन्नत
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लिवर से जुड़ी दो जुड़वां बहनें जन्नत और मन्नत को सफलतापूर्वक अलग करने में पीजीआई ने कामयाबी हासिल कर ली है। सर्जरी के बाद दोनों बहनें स्वस्थ हैं और मंगलवार को उन्हें छुट्टी दे दी जाएगी। अंबाला के बराड़ा कस्बे की इन बच्चियों का जन्म तीन महीने पहले हुआ था। जन्म के समय दोनों बहनों का पेट और सीने का निचला हिस्सा जुड़ा हुआ था।
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लीवर से जुड़ी थीं बहनें, एक सर्जरी से अलग हुईं जन्नत-मन्नत
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जन्म के कुछ दिन बाद उन्हें पीजीआई लाया गया। सीटी और एमआरआई कराने पर पता चला कि दोनों लिवर से जुड़ी हैं। बाकी सारे अंग अलग हैं। उस समय उनका वजन मात्र 3 किलोग्राम था। सीटी स्कैन, एमआरआई और अन्य जांचों में सब ठीक मिला और उसके बाद ऑपरेशन करने का फैसला लिया गया।
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ऑपरेशन में पीडियाट्रिक सर्जरी की टीम, एनेस्थीसिया की टीम, पीडियाट्रिक आईसीयू व रेडियोलॉजिस्ट की टीम ने हिस्सा लिया। इसके लिए विशेष रूप से दो ऑपरेशन थियेटर तैयार किए गए थे। 23 नवंबर को आठ घंटे की मेहनत के बाद दोनों को अलग कर दिया गया। जन्नत-मन्नत के माता-पिता काफी गरीब हैं। इसलिए पीजीआई प्रशासन की ओर से सर्जरी के दौरान कई सर्जिकल आइटम मुफ्त में दिए गए। हॉस्पिटल चार्जेज भी बहुत कम लिए गए हैं।
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ऑपरेशन के बाद जन्नत तो ठीक हो गई थी, लेकिन मन्नत की हालत बिगड़ने लगी थी। उसे कुछ दिन वेंटिलेटर पर रखा गया। उसके बाद उसकी सेहत में सुधार होने लगा। पीडियाट्रिक सर्जरी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रवि कनौजिया ने बताया कि जन्नत-मन्नत की सर्जरी मात्र तीन महीने की उम्र में की गई है। आमतौर पर ऐसी सर्जरी जन्म के एक साल के बाद की जाती है, ताकि उनके अंग प्रभावित न हों। कई बार तो सर्जरी दस साल के बाद तक की जाती है, लेकिन जन्नत-मन्नत के केस में ऐसा नहीं था।
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डॉ. रवि कनौजिया के मुताबिक बच्ची के अभिभावकों पर करीबी रिश्तेदार दबाव डाल रहे थे कि वे जल्द से जल्द ऑपरेशन करवाएं। आसपास के लोग ही उन्हें पीजीआई लेकर आए थे। डॉ. रवि कनौजिया के मुताबिक जो नार्मल जुड़वां बच्चे जन्म लेते हैं तो उनके अंडे जब विभाजित होते हैं तो वे पूरी तरह से अलग से होते हैं, लेकिन इन केसों में अंडे अधूरे विभाजित होते हैं। इसलिए बच्चों के अंग चिपके रह जाते हैं।