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पंचकूला बवाल : अगर पुलिस दिखाती ये सूझबूझ तो टल सकता था टकराव, पढ़ें- कैसे बिगड़े हालात

Wed, 04 Nov 2020 11:20 AM IST
ajay kumar अवधेश शुक्ला/गुरदीप सैनी, अमर उजाला/संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला (हरियाणा)
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पंचकूला में पुलिस और ग्रामीणों में टकराव। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला के रत्तेवाली में खनन को लेकर जो खून खराबा हुआ, उसमें पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। ग्रामीणों का धरना शांतिपूर्ण था। यहां तक कि ग्रामीण खुद अपनी गिरफ्तारी भी देना चाहते थे। वे लगातार पुलिस को सहयोग भी कर रहे थे। मगर धरना खत्म करवाने आई पुलिस जबरदस्ती पर उतारू हो गई। जब पुलिस जबरन घरों में घुसकर लोगों को खींचने लगी, तो हालात बिगड़ गए।

नतीजतन महिलाओं ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। बदले में पुलिस ने भी लाठियां चला दी। मामला ऐसा बिगड़ा कि दोनों तरफ से पुलिस और ग्रामीणों में खूनी झड़प शुरू हो गई। जानकारों का कहना है कि पुलिस ने ग्रामीणों से बातचीत में सूझबूझ का सहारा नहीं लिया। यही वजह रही कि परिणाम हिंसा के रूप में सामने आया। आला अधिकारियों को टकराव टालने के लिए ग्रामीणों से प्रभावशाली ढंग से संवाद करना चाहिए था। यदि ऐसा होता ये पुलिस की सूझबूझ से ये टकराव भी टल जाता।
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- फोटो : अमर उजाला
बवाल के बाद रत्तेवाली में पसरा सन्नाटा, आरोप-प्रत्यारोप शुरू 
खनन को लेकर बवाल के बाद रत्तेवाली में सन्नाटा पसरा रहा। बाजार की दुकानें बंद रहीं। सहमे ग्रामीण घरों में दुबके रहे। पुलिस प्रशासन पल-पल की खबर लेता रहा। स्थिति को नियंत्रण करने के लिए हर पांच सौ मीटर की दूरी पर पुलिस के जवानों की तैनात की गई थी। रत्तेवाली नदी का नजारा कुछ अलग ही दिखा। यहां तीन बाइक जमीन पर गिरी मिलीं। जेसीबी समेत 12 लोडर के शीशे टूटे पड़े थे। धर्म कांटा, पर्ची, ऑफिस और मुंशी की झुग्गी में आग धधक रही थी। सीसीटीवी कैमरे और हार्ड डिस्क बिखरे पड़े थे। बिजली के खंभे तक जमीन पर गिरे पड़े थे।
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- फोटो : अमर उजाला
गांव रत्तेवाली के ग्रामीणों का कहना है कि खनन ठेकेदार ने उन्हें झूठे केस में फंसाने के लिए अपने कारिंदों से ही वाहनों को क्षतिग्रस्त करवाया है और वहां बने धर्म कांटा, पर्ची, ऑफिस में आग लगवाई है। जबकि वे लोग तो शांतिपूर्ण ढंग से धरना दे रहे थे। लेकिन पुलिस प्रशासन उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरह की कार्रवाई पुलिस कर रही है वह शांत नहीं बैठेंगे। इसके खिलाफ कोर्ट की शरण में जाएंगे और न्याय की मांग करेंगे। जबकि खनन ठेकेदार और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीणों ने इस तरह की घटना को अंजाम दिया है।

मनमानियों पर उतारू थी पुलिस, गिरा दिया था टेंट
ग्रामीण गुरदीप, भोला राम, राम सिंह, सरवन सिंह, ऋषिपाल, रिंकू ने बताया कि पुलिस ने धरनास्थल पर पहुंचते ही उनका टेंट गिरा दिया और उन्हें जबरन गाड़ी में बैठाने लगी। जबकि वे लोग स्वयं पुलिस के साथ चलने को तैयार थे। इसके बाद कुछ पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों ने घरों में घुसने की कोशिश की, जिसका महिलाओं ने भी विरोध किया।
 

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- फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों के अनुसार पुलिस जब अपनी मनमानियों पर उतारू रही और किसी की बात सुनने का तैयार नहीं थी, तभी महिलाओं ने पथराव शुरू किया। जबाब में पुलिस ने भी लाठीचार्ज की। जिसमें कई महिलाएं घायल हो गईं। 

खुद को दुकानों में बंद कर पुलिस ने बचाई जान
ड्यूटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में गांव पहुंची पुलिस फोर्स को ग्रामीणों के गुस्से का भी सामना करना पड़ा। नतीजतन उन्हें मौके से भागकर अपनी जान बचानी पड़ी। कुछ पुलिसकर्मी तो वहीं दुकानों में छिप गए। ये पुलिस कर्मी मामला शांत होने तक वहीं दुबके रहे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एक जवान ग्रामीणों के आक्रोश से बचने के लिए दुकान में घुस गया, जिसने शटर गिराकर खुद को अंदर से लॉक कर लिया। वह करीब दो घंटे तक अंदर ही रहा। जब गुस्साए ग्रामीण इधर-उधर हुए तभी वह निकलकर भाग गया।
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- फोटो : अमर उजाला
10 की मंजूरी, 40 फीट तक हो रहा था खनन
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने जिस ठेकेदार को खनन की मंजूरी दी है वह नियमों के विपरीत खनन कर रहा है। ठेकेदार ने 10 फीट गहराई की मंजूरी लेकर 30 से 40 फीट तक खनन कर रहा है। जिससे उनके खेतों में जाने के रास्ते भी पूरी तरह से बंद हो चुके हैं। इतना ही नहीं उनके खेत भी नदी में गिरने के कगार पर पहुंच गए हैं। खेतों में लगे ट्यूबवेल का वाटर लेबल भी खत्म हो गया है। गड्ढों में गिरकर उनके मवेशियों तक की मौत भी हो चुकी है। इसी गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीण पिछले दिनों धरने पर बैठे थे। ग्रामीणों का यह धरना उस समय करीब 20 दिन चला था।
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हरियाणा पुलिस। - फोटो : अमर उजाला
लाइसेंस निलंबन के बावजूद ठेकेदार कर रहा था खनन
ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को उस समय ठेकेदार का लाइसेंस निलंबित करवा उनका  धरना समाप्त करवाया था। लेकिन दो दिन पहले ठेकेदार ने दोबारा खनन का कार्य शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने कहा कि वे किसी भी सूरत में नदी में खनन नहीं होने देंगे। वहीं पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सरकार द्वारा ठेकेदार को खनन के लिए जो टेंडर दिया गया था। उससे सरकार के राजस्व को भी नुकसान हो रहा था। जिसको लेकर पुलिस द्वारा ग्रामीणों से दो दिन से धरना समाप्त करने की अपील की जा रही थी।
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- फोटो : अमर उजाला
तैनात रहे सवा तीन सौ जवान
रत्तेवाली में बवाल के बाद सेक्टर-5 महिला थाना, सेक्टर-14, मनसा देवी कांप्लेक्स थाने सहित शहर की पुलिस लाइन की रिजर्व बटालियन सहित करीब तीन सौ जवान मौके पर मौजूद थे। सेक्टर-5 थाना प्रभारी ललित कुमार, सेक्टर-20 थाना प्रभारी महावीर सिंह, सेक्टर-19 क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर करमवीर सिंह सहित अन्य लोग भी मौजूद रहे।
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