सलवार सूट पहनकर द ग्रेटी खली की चेली की धुलाई कर चुकी महिला आ डब्ल्यूडब्ल्यूई के रिंग में कईयों को धूल चटाने को तैयार है। जानिए इनके बारे में सब कुछ।
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पहलवान कविता दलाल
- फोटो : फाइल फोटो
ये हैं, हार्ड केडी के नाम से मशहूर हरियाणा के जींद जिले की रहने वाली रेसलर कविता दलाल। डब्ल्यूडब्ल्यूई में इनका सिलेक्शन हो चुका है और वे वहां तक पहुंचने वाली देश की पहली महिला पहलवान बन चुकी हैं। अब वे डब्ल्यूडब्ल्यूई के रिंग में 31 पहलवानों से भिड़ेंगी। कविता रिंग में इतनी फुर्तीली हैं कि एक शेरनी की तरह विपक्षी खिलाड़ी पर टूटती हैं। वह मिनटों में ही फाइट जीतकर बाहर आ जाती हैं।
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पहलवान कविता दलाल
- फोटो : फाइल फोटो
कविता लगातार चार बार सीनियर नेशनल चैंपियन, नेशनल गेम्स में चैंपियन, साउथ एशियन गेम्स में चैंपियन के अलावा वुशु में भी नेशनल और गेम्स चैंपियन रह चुकी हैं। उन्होंने पिछले महीने महीने दुबई में हुई महिला और ओपन डब्ल्यूडब्ल्यूई चैंपियनशिप में भी अपना दम दिखाया था। इससे पहले वे कॉन्टिनेंटल रेसलिंग इंटरटेनमेंट (सीडब्ल्यूई) में बतौर रेसलर के रूप में धूम मचा चुकी हैं। कई विदेशी पहलवानों को धूल चटा चुकी हैं।
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पहलवान कविता दलाल
- फोटो : फाइल फोटो
यहां तक कि कविता ने द ग्रेट खली की स्टूडेंट बुलबुल की भी धुलाई की थी, वो भी सलवार सूट पहनकर। डब्ल्यूडब्ल्यूई के रिंग में उतरने के लिए कविता जालंधर में स्थित खली की एकेडमी में तैयारी की थी। कविता अपने भाई के कहने पर पहलवानी की दुनिया में आई और इसके लिए क्रेज इतना बढ़ गया कि रेसलिंग के लिए सरकारी नौकरी तक छोड़ दी।
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पहलवान कविता दलाल
- फोटो : फाइल फोटो
हरियाणा के जींद जिले के मालवी गांव निवासी कविता दलाल यूपी के बागपत जनपद के बिजवाड़ा गांव की बहू हैं। 30 साल की कविता दलाल के पिता किसान हैं और वे परिवार में तीन बहनों और दो भाइयों में सबसे छोटी हैं। कविता ने जुलाना के सीनियर सेकेंडरी स्कूल से 12वीं की कक्षा पास की। कविता के बड़े भाई संजय ने कविता को वेट लिफ्टिंग के खेल के लिए प्रेरित किया।
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पहलवान कविता दलाल
- फोटो : फाइल फोटो
वर्ष 2002 में कविता ने फरीदाबाद में वेट लिफ्टिंग का प्रशिक्षण लेना शुरू किया। वर्ष 2003 में कविता ने प्रशिक्षण के लिए बरेली साईं हॉस्टल में दाखिला लिया, लेकिन यहां के प्रशिक्षण से कविता संतुष्ट न हो पाईं। साल 2005 में बीए पूरी कर ली। पढ़ाई और ट्रेनिंग के बाद 2008 में कविता ने बतौर कॉन्स्टेबल एसएसबी में नौकरी ज्वाइन की।
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पहलवान कविता दलाल
- फोटो : फाइल फोटो
रिंग में पहलवानों का धुआं निकालने वाली कविता ने नौकरी लगने के बाद साल 2009 में बड़ौत के रहने वाले गौरव से लव मैरिज की है। गौरव भी एसएसबी में कॉन्स्टेबल हैं और वॉलीबॉल के खिलाड़ी हैं। दोनों का एक पांच साल का एक बेटा है। पर कविता ने शादी के बाद भी रेस्लिंग का जुनून नहीं छोड़ा। कविता जालंधर के नंगल शामा में अपने बेटे और ननद के साथ रहती हैं।
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कविता दलाल
- फोटो : अमर उजाला
2010 में कविता ने विभाग से कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी के लिए बाहर से प्रशिक्षण दिलाने की गुहार लगाई, लेकिन विभाग की तरफ से उसे कोई सहयोग नहीं मिला। इससे निराश होकर कविता ने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और कविता यूपी स्थित अपनी ससुराल में रहने लगीं। पति गौरव ने कविता को फिर से खेलों के लिए प्रेरित किया। पति से मिले सहयोग के बाद कविता ने फिर से वेटलिफ्टिंग में अपना अभ्यास शुरू कर दिया।
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कविता दलाल
- फोटो : अमर उजाला
पहलवानी की गुर सिखने को कविता दिन में आठ घंटे अभ्यास करती हैं। रिंग में उतरने से पहले जिम और एक्सरसाइज करती हैं। इसके बाद सुबह और शाम को दो से तीन घंटे खली की निगरानी में रिंग में अभ्यास करती हैं। कविता ने अपनी पहली फाइट में नेशनल रेसलर बुलबुल को रिंग में चित कर दिया। कविता की इस फाइट का एक विडियो कई दिनों तक सोशल मीडिया पर भी छाया रहा।
डब्ल्यूडब्ल्यूई में सिलेक्ट होने वाली पहली भारतीय महिला बनकर गर्व महसूस कर रही हूं। उम्मीद है कि मैं इस मंच का इस्तेमाल अन्य महिला पहलवानों को प्रेरित करने के लिए कर पाऊंगी।
- कविता दलाल, रेसलर