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देखिए देश में मौजूद दूसरा 'गोल्डन टेंपल', 91 साल पुराना है और यहीं से गिरफ्तार हुए थे महात्मा गांधी

Mon, 02 Sep 2019 01:48 PM IST
खुशबू गोयल अनिल कुमार, अमर उजाला, फिरोजपुर(पंजाब)
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फाइल फोटो
क्या आप जानते हैं कि देश में एक और 'गोल्डन टेंपल' है, जो 91 साल पुराना है और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को अंग्रेजों ने यहीं से गिरफ्तार किया था, देखिए तस्वीरें।
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गोल्डन टेंपल मेल - फोटो : अमर उजाला
हम बात कर रहे हैं कि गोल्डन टेंपल मेल की। ये एक ट्रेन है, जिसे रेलवे में फ्रंटियर मेल के नाम से भी जाना जाता है। यह ट्रेन दिल्ली-टपरी रेलवे लाइन पर दौड़ने वाली सबसे पुरानी ट्रेन है और एक सितंबर 2019 को इसे दौड़ते हुए 91 साल हो गए हैं। यह ट्रेन आजादी की गवाह है। इस ट्रेन में मुंबई से लाहौर जाते समय महात्मा गांधी को पलवल में अंग्रेजों ने गिरफ्तार किया था, जबकि 1944 में इस ट्रेन में सुभाष चंद्र बोस ने भी सफर किया था।
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गोल्डन टेंपल मेल - फोटो : अमर उजाला
ब्रिटिश हुकूमत के समय मुंबई और पेशावर (पाकिस्तान) के बीच चलने वाली यह फ्रंटियर मेल (मौजूदा गोल्डन टेंपल मेल) अपने 91वें साल पूरे कर एक सितंबर को 92वें साल में प्रवेश कर चुकी है। यह अंग्रेजों की पसंदीदा ट्रेन थी। इस ट्रेन के एक कोच में बर्फ की सिल्लियों का इस्तेमाल करके वातानुकूलित कोच तैयार किया था, जिसमें सीनियर अंग्रेज अधिकारी सफर करते थे। ट्रेन मुंबई और पेशावर का 2335 किलोमीटर का सफर तकरीबन 72 घंटे में तय करती थी।

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गोल्डन टेंपल मेल - फोटो : अमर उजाला
1996 में फ्रंटियर मेल का नाम बदल कर गोल्डन टेंपल मेल रखा गया, जो अब अमृतसर से मुंबई सेंट्रल के बीच चलती है। इस ट्रेन को एक सितंबर 1928 को ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे के पंजाब मेल (लाहौर से चल कर वाया फिरोजपुर होती हुई मुंबई जाती थी, जो अब फिरोजपुर और मुंबई के बीच चल रही है) के जवाब में शुरू किया गया था, उस समय उक्त ट्रेन मुंबई के बल्लार्ड पियर मोल स्टेशन से पेशावर के बीच चलती थी, जब बल्लार्ड स्टेशन बंद किया तो ट्रेन कोलाबा टर्मिनल से चलने लगी थी।
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गोल्डन टेंपल मेल - फोटो : अमर उजाला
रेल डिवीजन फिरोजपुर आपरेटिंग विभाग के डीओएम एसपी सिंह भाटिया ने बताया कि ये ट्रेन जब मुंबई पहुंचती थी तो स्टेशन को लाइटों से रोशन किया जाता था, ताकि लोगों को पता चल सके कि फ्रंटियर मेल सुरक्षित मुंबई पहुंच गई है। ये ट्रेन समय की बहुत पाबंद थी। एक बार पंद्रह मिनट देरी से पहुंची थी तो जांच बैठा दी गई थी। वर्ष 1934 में इसमें एक वातानुकूलित कोच की व्यवस्था की गई, जिसे बर्फ की सिल्लियों से ठंडा किया जाता था। सिल्लियां किस स्टेशन पर बदलनी है, पहले से तय होता था।
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गोल्डन टेंपल मेल - फोटो : अमर उजाला
इस ट्रेन में पैंट्री कार और डाइनिंग कोच भी जोड़े थे। उक्त ट्रेन भारत की तरफ से वड़ोदरा, रतलाम, मथुरा, दिल्ली, अमृतसर, लाहौर, रावलपिंडी होते हुए 2335 किलोमीटर का सफर तय कर 72 घंटे में पेशावर पहुंचती थी। इस ट्रेन में अंग्रेज अधिकारियों के लिए रेडियो की व्यवस्था की गई थी और मनोरंजन के लिए प्लेइंग कार्ड भी उपलब्ध करवाए थे। भारत-पाक बंटवारे के बाद 2335 किलोमीटर की दूरी 1883 किलोमीटर में सिमट गई, अब उक्त ट्रेन अमृतसर से मुंबई के बीच चलती है।
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