भारतीय सेना ने 32 साल पहले जो इतिहास रचकर दुनिया को चकित कर दिया था, वहीं एक बार फिर से दोहराया जाएगा, तैयारी शुरू हो गई है।
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पाल नौका जलयात्रा
दरअसल एक बार फिर सेना की टीमें समुद्री रास्ते के जरिये दुनिया का चक्कर लगाएंगी। इसमें खास बात यह कि इस बार सेना की महिला अफसर भी इस एडवेंचर का हिस्सा बनेंगी। इस ऐडवेंचर का मकसद दुनिया के समुद्रों का अनुभव बटोरना और फिर उस अनुभव से सेना के दूसरे अफसरों, जवानों और यूथ को प्रशिक्षित करना होगा। युवकों को प्रशिक्षित करने का मकसद उनमें सेना और सैन्य साहस के प्रति रुझान पैदा करना होगा।
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पाल नौका जलयात्रा
इसके लिए सेना के ‘आर्मी ऐडवेंचर सेल’ की ओर से मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस को प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेजा हुआ है। सेना की कोर ऑफ इंजीनियरिंग विंग की ओर से इस तरह के ऐडवेंचर का आयोजन किया जाता है। सन 1985 से 1987 तक पहली बार ऐसा ऐडवेंचर इंडियन आर्मी ने किया था। अब आर्मी ऐडवेंचर सेल चाहता है कि इस जोखिम भरे साहसिक कार्य को फिर से दोहराया जाए।
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पाल नौका जलयात्रा
सेना हाईकमान को भेजे प्रस्ताव में महिला और पुरुष अफसरों की दो टीमों को समुद्र के रास्ते विश्व भ्रमण के लिए भेजने की अनुमति मांगी गई है। देश में सबसे पहले इस ऐडवेंचर को लीड करने वाले बिग्रेडियर तेजपाल सिंह चौधरी ने बताया कि यह एडवेंचर बहुत ज्यादा खतरनाक था। सेना की कोर ऑफ इंजीनियर की ओर से आयोजित ‘पाल नौका जलयात्रा’ की शुरुआत 28 सितंबर 1985 को हुई थी और 10 जनवरी 1987 को ये दल वापस मुंबई लौटा था।
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indian army
इस पाल नौका को ‘तृष्णा’ का नाम दिया गया था। इस टीम में बिग्रेडियर टीपीएस चौधरी टीम मैनेजर एवं क्रू इंचार्ज थे, जबकि लेफ्टिनेंट जनरल केएस राव, मेजर एके सिंह, बिग्रेडियर सी. भारती, कर्नल एस. शेखर, बिग्रेडियर एपी सिंह, मेजर ए. भट्टाचार्य, मेजर एसएन माथुर, बिग्रेडियर एन. आहूजा, मेजर जनरल आर बस्सी भी टीम में शामिल थे। इस ऐडवेंचर में टीम ने बहुत समुद्री तूफान व अंधड़ झेले।
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भारतीय सेना
बिग्रेडियर टीपीएस चौधरी ने बताया कि तस्मान समुद्र में तो एक तूफान ने उनकी पाल नौका को ऐसा घेरा कि वे 350 किमी दूर रास्ता भटक गए। 160 किमी प्रति घंटे की हवाओं और 60 फीट ऊंची उठती लहरों ने जान जोखिम में डाल दी थी। 10 दिन समुद्र में भटकने के बाद उन्हें सही रास्ता मिला था। उनका कहना है कि इस खतरनाक एडवेंचर में टीम जिंदा लौटेगी या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं रहती।
नेवी की महिला टीम हुई रवाना
आर्मी की टीमों को भले ही अभी सेना हाईकमान की हरी झंडी का इंतजार है। लेकिन नेवी की महिला अफसरों की एक टीम इस एडवेंचर के लिए निकल चुकी है। बिग्रेडियर टीपीएस चौधरी के अनुसार ये टीम अभी न्यूजीलैंड के पास समुद्री मार्ग से गुजर रहे हैं। उनके अनुसार उन्हें उम्मीद है सेना की टीमों को भी जल्द मंजूरी मिल जाएगी।