भारतीय सेना की इस ताकत को देखकर दुश्मन थर्रा जाता है। इसकी खूबियां इतनी हैरान कर देने वाली हैं कि जानकर आपको फक्र महसूस होगा।
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आर्मी का सबसे ताकतवर टैंक टी-90 एस (भीष्मा)
इंडियन आर्मी के पास सबसे ताकतवर टैंक की श्रेणी में आने वाला टैंक टी-90 एस (भीष्मा) को अब इंडिया में ही असैंबल किया जा रहा है। इसकी असैंबलिंग यहां तमिलनाडु के चेन्नई में शुरू कर दी गई है। इस टैंक को रूस से आयात कर वर्ष 2004 में इंडियन आर्मी के सुपुर्द किया गया था। अर्जुन टैंक के बाद अब इंडियन आर्मी के पास सबसे ताकतवर टैंक यही भीष्मा है।
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आर्मी का सबसे ताकतवर टैंक टी-90 एस (भीष्मा)
रूस में इस टैंक को टी-90 एस के नाम से जाना जाता है, लेकिन भारतीय सेना के बेड़े में शामिल होने के बाद इसका नामकरण ‘भीष्मा’ किया गया। अभी तक इंडियन आर्मी के लिए केंद्र सरकार ने रूस से जितने भी संबंधित टैंक खरीदें है, वे सभी रूस से ही आयात किए गए हैं, लेकिन अब इन टैंकों की असैंबलिंग चेन्नई में शुरू कर दी गई है।
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आर्मी का सबसे ताकतवर टैंक टी-90 एस (भीष्मा)
इस टैंक को अब यहां असैंबल कर और भी कई अपग्रेडेड उपकरणों से इसे लैस किया जा रहा है, ताकि युद्ध में इस्तेमाल के दौरान इस ताकतवर टैंक को दुश्मनों के लिए और ज्यादा खतरनाक बनाया जा सके। अब ये टैंक नार्थ इंडिया में आर्मी के सबसे बड़े बेस कैंप अंबाला कैंटोनमेंट में भी पहुंच चुका है। जिसके चलते अब अंबाला में भी सेना की ताकत और अधिक बढ़ गई है। लोकल मिलिट्री अथॉरिटी के अफसर भी इसे लेकर उत्साहित है।
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आर्मी का सबसे ताकतवर टैंक टी-90 एस (भीष्मा)
सेना के एक आला अफसर ने बताया कि ये टैंक बहुत ही शानदार मारक क्षमता वाला और दुश्मनों के लिए खतरनाक है। इस टैंक की एक अलग रेजीमेंट यहां अंबाला में मौजूद है। टैंक में अपग्रेडेड उपकरणों को लेकर जितनी खासियत हैं, उतना ही ये टैंक युद्ध भूमि में दुश्मनों के लिए खतरनाक भी है। इस टैंक का वजन 46.50 टन है। जबकि इसका इंजन 1000 ब्रीड हार्स पावर का है।
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आर्मी का सबसे ताकतवर टैंक टी-90 एस (भीष्मा)
खास बात यह कि इसमें तीन क्रू यानी एक ड्राइवर, एक गनर और एक कमांडर सवार होंगे। दूसरी खास बात यह कि इस पर चार हथियार एपी, एचईएफ, एचआईटी व मिसाइल मौजूद हैं। पहले तीन हथियारों की मारक क्षमता डेढ़ से ढाई किलोमीटर तक होगी, जबकि मिसाइल की मारक क्षमता 5 किलोमीटर तक होगी। टारगेट को सर्च कर, उसे नेस्तानाबूत करने के लिए सिगनल देने के लिए इसमें एक खास तरह का उपकरण भी लगा हुआ है।
इसमें एक और खास बात यह रहेगी कि यदि टैंक मैदान-ए-जंग में हैं तो गनर टारगेट सेट कर अपना काम कर रहा है और दुश्मनों पर नजर रखने वाला टैंक में बैठे कमांडर को यदि कहीं भी अचानक दाएं, बाएं या एकदम पीछे कोई दुश्मन का टारगेट दिखाई दे जाता है, तो वे टीडी-प्लस आटोमैटिक गन को एकदम उस डेंजर टारगेट की ओर मूव करेगा और उसे खत्म कर देगा।