मैं तो सेहरा बांधने की तैयारी कर रही थी, वो तिरंगे में लिपटकर आ जाएगा, ये सोचा नहीं थी। शहीद बेटा अंतिम यात्रा पर निकला तो मां का कलेजा फट गया।
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मनजिंदर सिंह का अंतिम संस्कार
शहीद मनजिंदर सिंह के अंतिम संस्कार के समय मां ने फूट-फूट कर अपनी अधूरी रह गई इच्छा जाहिर की तो हर आंख नम हो गई। पिता गुरदेव सिंह ने 23 साल के बेटे को मुखग्नि दी तो बेसुध होकर गिर पड़े। घर में शादी की तैयारियां चल रही थी, नौकरी लग जाने से सभी बेहद खुश थे कि मनजिंदर के शहीद होने की खबर आ गई और मातम छा गया। शहीद के भाई ने यह जानकारी दी।
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मनजिंदर सिंह का अंतिम संस्कार
दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम जिले के हलनू गांव में आतंकियों से मुठभेड़ में मजिंदर सिंह शहीद मनजिंदर सिंह का शव बुधवार देर रात पैतृक गांव बनावाला पहुंचा। वीरवार सुबह उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। शहीद की अंतिम यात्रा में पूरा गांव जुटा, वहीं शहीदी पर सलाम करते हुए डीसी धर्मपाल गुप्ता, एसएसपी परमबीर परमार, विधायक नाजर सिंह मानशाहिया व डॉ. मनोज बाला व अकाली नेता गुरप्रीत सिंह बनावाली ने परिवार के साथ दुख साझा किया।
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मनजिंदर सिंह का अंतिम संस्कार
जानकारी के मुताबिक, मनजिंदर सिंह की शादी नहीं हुई थी। करीब ढाई वर्ष पहले 10 सिख रेजिमेंट में भर्ती होकर श्रीनगर में वह ड्यूटी पर तैनात थे। उनके बड़े भाई भूपिंदर सिंह भी पठानकोट में आर्मी-92 फील्ड आरटी में तैनात है। मनजिंदर सिंह अंतरराष्ट्रीय स्तर का कबड्डी खिलाड़ी भी थे, लेकिन परिवार बहुत गरीब है। शहीद अपने पीछे बजुर्ग माता पिता को छोड़ गया है। उसके पिता गांव बनावाला में ही खेती करते हैं और परिवार का पालन पोषण करते हैं।
गांव के सरपंच बलराज सिंह ने बताया कि दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम जिले के हलनू गांव में आतंकियों से मुठभेड़ में मजिंदर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। बुधवार सुबह शहादत की खबर गांव पहुंची तो कोहराम मच गया। खबर सुनते ही शहीम की मां कर्मजोत कौर बेहोश हो गई। गांव में किसी भी घर में चूल्हा नहीं जल पाया है।