मेरा बेटा एयरफोर्स को कभी बदनाम नहीं करना चाहता था, न ही मैं एयरफोर्स को बदनाम चाहता हूं। बेटा अब इस दुनिया से चला गया है और वापस नहीं आने वाला। यह कहना है 27 फरवरी को एमआई-17 हेलीकॉप्टर क्रैश में शहीद हुए चंडीगढ़ के स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ वशिष्ठ के पिता जगदीश वशिष्ठ का।
विज्ञापन
2 of 5
सिद्धार्थ वशिष्ठ के पिता
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से ‘फ्रेंडली फायर’ की बातें चल रही हैं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। उन्होंने कहा, मुझे चंडीगढ़ आए 15 दिन हो गए हैं। रोज ऐसी बातें अखबार में आ रही हैं। यह एयरफोर्स को बदनाम करने वाली बात है। गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना की जमीन से हवा में मार करने वाली एक मिसाइल ने 27 फरवरी को अपने ही हेलीकॉप्टर एमआई-17 को दुश्मन का समझकर मार गिराया था। इस हादसे में हेलीकॉप्टर में सवार वायुसेना के सभी छह जवानों और एक नागरिक की मौत हो गई थी। उनमें स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ वशिष्ठ भी शामिल थे।
विज्ञापन
3 of 5
सिद्धार्थ वशिष्ठ के पिता
- फोटो : अमर उजाला
शहीद सिद्धार्थ वशिष्ठ का पूरा परिवार ही देश की सेवा में समर्पित रहा है। उनके परिवार में चार पीढ़ियों से सभी फौज में हैं। पत्नी आरती सिंह भी एयरफोर्स में स्क्वाड्रन लीडर हैं। जगदीश वशिष्ठ ने बताया कि सिद्धार्थ जब छोटे थे तो बचपन से ही कहते थे कि वह दादा सूबेदार मेजर (रिटा.) के जैसे फौज में जाएंगे। सिद्धार्थ साल 2010 में एयरफोर्स में भर्ती हुए। वह उप राष्ट्रपति, एयर चीफ मार्शल और प्रधानमंत्री को साथ लेकर भी हवाई यात्रा कर चुका थे।
4 of 5
सिद्धार्थ वशिष्ठ का पार्थिव शरीर
- फोटो : अमर उजाला
पिता ने बताया कि सिद्धार्थ ने छोटी उम्र में बहुत से अवार्ड भी जीते। केरल में आए बाढ़ के समय भी वह काफी समय तक केरल में रहे। जुलाई में सिद्धार्थ और उनकी पत्नी आरती की पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर हुई। सिद्धार्थ बहुत बहादुर थे। जब भी घर आते थे तो अपने ऑपरेशन्स की बात करते थे। वह अपनी टीम में बेस्ट थे। पिता ने बताया कि सिद्धार्थ तीन बहनों में सबसे छोटे थे। उनकी साल 2013 में शादी हुई थी।
पिता ने बताया कि सिद्धार्थ ने सेक्टर-41 स्थित शिवालिक पब्लिक स्कूल और डीएवी कॉलेज से पढ़ाई की थी। बीते कई सालों से परिवार के साथ वह चंडीगढ़ में ही रहते थे। जिस दिन हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ सिद्धार्थ की पत्नी छुट्टी पर थीं और गुरुग्राम में अपने भाई के पास गईं हुईं थी। वहीं, उन्हें सिद्धार्थ की शहादत की खबर मिली थी। पिता ने बताया कि जम्मू-कश्मीर से पहले सिद्धार्थ कोयंबटूर में भी अपनी सेवाएं दे चुके थे।