होजरी फैक्टरी में 14 घंटे से लगी हुई भीषण आग को बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड की 8 गाड़ियों ने 100 चक्कर लगाए। इस दौरान जिंदा जलने से बचे 3 मुलाजिम। पंजाब के लुधियाना के समराला चौक के पास स्थित मोहल्ला बेअंत पुरा की गली नंबर एक के अंदर बनी पुनीत होजरी मिल में रविवार तड़के साढ़े चार बजे भड़की आग। देखते ही देखते आग ने भयंकर रूप धारण कर लिया। घटना के समय फैक्टरी के अंदर काम कर रहे तीन मुलाजिमों ने पहली मंजिल पर लगी ग्रिल तोड़ी और बाहर कूद अपनी जान बचाई।
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8 गाड़ियां, 100 चक्कर, भीषण आग और खौफ के वो 14 घंटे
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इस दौरान मुलाजिम गौतम पंडित घायल हो गया। जिसे सीएमसी अस्पताल में भरती करवाया गया। दो अन्य मजदूर अशोक कुमार और सोनी शर्मा को मामूली चोटें आईं। सूचना मिलने के बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड की आठ गाड़ियों ने करीब सौ चक्कर लगा पानी आग पर डाला। आग से फैक्टरी में तैयार पड़ा करोड़ों रुपये का माल और मशीनें जलकर राख हो गईं। आग बुझाने के काम में दमकल विभाग के करीब पचास कर्मचारी जुटे हुए थे। आखिरकार 14 घंटे बाद आग पर काबू पाया जा सका।
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बेअंत पुरा मोहल्ला स्थित पुनीत फैक्टरी के मालिक संजीव धीर ने कहा कि उनकी फैक्टरी में स्वेटर, जैकेट और गर्म कपड़े सामान बनाया जाता है। करीब ढाई सौ मुलाजिम फैक्टरी में काम करते हैं। शनिवार को छुट्टी कर सब अपने घर चले गए थे। गौतम पंडित, अशोक कुमार और सोनी शर्मा नाइट ड्यूटी कर रहे थे। रविवार सुबह करीब साढ़े चार बजे फैक्टरी में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने भयंकर रूप धारण कर लिया।
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तीनों मुलाजिमों ने आग पर काबू पाने की कोशिश की, जब वह कामयाब नहीं हुए तो उन्होंने मेन गेट से बाहर निकलने की कोशिश की। वहां आग की लपटें तेज होने के कारण वह ऊपर चले गए, मगर आग तेजी से फैलती जा रही थी। तीनों मुलाजिमों ने पिछली गली में निकलने वाली खिड़की को तोड़ा और कूद गए। इसी दौरान किसी ने इसकी जानकारी फैक्टरी मालिक और फायर ब्रिगेड को दी। पुनीत होजरी में लगी आग की वजह से पीछे वाली गली में स्थित तीन घरों में भी दरारें आ गई।
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आग की लपटें देख सारा मोहल्ला सुबह छह बजे ही अपने घरों से बाहर निकल आया। जिस जगह पर पुनीत होजरी मिल बनी हुई है, उसकी गलियां काफी तंग है। मेन गली में तो फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंच गई, लेकिन फैक्टरी तक गाड़ियों को पहुंचने में काफी मुश्किल आई। जिस वजह से गाड़ियां बाहर ही खड़ी कर कर्मचारियों ने पाइप लंबी कर आग पर पानी डाला। तंग गलियों की वजह से फायर ब्रिगेड की छोटी गाड़ियां भी मौके पर पहुंच गई थी।
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फैक्टरी में आग काफी बढ़ चुकी थी। जिस वजह से धुएं को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिल पा रहा था। इसके बाद फायर कर्मचारियों ने जेसीबी मशीन की मदद से मेन गेट के ऊपर बनी खिड़कियों को तोड़ कर अंदर पानी डाला, जबकि साथ वाली फैक्टरी के साथ लगी दीवार को भी तीन जगह से तोड़ा गया। पीछे मोहल्ले में से भी कई जगह से खिड़कियां और दीवार तोड़ी गई।
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फैक्टरी मालिकों ने आरोप लगाए कि फायर ब्रिगेड विभाग के पास मुलाजिमों की कमी थी, जिस कारण एक गाड़ी काफी देर तक बंद रही। वहीं जिला फायर अफसर भूपिंदर सिंह ने इन आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि फायर विभाग के करीब पचास से साठ मुलाजिम आग पर काबू पाने के लिए अपनी जान लड़ा रहे थे। उन्होंने कहा कि गलियां तंग और फैक्टरी के अंदर कोई और रास्ता न होने की वजह से मुलाजिमों को कुछ दिक्कत जरूर आई, लेकिन उन्होंने अपनी जान जोखिम में डाल कर आग पर काबू पाने की कोशिश की।
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फायर अफसर ने कहा कि फैक्टरी के अंदर फायर सिस्टम लगा है या नहीं, अभी जांच नहीं की गई है। अगर फायर सिस्टम नहीं लगा तो फैक्टरी मालिकों पर बनती कार्रवाई की जाएगी। उधर बहादुर के रोड स्थित एक होजरी फैक्टरी में रविवार सुबह अचानक आग लग गई। फैक्टरी में काम करने वाले अयूब आलम ने इसकी जानकारी मालिक नरेश जैन को दी। नरेश ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचित किया। सूचना मिलने के बाद फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंची, जिन्होंने दो घंटे बाद आग पर काबू पा लिया। आशंका जताई जा रही है कि आग शार्ट सर्किट की वजह से लगी है।