पति और पत्नी के संबंधों को लेकर हाईकोर्ट ने बेहद ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जो कइयों को जहां झटका देगा, वहीं कइयों को राहत भी देखा। यहां पढ़ें फैसला...
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पत्नी को गुजारा भत्ता देने पर स्थिति स्पष्ट करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम आदेश जारी कर कहा है कि यदि पति भिखारी हो तो भी उसे पत्नी को उसकी हैसियत के अनुसार गुजारा भत्ता देना होगा। हाईकोर्ट का यह आदेश छात्र होने और परिजनों पर आश्रित होने की दलील देते हुए पत्नी को गुजारा भत्ता देने में सक्षम नहीं होने की पति की दलील को खारिज करते हुए आया है।
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गुरुग्राम निवासी पति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए स्थानीय अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें कोर्ट ने उसे पत्नी को 18 हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने को कहा था। याची ने कहा था कि 12 मार्च 2013 को उसकी शादी हुई थी। लेकिन पत्नी का व्यवहार काफी उग्र था और एक दिन वह खुद घर छोड़कर चली गई।
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फाइल फोटो
हाईकोर्ट ने पति की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याची बीटेक कोर्स करने की बात कहते हुए खुद को परिजनों पर आश्रित बता रहा है। वह फीस के तौर पर 60 हजार प्रति वर्ष भुगतान कर रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट होता है कि वह मोटी फीस देने में सक्षम है। साथ ही शादी के समय ससुराल पक्ष ने उसे कार, गहने व अन्य सामान दिए थे। शादी पर लगभग 60 लाख खर्च हुआ था। कोई भी समृद्ध परिवार अपनी बेटी की शादी न कमाने वाले से नहीं करेगा। ऐसे में यह स्पष्ट होता है कि याची घर की आय में योगदान कर रहा था।
कोर्ट ने अपना फैसला लिखते हुए कहा कि शारीरिक रूप से सक्षम व्यक्ति बिना किसी आय साधन वाली पत्नी को गुजारा भत्ता देने के लिए बाध्य है। भले ही पति भीख मांगता हो तो भी वह अपनी कमाई के अनुरूप गुजारा भत्ता देने के लिए बाध्य है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि पति ससुराल द्वारा दी गई आर्टिका कार को मेंटेन कर रहा है तो आखिर कैसे माना जा सकता है कि उसकी आय का कोई साधन नहीं है। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने गुुरुग्राम की अदालत द्वारा 5 सितंबर 2016 को जारी आदेश में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।