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सैल्यूट: जन्मजात होंठ और तालु कटे... आठ साल के अक्षय के लिए सेना कैसे बनी मददगार? अब बोलने लगा है मासूम

Tue, 19 Aug 2025 12:30 PM IST
अंकेश ठाकुर मोहित धुपड़, चंडीगढ़

सार

गरीब परिवार के बच्चे के लिए भारतीय सेना मददगार बनी है। आठ साल के मासूम अक्षय के पैदा होते ही होंठ और तालु कटे हुए थे। इस वजह से वह बोल नहीं पा रहा था, लेकिन अक्षय के लिए सेना ने वो कर दिखाया, जिसका अंदाजा शायद मासूम के परिजनों को भी नहीं था। 
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सैन्य अधिकारी के साथ अक्षय। - फोटो : अमर उजाला
मौन के अंधकार से घिरे आठ साल के बच्चे अक्षय के परिजनों ने कभी सोचा नहीं होगा कि बोलने में अक्षम उनके बच्चे के जीवन में कभी अभिव्यक्ति का उदय भी होगा। अक्षय भी आम लोगों की तरह बोल पाएगा और अपनी कहानी खुद बयां करेगा। यह सेना की मदद से संभव हो पाया है। सेना के अथक प्रयासों से अक्षय को न केवल आवाज मिली, बल्कि उसके खुशहाल जीवन का भी आगाज हुआ है।
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बोलने की कोशिश करता अक्षय। - फोटो : अमर उजाला
गरीब परिवार के बच्चे के लिए भारतीय सेना मददगार बनी है। आठ साल के मासूम अक्षय के पैदा होते ही होंठ और तालु कटे हुए थे। इस वजह से वह बोल नहीं पा रहा था, लेकिन अक्षय के लिए सेना ने वो कर दिखाया, जिसका अंदाजा शायद मासूम के परिजनों को भी नहीं था। 
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बच्चों के साथ मौज मस्ती करता अक्षय। - फोटो : अमर उजाला
जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के गांव डुग्गन का रहने वाला अक्षय के पिता दिहाड़ीदर खेत मजदूर हैं। घर की माली हालत भी बहुत अच्छी नहीं है। जैसे-तैसे परिवार का गुजर-बसर कर रहे हैं। परिजन बहुत दुखी थे क्योंकि बच्चा अक्षय बोल पाने में अक्षम था। पैदा होते ही उसके होंठ और तालु कटे हुए थे। तीन साल की उम्र में परिजनों ने जैसे-तैसे कर उसका ऑपरेशन तो करवाया मगर कुछ भी फायदा नहीं हुआ।

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सेना अधिकारी के साथ अक्षय। - फोटो : अमर उजाला
कुछ महीनों पहले अक्षय के पिता सेना के अधिकारी के संपर्क में आए थे। उन्होंने अक्षय की बीमारी के बारे में बताते हुए मदद मांगी थी। संबंधित सैन्य अफसर ने आर्मी मेडिकल कोर (एएमसी) के एक अफसर को अक्षय पर काम करने की सलाह दी। कोर के अधिकारी ने बताया कि उनके सीनियर ने उन्हें टास्क देते हुए कहा था कि अक्षय एक स्पेशल चाइल्ड है, यदि उसकी आवाज लौट आए तो यह बच्चे और उनके परिजनों के लिए बड़ी राहत की बात होगी, क्योंकि अक्षय की पूरी जिंदगी उसके सामने हैं।
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मां की गोदी में अक्षय। - फोटो : अमर उजाला
नाक और गले की आवाज का अंतर समझाया
अधिकारी बताते हैं कि उसके बाद उन्होंने अक्षय पर महीनों काम किया। निशुल्क इलाज के साथ-साथ उसकी स्पेशल काउंसलिंग करते हुए बच्चे को नाक और गले की आवाज के बीच अंतर बताते हुए अक्षर, शब्द और वाक्य बोलना सिखाया। अंतत: आज अक्षय काफी हद तक साधारण बच्चों की तरह बोलने लगा है। हिंदी के साथ-साथ उसे अंग्रेजी के शब्द बोलना भी सिखाए जा रहे हैं। अक्षय के माता-पिता और दादी अक्षय की आवाज सुन फूल नहीं समा रहे हैं जबकि मां का सपना है कि अक्षय पढ़-लिखकर सेना में अफसर बने।
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