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Haryana : सफर 2022, रोजगार और भर्तियों को लेकर साल भर विपक्ष के निशाने पर रही सरकार, सबक ले 2023 की राह चुनेगी

Wed, 28 Dec 2022 07:06 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
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हरियाणा के सीएम मनोहर लाल और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा - फोटो : File Photo
साल 2022 समाप्ति को है और नए साल 2023 के स्वागत की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इस नए साल का लेखा-जोखा लेकर सरकार 2024 के चुनावी रण में कूदेगी। लिहाजा हरियाणा सरकार की नजर अब सरकारी योजनाओं और विभागों पर है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने स्वयं योजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी है। भाजपा ने मंत्रियों और विधायकों को फील्ड में उतारा है।

अफसर हर शुक्रवार को जिलों में जाकर सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जान रहे हैं। 2022 में ग्रामीण और शहरी विकास सरकार की मुख्य प्राथमिकता रहा। रोजगार और भर्तियों को लेकर साल भर सरकर विपक्ष के निशाने पर रही, लेकिन बच्चों को टैबलेट देना बड़ी उपलब्धि में शामिल है।

अवैध खनन करने वालों पर सरकार ने शिकंजा कसा, लेकिन कानून की आड़ लेकर वे 100 करोड़ रुपये से अधिक का जुमार्ना नहीं भर रहे। इस साल के जाते-जाते कोरोना दोबारा डरा रहा है, लेकिन सरकार की तैयारी पूरी है। रोजगार को लेकर सरकार ने अनेक कदम उठाए, मगर पेचीदगियां कम नहीं हुईं। कुल मिलाकर 2022 के अच्छे बुरे कार्यों से सबक लेकर सरकार 2023 का सफर तय करेगी।
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राजनीति: सत्ता के लिए शहर के साथ गांवों में होना होगा मजबूत

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मनोहर लाल और दुष्यंत चौटाला - फोटो : PTI (File Photo)
निकाय चुनाव के नतीजे तो सुखद रहे, लेकिन पंचायती राज चुनाव ने गठबंधन सरकार को मंथन पर मजबूर किया है। जोड़-तोड़ से अधिकतर जिला परिषद और ब्लॉक समिति चेयरमैन भाजपा-जजपा के ही बनेंगे पर 2024 के लिए गठबंधन दलों को धरातल पर खुद को और मजबूत करना होगा। कांग्रेस ने आदमपुर उपचुनाव में कड़ी चुनौती दी। आप और इनेलो पंचायत चुनावों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रही हैं।
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शिक्षा: आगे तो बढ़े, लेकिन लक्ष्य से काफी पीछे 

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
सात लाख बच्चों को टैबलेट देना सरकार की बड़ी उपलब्धि रही। हालांकि, सिम वितरण और गलत कंटेंट चलने की शिकायतें भी मिलीं। स्कूलों के मर्जर और शिक्षकों के अव्यवहारिक तबादलों के कारण स्कूल शिक्षा विभाग निशाने पर रहा। बच्चे और अभिभावक अभी तक आंदोलनरत हैं। स्कूलों में तालाबंदी जारी है। पक्के व कच्चे शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से कुछ राहत जरूर मिली। 2022 में भी जेबीटी शिक्षकों के तबादले नहीं हो पाए। अतिथि शिक्षक सेवा नियमों और गलत तबादलों को लेकर आंदोलनरत रहे। छात्राओं के लिए बड़ी राहत है कि साथी योजना के तहत शिक्षण संस्थानों में परिवहन सुविधा मुहैया कराई है। 25 लाख स्कूली बच्चों का साल में दो बार स्वास्थ्य परीक्षण करना शुरू किया गया है। मॉडल संस्कृति स्कूल 138 से बढ़कर 500 नहीं हो पाए। 50 स्टेम लैब अभी तक नहीं बनीं। सरकारी और निजी स्कूलों का ट्विनिंग यानि एक-दूसरे के साथ जोड़ने का कार्यक्रम शुरू नहीं हो पाया। प्रारंभ संस्थान हर जिले में स्थापित नहीं हो पाए।

सार्वजनिक परिवहन: उड़ान नहीं भर पाए सपने

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Haryana Roadways सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
महाराजा अग्रसेन हवाई अड्डा उड़ान योजना के तहत ही रहेगा। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की घोषणा कागजी साबित हुई। करनाल और भिवानी हवाई पट्टियों के रनवे की लंबाई 5000 फीट नहीं हुई। रोडवेज बेड़े में 809 में से लगभग दो सौ नई बसें ही शामिल हो पाईं। हरियाणा रोडवेज इंजीनियरिंग कारपोरेशन में इन बसों को तैयार किया जा रहा है। ठेकेदारों के नखरों के कारण बसें समय पर तैयार नहीं हो रहीं। परिवहन मुख्यालय के कुछ बड़े अधिकारियों का डिफाल्टर ठेकेदार को भी संरक्षण है, इसलिए वह मनमाने तरीके से बसें बना रहे हैं। 20 लग्जरी और 150 हीट वेंटिलेटेड एसी बसें खरीदने की प्रक्रिया इस साल सिरे नहीं चढ़ पाई। एक हजार बनी बनी अन्य बसें खरीदने का प्रस्ताव भी विचाराधीन ही रहा। लंबे समय के बाद छह जिलों में ई-टिकटिंग परियोजना शुरू हो गई। मैक्सी कैब नीति प्रस्ताव तक ही सीमित रही।
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पर्यावरण संरक्षण: छोटे-छोटे कदमों से मिलेगी बड़ी सफलता

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Environment 2022 - फोटो : Istock
जलवायु एवं सतत विकास कोष अभी सपना है। विश्वविद्यालयों में जल, वायु, पृथ्वी, जंगल, ऊर्जा और कचरे पर छह अंतर संकाय शोध केंद्र स्थापित नहीं हुए। दस हाईटेक नर्सरियां तैयार नहीं हो पाईं। कालका से कलेसर तक नेचर ट्रेल कागजों में ही है। भिवानी की डाडम व अन्य खान, यमुनानगर-नूंह क्षेत्र में अवैध, अवैज्ञानिक व बेतरतीब खनन के लिए ठेकेदारों को सौ करोड़ से अधिक का जुमार्ना लग चुका है, लेकिन कानून की आड़ लेकर वे राशि जमा नहीं करवा रहे।

इस साल की शुरुआत में ही डाडम में हादसा होने से मजदूरों को जान गंवानी पड़ी थी। ई-रवाना लागू होने के बावजूद खनन क्षेत्र में घोटाले रुके नहीं। पराली जलाने की घटनाओं में इस साल 30 फीसद से अधिक की कमी आई है। प्रख्यात पर्यावरणविद दर्शन लाल जैन के नाम पर तीन और एक लाख रुपये के दो पुरस्कार शुरू किए गए हैं। जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कम करने के लिए लाइफ  परियोजना पर काम शुरू, मिस्र में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लिया। पेड़ों की गणना और जियो टैगिंग का काम शुरू हुआ।
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विकास: सीमा में रहकर खींचा विकास का खाका

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हरियाणा के सीएम मनोहर लाल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पांच हजार रिचार्ज बोरवेल का लक्ष्य दूर। आठ उपमंडल घोषित किए, लेकिन अभी अधिसूचना जारी नहीं हुई। सरकार ने वित्तीय प्रबंधन में फूंक-फूंककर कदम रखे। तय सीमा से बाहर जाकर कर्ज नहीं लिया। कर्ज लेकर घी पीने की धारणा बदली। जबरन भूमि अधिग्रहण को बंद कर ई-भूमि के जरिये किसानों से सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन ली।

लैंड पूलिंग पॉलिसी में किसान अपनी जमीन शामिल कर शहरी और औद्योगिक विकास में भागीदार बनने लगे। सहभागिता नीति में जमीन देने वाले पहले पांच किसानों को सरकार ने परियोजनाओं में निदेशक बनाने का निर्णय लिया। अपार्टमेंट भवनों के लिए स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य किया गया। हरियाणा भवन कोड में संशोधन होने पर बहुमंजिला इमारतों का ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी होने के बाद भी समय-समय पर ऑडिट होगा।

हरियाणा में सीआईडी का चेहरा पूरी तरह बदला है। सीआईडी अब उधार की सूचनाओं से काम नहीं चलाती। ऑपरेशन बुलडोजर सीआईडी की ही देन रहा। खनन माफिया, मिलावटखोरों और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ  भी सीआईडी ने लगातार अभियान चला आ रहा। गरीबों को छत्त मुहैया कराने के लिए मुख्यमंत्री हाउसिंग फॉर ऑल योजनाओं की खुद समीक्षा कर रहे। सूक्ष्म सिंचाई योजना के अलावा अनेक बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
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ई-गवर्नेंस: समृद्ध भविष्य की रखी नींव

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ई गवर्नेंस
सरंचनात्मक व संस्थागत सुधार के लिए परिवार पहचान पत्र को इस साल पूरी तरह से लागू किया। एक समान प्रकृति वाले विभागों का आपस में विलय, ग्लोबल सिटी, पंचग्राम और औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया। स्क्रैप पॉलिसी में नए वाहन खरीदने पर दस फीसदी छूट की सुविधा दी, कपड़ा नीति को मंजूरी दी, चार हजार करोड़ रुपये निवेश और 20 हजार नए रोजगार का लक्ष्य।

चिटफंड कंपनियां करने के साथ ही गुरुग्राम से द्वारका तक मेट्रो और फरीदाबाद महानगरीय विकास प्राधिकरण को मंजूरी दी गई। सहभागिता के तहत पीपीपी मोड पर काम हुआ। बस अड्डे बन रहे और बड़े प्रोजेक्ट में भी सामुदायिक भागीदारी बढ़ी है।

स्वास्थ्य: बॉन्ड पॉलिसी और डॉक्टरों के खाली पदों ने दिया दर्द

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Health Services - फोटो : Istock
पिछले एक साल में प्रदेशभर के जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में सुविधाओं में इजाफा हुआ है। तमाम अस्पतालों और मेडिकल कालेजों में अब वेंटीलेटर से लेकर ऑक्सीजन प्लांट की व्यवस्था है। इस समय 835 वेंटिलेटर हैं।, पहले इनके लिए मारामारी रहती थी। इसके अलावा, आईसीयू बेड की संख्या छह हजार से अधिक हो गई है। चार मेडिकल कॉलेजों में 100-100 बेड के आईसीयू तैयार किए गए हैं। इस साल स्वास्थ्य विभाग को 847 डाक्टर और 1600 नर्स मिले। बावजूद इसके इस समय भी विभाग में 6600 से अधिक पद खाली हैं।

इनमें फार्मासिस्ट, रेडियोग्राफर और लैब टेक्नीशियन के 1300 से अधिक पद खाली होने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। मेडिकल कॉलेजों में भी पिछले एक साल 189 से अधिक पद खाली हैं और पिछले एक साल से भर्ती प्रक्रिया लंबित चल रही है। सरकार का हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने का लक्ष्य है, अगले साल में जींद, नारनौल और भिवानी में कॉलेज निर्माण पूरा हो जाएगा। एमबीबीएस बॉन्ड पॉलिसी को लेकर दो माह तक विद्यार्थी आंदोलनरत रहे। संशोधित पॉलिसी जारी होने के बाद ही विद्यार्थी माने।

रोजगार: नए साल में बंपर रोजगार की आस

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सांकेतिक तस्वीर
रोजगार और बेरोजगारी को लेकर सालभर विपक्ष ने सरकार को निशाने पर रखा। सीईटी की परीक्षा कराने की मांग को लेकर प्रदेशभर में युवा सड़क पर उतरे। इस साल कई भर्तियां सिरे चढ़ीं, बावजूद इसके प्रदेश में 1.80 लाख पद खाली हैं। लंबे समय से अटकी कला अध्यापक, सब इंस्पेक्टर, ड्राइंग टीचर, आईटीआई इंस्ट्रेक्टर भर्ती पूरी हुई। सरकार का 2023 में एक लाख लोगों को नौकरी देने का लक्ष्य है। ग्रुप सी के 32 हजार पदों के लिए सीईटी की परीक्षा हो चुकी है और फरवरी में ग्रुप डी के 22 हजार पदों के लिए परीक्षा होगी।

इसी प्रकार, एचपीएससी में 10 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से भी नौकरियां दी जाएंगी। प्रदेश में कुल चार लाख 58 हजार 808 स्वीकृत पद थे। इनमें 13 हजार 462 पदों को सितंबर में सरकार ने खत्म कर दिया। अब स्वीकृत पदों की संख्या चार लाख 45 हजार 346 कर दी गई है। इनमें दो लाख 62 हजार 849 पद भरे हुए हैं, जबकि एक लाख 82 हजार 497 पद खाली हैं। इनमें से 28,013 पदों पर ठेके के कर्मचारी नियुक्त हैं।
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खेल: जिला और ब्लॉक स्तर पर सुविधाओं की दरकार

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खेलो इंडिया। - फोटो : अमर उजाला
खेलो इंडिया ने हरियाणा के खिलाड़ियों में जोश भरा। इस आयोजन से पंचकूला स्टेडियम की तस्वीर बदली। हरियाणा के खिलाड़ियों ने साल 2022 में भी प्रदेश और देश का परचम बुलंद रखा। राष्ट्रमंडल खेलों में हरियाणा के छोरे और छोरियों ने 20 मेडल जीते। इनमें से छह गोल्ड कुश्ती में हैं। वहीं, 17 पदक 17 खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत स्पर्धा में जीते हैं। टीम इवेंट में तीन पदक दिलाने में 12 खिलाड़ियों की अहम भूमिका रही है। इमें नौ खिलाड़ी महिला हॉकी, दो पुरुष हॉकी व एक खिलाड़ी क्रिकेट टीम में शामिल रहीं।

इनके अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की अन्य प्रतियोगिताओं में प्रदेश के खिलाड़ियों ने अपना लोहा मनवाया। खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने हरियाणा खेल अकादमी स्थापित करने की घोषणा की है। साथ ही खिलाड़ियों को चोट से उभारने के लिए पांच पुर्नवास केंद्र खोले जाने हैं। पंचकूला में इसकी शुरुआत हो चुकी है। तमाम उपलब्धियों के बीच आज भी जिलास्तर और ब्लाक स्तर पर बनाए गए स्टेडियम के हालात खस्ता हैं। मैदानों पर झाड़ियों का कब्जा है। ग्राउंड मैन को पिछले नौ माह से वेतन नहीं मिल रहा है। सरकार का दावा है कि 135 करोड़ रुपये से स्टेडियम का सुधार किया जाएगा।
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