Environment 2022
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जलवायु एवं सतत विकास कोष अभी सपना है। विश्वविद्यालयों में जल, वायु, पृथ्वी, जंगल, ऊर्जा और कचरे पर छह अंतर संकाय शोध केंद्र स्थापित नहीं हुए। दस हाईटेक नर्सरियां तैयार नहीं हो पाईं। कालका से कलेसर तक नेचर ट्रेल कागजों में ही है। भिवानी की डाडम व अन्य खान, यमुनानगर-नूंह क्षेत्र में अवैध, अवैज्ञानिक व बेतरतीब खनन के लिए ठेकेदारों को सौ करोड़ से अधिक का जुमार्ना लग चुका है, लेकिन कानून की आड़ लेकर वे राशि जमा नहीं करवा रहे।
इस साल की शुरुआत में ही डाडम में हादसा होने से मजदूरों को जान गंवानी पड़ी थी। ई-रवाना लागू होने के बावजूद खनन क्षेत्र में घोटाले रुके नहीं। पराली जलाने की घटनाओं में इस साल 30 फीसद से अधिक की कमी आई है। प्रख्यात पर्यावरणविद दर्शन लाल जैन के नाम पर तीन और एक लाख रुपये के दो पुरस्कार शुरू किए गए हैं। जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कम करने के लिए लाइफ परियोजना पर काम शुरू, मिस्र में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लिया। पेड़ों की गणना और जियो टैगिंग का काम शुरू हुआ।