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तिरंगे में लिपटकर लौटा बेटा, मां नहीं चाहती थी फौज में जाए

Wed, 17 Feb 2016 05:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरदासपुर
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नक्सलियों की गोली का शिकार हुए शहीद लांसनायक का शव तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचा तो मां सुधबुध खो बैठी। वह नहीं चाहती थी कि बेटा सेना में जाए।
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तिरंगे में लिपटकर लौटा बेटा, मां नहीं चाहती थी फौज में जाए

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तिरंगे में लिपटी शहीद बेटे नायक मंजीत सिंह की पार्थिव देह को देखकर मां दर्शन कौर को विश्वास नहीं हो रहा था कि बेटा नहीं रहा। उन्होंने नम आंखों से कहा कि घर में छोटा होने के कारण मंजीत सबका लाडला था। वह उससे सिविल नौकरी कराना चाहती थी, मगर उसने अपने पिता रिटायर्ड हवलदार प्रीतम सिंह व बड़े भाई सुखदेव सिंह के पदचिह्नों पर चलते हुए सेना में भर्ती होकर अपनी सैन्य पृष्ठभूमि को बरकरार रखा।
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गुरदासपुर के ब्लॉक काहनूवान के गांव कोट धंदल वासी लांसनायक मनजीत सिंह सिखलाई रेजीमेंट गुवाहाटी में लांसनायक के पद पर तैनात थे। वह 8 जनवरी को एक महीने की छुट्टी काटने के लिए गांव कोट धंदल में आए थे। आठ फरवरी को छुट्टी काटकर वापस अपनी रेजीमेंट में जा रहे थे, वह रास्ते में ही नक्सलियों का शिकार हो गया। बीती 13 फरवरी को कटिहार के पास उनका शव मिला था।

तिरंगे में लिपटकर लौटा बेटा, मां नहीं चाहती थी फौज में जाए

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शहीद लांसनायक मनजीत सिंह का आज उनके पैतृक गांव के शमशानघाट में पूरे सरकारी सम्मानों के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान कोई भी नेता परिवार के साथ दुख व्यक्त करने के लिए नहीं पहुंचा। शहीद मनजीत सिंह की पार्थिव शरीर को सलामी सिख रेजीमेंट के सूबेदार दिलबाग सिंह की अगुवाई में सैन्य टुकड़ी ने दी। शहीद मनजीत सिंह की पार्थिव शरीर को अग्नि उनके पिता प्रीतम सिंह ने दी।
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लांसनायक मनजीत सिंह के अंतिम संस्कार के समय जिला प्रशासन की तरफ से तहसीलदार नवतेज सिंह सोढ़ी और नगर काउंसिल के प्रधान जरनैल सिंह पहुंचे। शहीद के पिता प्रीतम सिंह, माता दर्शन कौर, पत्नी संदीप कौर और भाई सुखदेव सिंह की रो-रोकर हालत खराब थी। पिता प्रीतम सिंह ने बताया कि मनजीत सिंह की शादी 10 वर्ष पहले हुई थी। कोई संतान न होने से बेटे ने साढे़ तीन वर्ष की बेटी गोद ली थी।
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