एक जुलाई से लागू होने जा रहे जीएसटी बिल का बहुत बड़ा साइड इफेक्ट सामने आया है। इससे जहां अपनों को नुकसान होगा, वहां दूसरों को फायदा होगा।
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GST के विरोध में हड़ताल
व्यापारियों की माने तो जीएसटी लागू होने के बाद चाइना व दूसरे देशों से आने वाला माल पहले की अपेक्षा सस्ता हो जाएगा। जबकि यहां का माल महंगा हो जाएगा। ऐसे में व्यापारी व उद्योगपति अपने ही देश में हार जाएंगे। व्यापारियों के अनुसार चाइना का कोई भी एक हजार रुपये में आने वाला माल आठ सौ रुपये में मिलेगा, जबकि यहां का पहले एक हजार रुपये में आना वाला माल 1250 रुपये हो जाएगा।
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जीएसटी
- फोटो : amar ujala
दरअसल, औद्योगिक नगरी पानीपत का उद्योगपति और व्यापारी जीएसटी के विरोध में उतर आया और सरकार को 25 जून तक का समय दिया है। छोटे उद्यमियों ने इसका सरलीकरण न होने पर 25 के बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी। पानीपत बंद के आह्वान पर शहर की टेक्सटाइल उद्योग व बाजार पूरी तरह से बंद रहा।
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GST के विरोध में हड़ताल
व्यापारी यूनियनों ने करीब 40 व्यापारी व औद्योगिक एसोसिएशन के साथ करीब 30 हजार फैक्ट्री व करीब 15 सौ दुकानें बंद होने का दावा किया। एक दिन ही हड़ताल के चलते करीब एक हजार करोड़ का व्यापार प्रभावित होने की बात कही है। व्यापारियों ने लघु सचिवालय पहुंचकर सीटीएम के मार्फत मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
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GST का विरोध
लघु उद्योगों से संबंधित चैंबर ऑफ टेक्सटाइल मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन की 10 एसोसिएशनों और करीब 30 अन्य मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशनों के हजारों व्यापारियों ने वीरवार को जीएसटी के विरोध में पानीपत बंद रखा। उद्यमी व व्यापारियों सुबह अमर भवन चौक से लेकर लघु सचिवालय तक जीएसटी का विरोध करते हुए पैदल रोष मार्च निकाला।
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GST का विरोध
फिर डीसी की अनुपस्थिति में सीटीएम संदीप अग्रवाल को पीएम मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा। सीटीएम ने जल्द ही ज्ञापन को पीएम तक भिजवाने का आश्वासन दिया। व्यापारियों ने कहा कि जीएसटी छोटी फैक्ट्री संचालकों के लिए एक काले कानून के समान है। कोई भी छोटा व्यापारी एक माह में तीन बार रिटर्न नहीं भर सकता। वहीं गलती कोई और करें और सजा किसी व्यापारी को मिलने का प्रावधान भी काले कानून के समान है।
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gst give employment
सीटीएमए पानीपत के प्रधान राकेश चुघ व अन्य एसोसिएशनों के प्रधानों ने कहा कि केंद्र सरकार ने जीएसटी में ऐसे जटिल प्रावधान किए हैं कि उन्हें पूरा करना किसी छोटे व्यापारी के वश में नहीं है। किसी व्यापारी द्वारा दूसरे राज्य में अपना माल बेचने के लिए वहां का भी जीएसटी नंबर लेना न्यायसंगत नहीं है। वे तो जीएसटी के प्रावधानों को ही पूरा करने में लगे रहेंगे और उनका व्यापार बंद हो जाएगा।
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gst give employment
राकेश चुघ ने कहा कि यदि सरकार को लघु उद्योग से संबंधी शहर की करीब 30 हजार छोटी फैक्ट्रियों को चालू रहने देना है तो जीएसटी के प्रावधानों का सरलीकरण करना पड़ेगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो इन फैक्ट्री मालिकों और उनमें काम करने वाले करीब तीन लाख श्रमिकों के लिए रोजी-रोटी के लाले पड़ जाएंगे।
सरकार ने मेक इन इंडिया का नारा दिया था और उद्यमियों को सरकार से बहुत उम्मीद थी। अब जीएसटी लागू होते ही व्यापार ठप हो जाएगा। उद्यमियों को अपने उद्योग धंधे बंद ही रखने पड़ेंगे। सरकार को विदेशी व्यापार को बढ़ावा देने की बजाय अपने व्यापार को बढ़ाना चाहिए।
- राकेश चुघ, प्रधान, सीटीएमए पानीपत