फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पहनने को जूते नहीं, कीचड़ भरे गड्ढों में दौड़ी और बन गई 'उड़नपरी', लोग बुलाते हैं 'ढिंग एक्सप्रेस'

Thu, 04 Apr 2019 12:47 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
1 of 6
एथलीट हिमा दास
पहनने को जूते नहीं थे, दौड़ने को मैदान नहीं। पर हिम्मत नहीं हारी और पानी-कीचड़ से भरे गड्ढों में दौड़-दौड़ कर बन गई 'उड़नपरी'। अब लोग इन्हें 'ढिंग एक्सप्रेस' बुलाते हैं, जानिए कौन।
विज्ञापन

2 of 6
एथलीट हिमा दास
हम बात कर रहे हैं हिमा दास की, जो बुधवार को चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज सेक्टर 10 में पहुंचीं थीं। उन्होंने कॉलेज में 8 लाख से नए बने बैडमिंटन कोर्ट का उद्घाटन किया। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए हिमा दास ने कहा कि आईएएएफ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में मेडल जीतने के बाद अब हर किसी की उम्मीदें मुझसे हैं। लोग ओलंपिक में मुझसे मेडल लाने के बातें करने लगे हैं।
विज्ञापन

3 of 6
हिमा दास
हिमा कहती हैं कि एक भारतीय होने के नाते देश के लोगों की भावनाओं की आदर करती हूं, लेकिन फिलहाल में टाइम के पीछे भागती हूं। मेरा ध्यान मेडल के बजाय अपना पहले का समय बेहतर करने पर रहता है। अभी एशियन और उसके बाद वर्ल्ड चैंपियनशिप ही मेरा टारगेट है। इसके लिए विदेशों में अभ्यास करने के लिए जा रही हूं। भारत में इस मौसम में बहुत गर्मी रहती है, इसलिए पोलैंड और टर्की में जाकर अभ्यास करना है।

4 of 6
hima das
आईएएएफ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर हिमा दास ने इतिहास रचा। हिमा यह कारनामा करने वाली पहली भारतीय महिला धावक रहीं। असम के नौगांव जिले के गांव ढिंग रहने वाली हिमा दास अपनी कड़ी मेहनत के दम पर आज इस मुकाम तक पहुंचीं हैं। वे बताती हैं कि अभ्यास के लिए मैदान तक नहीं मिलते थे। मैंने कभी पानी और कीचड़ से भरे गड्ढों वाले मैदानों पर दौड़ कर अभ्यास किया।
विज्ञापन

5 of 6
Hima Das
हिमा कहती हैं कि आज जिस मुकाम पर खड़ी हूं, इसमें मुझे एथलेटिक्स ने ही पहचान दिलाई। अब इस खेल में भारत को शिखर तक पहुंचाना ही मेरा लक्ष्य है। लोग उन्हें ढिंग एक्सप्रेस कहते हैं। महज दो साल पहले ही उन्होंने रेसिंग ट्रैक पर कदम रखा था। उससे पहले उन्हें अच्छे जूते पहनने को नहीं मिलते थे। परिवार में 6 बच्चों में सबसे छोटी हिमा पहले लड़कों के साथ पिता के धान के खेतों में फुटबॉल खेलती थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
hima das
हिमा बताती हैं कि उनके पिता रंजीत दास के पास महज दो बीघा जमीन है, जबकि मां जुनाली घरेलू महिला हैं। जमीन का यह छोटा-सा टुकड़ा ही परिवार के छह सदस्यों की रोजी-रोटी का जरिया है। हिमा कहती हैं कि उनके पिता को वह पहाड़ की तरह सख्त लगती हैं। वे मुझे गांव से बाहर अकेले जाने नहीं देते थे। लेकिन मैं कहती थी कि डरे नहीं, चिंता नहीं करें। पिता के मुताबिक, हिमा कुछ भी कर सकती है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें