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बेहद खास हैं गोबर से बने दीप और मूर्तियां, खाद का भी करेंगी काम, नि:शुल्क बांटने की योजना

Mon, 26 Oct 2020 12:00 PM IST
ajay kumar नीरज कुमार, चंडीगढ़
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गोबर से तैयार दीप और मूर्तियां।
इस बार दीपावली पर स्वदेशी दीपों और मूर्तियों का उपयोग होगा। चंडीगढ़ का गौरी शंकर सेवादल इसे और भी खास बनाने में जुटा है। सेवादल सेक्टर- 45 स्थित गौशाला में गोबर से पचास हजार दीये तैयार करवा रहा है। इसके अलावा गोबर से लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्तियां भी बनाई जा रही हैं। सबसे खास बात यह है कि इन दीयों से पर्यावरण संरक्षण भी होगा।
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- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दीयों का उपयोग करने बाद इन्हें जलाकर राख को गमलों में खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। दीये और मूर्तियां दीपावली से दो दिन पहले लोगों को दी जाएंगी। गौरी शंकर सेवादल के प्रधान रमेश कुमार निक्कू ने बताया कि गौशाला में दीए बनाए जा रहे हैं। साथ इन दीयों को आकर्षक बनाने के लिए इन पर पेंट किया जा रहा है।
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- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पचास हजार दीये बनाए जाएंगे। इनमें से काफी संख्या में दीये तैयार भी कर लिए हैं। उन्होंने कहा कि आज पर्यावरण संरक्षण से ज्वलंत मुद्दा बन गया है। साथ ही कोरोना काल में लोगों की आर्थिक स्थिति सही नहीं है। इसलिए मन में विचार आया कि क्यों न ऐसा काम किया जाए जिससे दीवाली पर पर्यावरण को नुकसान न हो और लोग खुशी से दीपावली मना सकें।

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chandigarh - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यही वजह है कि सेवादल ने यह फैसला लिया। उन्होंने कहा कि इस कार्य में सेवादल के कार्यकर्ता लगे हुए हैं। ये दीए नि:शुल्क लोगों को दिए जाएंगे। इसके अलावा लक्ष्मी और गणेश जी की प्रतिमाएं भी बनाई जा रही हैं। 
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- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आठ से नौ इंच की बनाई जा रही गणेश जी की प्रतिमाएं 
उन्होंने कहा कि गणेश की प्रतिमाएं आठ से नौ इंच की बनाई जा रही हैं ताकि उसे ले जाने में परेशानी न हो। पूजा के बाद उसे अपने घर में रख भी सकें या उसे गमलो में खाद के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यहां गोबर के ब्लॉक के अलावा गोमूत्र अर्क भी तैयार होता है। गोशाला में नौ सौ से भी अधिक गोवंश हैं। 
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