सेना में 'रोटी की जंग' छेड़ने वाले बीएसएफ से बर्खास्त तेज बहादुर ने अब एक ऐसा राज खोला है, जिसके बारे में जानकर बीएसएफ को हैरानी होगी।
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Tej Bahadur Yadav
- फोटो : File Photo
दरअसल, तेज बहादुर ने अपनी बर्खास्तगी के आदेशों को चुनौती दी है। तेज बहादुर को बीएसएफ के जवानों को मिलने वाले खाने को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करने को लेकर बर्खास्त कर दिया गया था। तेज बहादुर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके कहा है कि मैंने तो अपने और अपने साथियों के लिए सही और पर्याप्त खाना ही मांगा था, मैंने ऐसी क्या भूल कर दी कि सरकार ने मेरी रोजी-रोटी ही छीन ली।
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Tej Bahadur Yadav
- फोटो : File Photo
हाईकोर्ट ने तेज बहादुर की याचिका पर केंद्र सरकार, बीएसएफ व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। वहीं तेज बहादुर ने अपनी याचिका में बताया कि उसने वीडियो बनाया था, लेकिन इस वीडियो को 8 जनवरी को उसके दोस्तों ने फेसबुक पर अपलोड कर दिया था। उसे नहीं पता था कि ये कब पोस्ट किया गया था। अगले ही दिन अधिकारियों ने उन्हें बुलाकर विडियो डिलीट करने को कहा था, जिसके बाद विडियो डिलीट भी कर दिया गया था।
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तेज बहादुर यादव घर पहुंच गए
इसके बाद 10 जनवरी को मामले की जांच शुरू कर दी गई थी। डीआईजी ने मामले की जांच करके उन्हें निर्दोष करार देकर सेवा में लौटने के आदेश दिए थे। 31 जनवरी को उसकी वीआरएस स्वीकार करते हुए उसे सेवानिवृत्ति के आदेश जारी कर दिए गए। सेवानिवृत्ति के आधे घंटे बाद ही उसे हिरासत में ले लिया गया। हिरासत में ही उसे बताया गया कि उसकी स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति की अर्जी को ख़ारिज कर उसे सेवा से बर्खास्त किया जा रहा है।
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Tej Bahadur Yadav
बर्खास्तगी से यह आदेश जारी किये जाने से पहले उसे नोटिस तक जारी कर उसका पक्ष तक नहीं पूछा गया। इस फैसले को बीएसएफ डीजी के समक्ष चुनौती भी दी थी, जिसे खारिज कर दिया गया। याची ने पूछा है कि अच्छा और पर्याप्त भोजन मांगना क्या अपराध है? संवैधानिक अधिकारों के तहत इसकी मांग की जा सकती है। तेज बहादुर ने एडवोकेट एसपी यादव के जरिये याचिका की है।
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बीएसएफ का जवान तेज बहादुर यादव
याचिका में तेज बहादुर ने बताया है कि जनवरी 1996 में वह बीएसएफ में कॉन्स्टेबल के पद पर नियुक्त हुआ था। उसे सेवा काल में कई इनाम भी दिए गए जिसमे एक गोल्ड मेडल भी शामिल था। याची ने अक्तूबर 2015 में घटिया खाना दिए जाने की सैनिक सम्मलेन (दरबार) में शिकायत की थी। अक्तूबर 2016 में याची ने वीआरएस दिए जाने की अर्जी अथॉरिटी को भेज दी। दिसंबर 2016 में उसका एफडीएल एडम बेस खेत में तबादला कर दिया गया था।
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तेजबहादुर
तेज बहादुर ने याचिका में बताया कि यहां जवानों को बेहद ही घटिया और अपर्याप्त खाना मिलता था। इस बारे में सैनिक सम्मेलन में शिकायत करने के लिए उसने एक वीडियो बनाया था, जिसे उसके साथियों ने उसके फेसबुक पर डाल दिया। यह वीडियो वायरल हो गया और मामले को लेकर जांच शुरू की गई। बीएसएफ ने इस वीडियो को फोर्स की छवि खराब करने की कोशिश बताते हुए तेज बहादुर को बर्खास्त कर दिया था।
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तेजबहादुर
विडियो वायरल होने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस घटना का ब्योरा मांगा था। तेज बहादुर ने अपने उच्च अधिकारियों पर आरोप लगाए थे कि सरकार की तरफ से भेजी गई सामग्री वरिष्ठ अधिकारी बाजारों में बेच देते हैं और जवानों को पूरा खाना भी नहीं मिलता। मामले मे गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बीएसएफ से रिपोर्ट मांगी थी। बीएसएफ ने उसका खराब रिकार्ड दिया कि ज्यादातर समय तेज बहादुर को हेडक्वॉर्टर में वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में रखा गया था।
बता दें कि तेज बहादुर यादव इन दिनों 'फौजी एकता न्याय कल्याण मंच' नाम से एक एनजीओ चला रहे हैं। यह संस्था वैसे सैनिकों की कानूनी मदद करेगी, जिन पर बिना किसी ठोस वजह के कार्रवाई की जाती है। किसी सैनिक के शोषण और प्रताड़ना की स्थिति में भी यह एनजीओ उसकी मदद करेगी। इसके लिए 'फौजी एकता न्याय कल्याण मंच' नाम से एक वेबसाइट भी बनाई गई है, जिस पर विजिट कर पूरी जानकारी ली जा सकती है।