हरियाणा के एक होनहार धावक धर्मबीर सिंह ने हाल ही में हुई एशियन एथलेटिक चैम्पियनशिप में मिल्खा सिंह का रिकॉर्ड तोड़ा। लेकिन मिल्खा इस बार से बेहद हैरान हुए कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं।
इसके बाद मिल्खा सिंह को पता चला कि धर्मबीर सिंह के पास इतने पैसे नहीं कि वह रियो ओलंपिक में क्वालीफाई करने के लिए विदेश जा सके। यह जानकार वे भावुक हो गए और उनका दर्द जुबां पर आ गया।
मिल्खा ने कहा, सवा सौ करोड़ की आबाद में आखिर कोई दूसरा मिल्खा क्यों नहीं बन पा रहा है। फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह का ये दर्द जब सामने आया तो वह कुछ पल के लिए खामोश हो गए।
चीन में हुए एशियन एथलेटिक्स में रोहतक के अजायब गांव निवासी धर्मबीर द्वारा मिल्खा सिंह के खुद के रिकॉर्ड तोडने को लेकर आश्चर्य जताया। मिल्खा सिंह ने कहा कि उन्हें नहीं मालूम कि उनके द्वारा 200 मीटर की रेस 20. 8 की बजाय 20.6 सेकेंड में तोड़ दिया। यदि उनके रिकॉर्ड को किसी धावक ने तोड़ा है तो यह बहुत अच्छी बात है।
मिल्खा सिंह हरियाणा में सोनीपत के एकेडमिक हाइट पब्लिक स्कूल में इंटर मेगा कंपीटिशन में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे। यहां पत्रकार वार्ता में सवाल पूछे जाने के बाद मिल्खा को धर्मबीर के बारे में पता चला।
मिल्खा ने कहा कि देश की आबादी 1.25 सौ करोड़ की आबादी के बाद भी देश में दूसरा मिल्खा सिंह पैदा नहीं हुआ। ऐसा नहीं है कि हमारे देश में टैलेंट नहीं है। टैलेंट के बदौलत ही पीटी ऊषा और अंजू जॉर्ज जैसे धावक पैदा हुए। बस अब लोगों में कड़ी मेहनत और लगन की कमी नजर आ रही है।
मिल्खा सिंह ने बच्चों को शेर सुनाते हुए कहा कि हाथ की लकीरों से जिंदगी नहीं बनती, अजम हमारा भी कुछ हिस्सा है जिंदगी बनाने में। उन्होंने कहा, कड़ी मेहनत से ही बेहतर परिणाम हासिल होता है, लेकिन दुख होता है कि मेडल जीतने की होड़ में खिलाड़ी और कोच देश के लिए खेलना भूल गए हैं।
भारत आगमन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा मिल्खा सिंह का नाम लिए जाने से वह प्रफुल्लित नजर आए। उन्होंने कहा कि भारत दौरे के दौरान ओबामा ने उनके नाम का भी जिक्र किया था।
मिल्खा सिंह ने कहा कि पुराने दिनों की यादें आज भी उनके दिल में तरोताजा है। वह किस तरह दिल्ली की सड़कों पर आधी रात को दौड़ लगाकर पसीना बहाया करते थे। विश्व कीर्तिमान तोडने का सपना उनके जेहन में हमेशा ही दौड़ता रहता था। उन्होंने ठान लिया था कि जब तक विश्व रिकॉर्ड को नहीं तोड़ेंगे तब तक शांत से नहीं बैठेंगे।
मिल्खा सिंह ने कहा कि वह अपने बेटे को कभी भी स्पोर्ट्स पर्सन नहीं बनाना चाहते थे। वह चाहते थे उनका बेटा भी डॉक्टर या फिर इंजीनियर बने, लेकिन आज उन्हें खुशी है कि उनका बेटा भी देश-दुनिया में अपने खेलों के जरिए नाम कमा रहा है।