देश में पहली बार अनोखी पहल, अब लोग बाढ़ के पानी का भी प्रयोग कर सकेंगे। इसके लिए योजना तैयार हो गई है, तो जानिए कैसे और किस काम के लिए यह किया जाएगा।
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irrigation pattern
- फोटो : irrigation pattern
दरअसल, हरियाणा में बाढ़ के पानी का सदुपयोग करने और इससे भूजल का स्तर बढ़ाने के लिए हरियाणा सिंचाई विभाग ने खास योजना तैयार की है। इसके अंतर्गत प्रदेशभर में इंजेक्शन कुएं तैयार किए जाएंगे ताकि बाढ़ के पानी को सुनियोजित तरीके से एकत्रित किया जाए। इसका इस्तेमाल सिंचाई कार्य के लिए भी होगा और भूजल स्तर बढ़ाने के लिए भी। दरअसल, हरियाणा में हर मानसून के दौरान अमूमन अत्यधिक बारिश की वजह से कई जिलों में जलभराव की स्थिति बन जाती है।
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बाढ़
- फोटो : amar ujala
बारिश झमाझम हो जाए तो कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति भी बन जाती है। इस दौरान स्थानीय इलाकों के प्रशासन के समक्ष यही चुनौती रहती है कि अत्यधिक बारिश केइस पानी को मैनेज कैसे किया जाए? अमूमन यह पानी खेतों व ड्रेनों से होता हुआ बरसाती नदियों में पहुंच जाता है। मगर देखा जाए तो झमाझम बारिश के पानी से विभिन्न सूरतों में नुकसान तो होता है, लेकिन फायदा कुछ नहीं होता। इसी के मद्देनजर हरियाणा सिंचाई विभाग ने अब फ्लड वॉटर मैनेजमेंट की योजना बनाई है।
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बाढ़
- फोटो : amar ujala
खुदवाएं जाएंगे 390 इंजेक्शन कुएं
इस योजना के तहत प्रदेशभर में 390 इंजेक्शन कुएं बनाए जाएंगे। इन कुओं को कहां-कहां बनाना है, उसके लिए सर्वे करवाने के भी निर्देश दे दिए गए हैं। ये कुएं कई सैकड़ों फिट गहरे बनाए जाएंगे। इस योजना पर फिलहाल 6.41 करोड़ के बजट का प्रावधान रखा गया है। इन कुओं के जरिए बाढ़ के पानी का रुख इन इंजेक्शन कुओं तक किया जाएगा। उसके बाद इन कुओं का पानी फिर मोटरों के जरिए खेतों तक पहुंचाया जाएगा, जिसका इस्तेमाल फसलों के सिंचाई के लिए इस्तेमाल होगा।
दूसरा इन्हीं कुओं के जरिए स्टोर किया पानी भी रिसकर जमीन नीचे तक जाएगा, जिससे संबंधित इलाकों का भूजल का स्तर भी बढ़ेगा। सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर बीरेंद्र सिंह के अनुसार इस योजना को मंजूरी मिल गई है। उधर, हरियाणा में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत सूक्ष्म सिंचाई योजना के पायलट प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट पर 24 करोड़ 65 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे।