चंडीगढ़ वासियों पर एक और बोझ पड़ गया है। इसके लिए शहरवासियों को मोटी रकम का भुगतान करना पड़ेगा। आइए आगे की स्लाइड में जानें कब और कितना करना पड़ेगा भुगतान...
विज्ञापन
2 of 5
सांकेतिक तस्वीर
शहर के हर रिहायशी घर को हर तीन साल बाद फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र लेना होगा। इसके लिए नगर निगम ने हर घर से 2500 या 5 रुपये प्रति स्क्वेयर मीटर के हिसाब से फीस चार्ज करने का प्रस्ताव तैयार किया है। बता दें कि अब तक रिहायशी क्षेत्र में इस तरह का प्रमाणपत्र लेने का कोई प्रावधान लागू नहीं था। नगर निगम ने फायर विभाग से ली जाने वाली एनओसी का नाम भी बदल दिया है अब इस एनओसी को फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र का नाम दिया गया है।
विज्ञापन
3 of 5
demo pic
14 सितंबर को होने वाली सदन की बैठक में नगर निगम की ओर से कामर्शियल इमारत को हर तीन साल बाद प्रमाणपत्र लेने के लिए 5 हजार या 10 रुपये प्रति स्क्वेयर मीटर के हिसाब से शुल्क अदा करना होगा। जबकि इंडस्ट्री से 5 हजार या 7.50 रुपये प्रति स्क्वेयर मीटर के हिसाब से शुल्क लेने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। अभी तक नगर निगम के फायर विभाग की ओर से इन इमारतों को निशुल्क एनओसी जारी की जाती है। खास बात यह है कि हर तीन साल बाद एनओसी लेने का कोई सिस्टम लागू नहीं था लेकिन अब इसे लागू कर दिया गया है।
4 of 5
हर तीन साल में अब हर निवासी को अपनी दुकान और मकान के लिए सेफ्टी प्रमाणपत्र लेना जरूरी होगा। इसके लिए आवेदन करने के बाद फायर विभाग की ओर से निरीक्षण भी किया जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार यह शुल्क रिफंडेबल नहीं होगा। जून माह में नगर निगम ने रिहायशी मकानों इको भी एनओसी लेने का प्रस्ताव पास किया था। यह प्रस्ताव मंजूरी के लिए प्रशासन के स्थानीय निकाय सचिव से नहीं आया है।
मंजूरी मिलने के बाद पास होने वाले नए रेट्स से प्रमाणपत्र लेने का फैसला लागू कर दिया जाएगा इसलिए नगर निगम यह नए चार्ज होने वाले रेट्स तय करवा रहा है। नगर निगम के अनुसार समय समय पर यह रेट्स रिवाइज भी होंगे। यह फैसला शहर की सभी पुरानी और नई इमारतों पर लागू होगा। शहर में इस समय ढाई लाख घर हैं। ऐसे में इससे नगर निगम की कमाई भी बढ़ जाएगी।