सर्दी के मौसम में अगर दो चीजें मिल जाएं तो वे शरीर के 'रामबाण' साबित होंगी। ठंड से बचाव होगा और बीमारियां भी दूर रहेंगी, ज्यादा जानकारी के लिए खबर पढ़ें।
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इन दिनों हाड़ कंपाने वाली सर्दी पड़ रही है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग किस प्रकार की जीवन शैली अपनाएं, जिससे वे बीमार न हों, इसके लिए अमर उजाला ने गांधी स्मारक भवन सेक्टर 16 के प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र के डॉ. एमपी डोगरा, डॉ. पूजा और डॉ. देवराज त्यागी ने बात की। तीनों ने बेहद जरूरी और बड़े काम के नुस्खे बताए, जिन्हें अपना लिया तो ठंड में बीमार नहीं पड़ेंगे, जानिए क्या बताया...
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नहाने के बाद तेल का प्रयोग करें
सर्दी के मौसम में सूरज की रोशनी हमारे लिए वरदान है। इस मौसम में त्वचा शुष्क होती है, इसलिए नहाने के बाद तेल का प्रयोग करना चाहिए। गर्म कपड़े पहनना लाभदायक है। भोजन में पोषक तत्वों का होना जरूरी है। अस्थमा के मरीज सर्दी में बढ़ने लगते हैं। ऐसे में उनको हल्का व सुपाच्य भोजन लेना चाहिए। भाप, हल्दी का सेवन, सूखे मेवों को भिगोकर, तिल के लड्डू खाना आदि अच्छे विकल्प हैं। अस्थमा के रोगियों को सिर पर टोपी, पैरों में मोजे पहनकर रखने चाहिए। थोड़ा सूर्य निकलने पर ही सैर करनी चाहिए। बुजुर्ग महिलाएं व नवजात शिशुओं को सर्दी में बचाव की बहुत जरूरत होती है, क्योंकि इनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है। ऐसे में निमोनिया, डायरिया एवं खांसी, जुकाम की समस्या बढ़ जाती है।
- डॉ. पूजा, महिला चिकित्सक, प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, गांधी स्मारक भवन
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सर्दियों से बचाता है सूर्यभेदी प्राणायाम
सर्दी के मौसम में प्राणायाम से काफी लाभ होता है। सूर्यभेदी प्राणायाम सर्दी को दूर भगाता है। इस प्राणायाम को करने से शरीर में गर्मी तथा पाचन शक्ति बढ़ती है। जुकाम, खांसी, दमा, कफ बात रोग, सिरदर्द आदि रोग दूर हो जाते हैं। सूर्यभेदी प्राणायाम का अभ्यास सर्दियों में ही करना चाहिए।
इसे इस प्रकार करें- सुखासन में बैठकर दायीं नासिका से सांस को अंदर लेते हैं और कुछ देर रोक कर बायीं नासिका से सांस को बाहर निकाल देते हैं। ऐसा करने से सूर्य नाड़ी जाग्रत हो जाती है। इस प्राणायाम को बच्चे, महिलाएं और हर उम्र के व्यक्ति कर सकते हैं।
- डॉ. देवराज त्यागी, सचिव, प्राकृतिक चिकित्सा समिति।
मोटा अनाज अधिक सेहतमंद रखने में सहायक
हमारा मुख्य भोजन गेहूं की रोटी, चावल, दालें और सब्जियां हैं। ज्यादा जोर गेहूं और चावल पर ही है। बाकी के जो अनाज हैं, उनकी जानकारी या तो है ही नहीं या बहुत कम है। आज से लगभग 50 साल पहले मोटे अनाज की खेती होती थी। मोटे अनाज यानी मक्की, बाजरा, गेहूं आदि हमें अधिक सेहतमंद रखते थे।
- डॉ. एमपी डोगरा, मुख्य चिकित्सक, प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र गांधी स्मारक भवन