पंजाब के कपूरथला के हरिके पत्तन में काली बेईं और ब्यास दरिया का संगम होता है। इनसे घिरे एक गांव फतेहवाल आजादी के बाद पहली बार जगमगाया है। दरअसल यह गांव आजादी के 68 साल बाद रोशनी'देखी है। पावरकॉम ने 4.83 लाख की लागत से 50 खंभे लगाकर सिंगल फेस में बिजली की यह सुविधा दी है। संत बलबीर सिंह सीचेवाल के प्रयास से गांव में स्थापित निर्मल कुटिया के साथ-साथ जमीनों की सिंचाई के लिए यह सुविधा नसीब हो पाई है।
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एक गांव ऐसा, जो आजादी के बाद पहली बार हुआ 'रोशन'
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पावरकॉम की ओर से दी गई इस सुविधा का उद्घाटन संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने संगत के सहयोग से किया। संत सीचेवाल ने बताया कि पहली बार मंड इलाके में 24 घंटे बिजली सप्लाई मिली है। इससे इलाके की 25-30 हजार एकड़ खेतीहर जमीन के किसानों को बड़ी राहत मिली है।
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इससे पहले वह अपने निजी खर्च पर जनरेटर से फसलों को सींचते आ रहे थे। वहीं निर्मल कुटिया भी सोलर एनर्जी से जगमगा रही थी। पहले गांव आहलीखुर्द तक ही सिंगल फेस बिजली सप्लाई थी। इससे आगे मंड एरिया शुरू हो जाता है।
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पंजाब सरकार की ग्रांट से आहलीखुर्द से दो किलोमीटर आगे तार बिछाकर पावरकॉम ने 24 घंटे बिजली सप्लाई मुहैया करवाई है। संत सीचेवाल ने बताया कि पावरकॉम के जेई मनजीत सिंह, लाइनमैन जसवंत नड्ढा व केहर सिंह ने तीन दिन में निर्मल कुटिया फतेहवाल की संगत के सहयोग से तार बिछाकर दशकों से अंधेरे में गुम गांव में रोशनी दिखाई है।
उन्होंने पावरकॉम कर्मियों को सममानित भी किया। पावरकॉम के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर अमृतपाल सिंह ने बताया कि पंजाब सरकार से मिली ग्रांट से यह सुविधा मुहैया करवाई गई है।