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यहां मुर्दा पति हो चुके जिंदा: 30 से अधिक विधवा CM आवास पहुंचीं, कहा- हमें पति चाहिए, पेंशन नहीं

Fri, 16 Sep 2022 08:49 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रदर्शन करने पहुंचीं बुजुर्ग महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला ( फोटो- अजय वर्मा)
हरियाणा में बुढ़ापा सम्मान पेंशन काटने का विवाद शांत नहीं हुआ है। अब महिलाओं के मुर्दा पतियों को जिंदा बताकर उनकी विधवा पेंशन काटने का मामला सामने आ गया है। 30 से अधिक विधवा महिलाओं और खुद को जिंदा साबित करने पहुंचे बुजुर्गों ने चंडीगढ़ में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के आवास के बाहर जमकर हंगामा किया। विधवा महिलाओं ने एक सुर में कहा कि उन्हें विधवा पेंशन नहीं बल्कि पति चाहिए। करीब एक घंटे तक चले घटनाक्रम के दौरान पुलिस ने बुजुर्गों को हिरासत में लिया और बाद में छोड़ दिया। मुख्यमंत्री आवास पर पहुंची रोहतक निवासी 67 साल मूर्ति देवी ने कहा कि उनके पति का 22 साल पहले निधन हो चुका है। दिसंबर से विभाग ने यह कहकर पेंशन बंद कर दी गई कि उनके पति तो जिंदा हैं।
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थाने में मौजूद महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
राजरानी ने कहा कि 2007 में उनके पति की मौत हो चुकी है। छह माह से पति जिंदा बताया दिया है और नाम तक बदल कर पेंशन रोक दी। इसी प्रकार, रोहतक के गढ़ी मोहल्ला निवासी गुड्डी की दास्तां है। गुड्डी ने कहा कि पति की मौत के बाद अब विभाग ने यह भी कहा है कि उसने किसी और से शादी कर ली है। वह दफ्तरों के चक्कर काटकर थक चुकी है लेकिन विभाग मानने को तैयार नहीं है। रानी के पति की 2005 में मौत हुई लेकिन विभाग इसे जिंदा मान रहा है।
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सीएम आवास पर विरोध करने पहुंचे बुजुर्ग। - फोटो : अमर उजाला
डोभ गांव की रहने वाली कैलाशो देवी को 10 माह से पेंशन नहीं मिल रही, उसके पति का नाम ही गलत कर दिया है। 35 साल की विधायक पूनम सुनारिया ने कहा कि पीपीपी में अपने पति का मृत्यु प्रमाण पत्र भी लगाया है फिर भी विभाग पति को मृत नहीं जिंदा मान रहा है। गीता देवी का कहना है कि विभाग कह रहा है कि वह पति की रिटायरमेंट की पेंशन ले रही है, जबकि उसे कोई भी पेंशन नहीं मिल रही है। बुजुर्गों ने कहा कि जब से परिवार पहचान पत्र बने हैं, इसके बाद से पेंशन काटी जा रही है, इसकी जांच होनी चाहिए। बता दें कि छह माह पहले सरकार ने सर्वे के आधार पर करीब 15 हजार विधवा महिलाओं की पेंशन रोक दी थी। सरकार का दावा था कि इन विधवा महिलाओं ने दोबारा से शादी कर ली है।  

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विरोध जताने पहुंचीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
पांच साल से नहीं बनी दिव्यांग पेंशन
शकिला दिव्यांग है और उसके पिता की मौत हो चुकी है, भाई अलग रहते हैं और माता बुजुर्ग है। पांच साल तक वह समाज कल्याण विभाग के चक्कर लगाकर अब थक चुकी हैं। कोई सुनने को तैयार नहीं है। इसी प्रकार, दिव्यांग सूरजभान की कहानी है। 60 साल से ऊपर के हो चुके कैथल के राजेंद्र, धर्मबीर, राजबीर और रामेदेही की आज तक बुढ़ापा पेंशन नहीं मिली है। इसके अलावा, काफी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिनकी सालाना आय न के बराबर है लेकिन आय पांच लाख से अधिक दिखाकर पेंशन काट दी गई। 
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पेंशन काटने पर विरोध करते बुजुर्ग। - फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने सीएम आवास पर जाने से रोका
सामाजिक कार्यकर्ता नवीन जयहिंद के साथ दोपहर दो बजे चंडीगढ़ स्थित प्रेस क्लब पहुंचे। यहां से 3.30 बजे सभी विधवा महिलाएं, बुजुर्ग और दिव्यांग मुख्यमंत्री आवास के बाहर पहुंचे। यहां पर पुलिस ने बेरिकेडस लगाकर उनको रोक लिया। करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बीच बुजुर्गों को सेक्टर 3 पुलिस थाने ले जाया गया। इस दौरान बुजुर्गों और पुलिस में तीखी नोंक झोंक भी हुई। बाद में मुख्यमंत्री कार्यालय में दो बुजुर्गों को बुलाया गया। इस दौरान सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों ने उनसे बैठक कर दस्तावेज लिए और आश्वासन दिया कि जल्द ही इन मामलों का समाधान किया जाएगा। 5:30 बजे बुजुर्गों को छोड़ दिया गया।  
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सीएम आवास जाते बुजुर्ग। - फोटो : अमर उजाला
घर बैठे पेंशन नहीं, टेंशन मिल रही: जयहिंद
नवीन जयहिंद ने कहा कि सरकार दावा करती है कि बुढ़ापा पेंशन घर बैठे मिलेगी लेकिन हालात ये हैं कि बुजुर्गों को पेंशन के बजाय टेंशन मिल रही है। सरकार के लिए इससे बड़ी शर्म की बात क्या होगी कि जो जिंदा हैं, उनको मृत दिखाया जा रहा है, जो 20 साल पहले मर चुके हैं, उनको जिंदा बताकर विधवा महिलाओं की पेंशन काटी जा रही है। ऐसे पांच हजार से अधिक मामले हैं, इन पर गंभीरता दिखाई जानी चाहिए। 
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पेंशन काटने का विरोध करते बुजुर्ग। - फोटो : अमर उजाला
विभाग में अफरातफरी, थाने में पहुंचे लिए बुजुर्गों के दस्तावेज
बुजुर्गों के सीएम आवास पर विरोध जताने की सूचना के बाद सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता विभाग में अफरातफरी का माहौल रहा। पहले जो अधिकारी बुजुर्गों को जिंदा मानने को तैयार नहीं थे, वही आनन फानन सेक्टर 3 पुलिस थाने पहुंचे। यहां पर विभाग ने बुजुर्गों के लिए दरबार लगाया और एक-एक बुजुर्ग से उसके दस्तावेज लिए। विभाग के अधिकारियों ने दावा किया कि उनकी पेंशन बहाली की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जल्द ही डाटा का मिलान करने के बाद पेंशन फिर से शुरू हो जाएगी। 

हमारे पास रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया से मृत लोगों का डाटा आता है। अगर किसी का डाटा गलत आया है तो उसे ठीक किया जा रहा है। ऐसे तमाम मामलों को दोबारा से चेक किया जा रहा है। - राजीव रंजन, आयुक्त, सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता विभाग।
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