सुखना लेक में बतखें मरने लगी हैं। तीन दिन में 12 बतखों की मौत हो गई है, लेकिन सवाल ये है कि इन्हें मरने से रोकेगा कौन?
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तस्वीरें: सुखना में मरने लगीं बतखें, रोकेगा कौन?
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मौत की शुरुआती जांच में मौत की वजह ठंड बताई जा रही है। चंडीगढ़ प्रशासन बतखों के सैंपल जालंधर स्थित रीजनल डिजीज डाइग्नोस्टिक लैबोरेटरी में भेज रहा है। इससे इंफ्लुएंजा जैसी बीमारी का पता चलने पर तुरंत एक्शन लिया जा सकेगा।
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बतखों की अचानक मौत से वाइल्ड लाइफ विभाग में हड़कंप मच गया है। विभाग के कर्मचारी बीमार बतखों को लेक से निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर ले गए।
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वाइल्ड लाइफ की शुरुआती जांच में पता चला है कि पानी में तैरते वक्त बतख की गर्दन अचानक नीचे झुक जाती है। उसके कुछ देर में वह अपने शरीर पर कंट्रोल खो देती है और उसकी मौत हो जाती है।
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सुखना लेक पर बतखों को पर्यटक खाना खिलाते हैं। उन्हें ऐसा करने से रोकने के लिए वाइल्ड लाइफ ने कड़े इंतजाम कर दिए हैं। लेक पर दो गार्ड की ड्यूटी लगा दी गई है। दोनों गार्ड देर रात तक वहीं रुकेंगे।
इसके अलावा पुलिस से भी मदद मांगी गई है। उनसे कहा गया है कि वे भी लोगों को बतखों के पास जाने से रोकें। वीरवार को पुलिस के सिपाही लोगों को रोकने के लिए मुस्तैद दिखाई दिए।