आज की हाईटेक दुनिया में भी अंधविश्वास कायम है। इसकी
ताजा प्रमाण देखने को मिला, जब एक मुर्दे को जिंदा करने के लिए मृत शरीर
को तांत्रिक को सौंप दिया गया। फिर क्या हुआ, जानिए?
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चुटकियां बजाता रह गया तांत्रिक, पर खड़ा न हुआ मुर्दा
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विज्ञान के इस युग में भी अंधविश्वास की जड़ें इतनी गहरी हो गई हैं कि लोग एक मृत शरीर में भी जान डालने के की कोशिश करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। एक तांत्रिक के बहकावे में आकर 13 घंटे तक एक मृत शरीर में आत्मा को फिर से प्रवेश कराने का खेल चलता रहा वो भी बीड़ी के धुएं के छल्ले और चुटकियों के सहारे। इतना ही नहीं उस तथाकथित तांत्रिक ने शव को तभी ले जाने दिया जब तक वह काला नहीं पड़ने लगा।
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आखिरकार पीड़ित परिवार की आंखों पर चढ़ी अंधविश्वास की पट्टी हटी और परिवार शव उठाकर भाग खड़ा हुआ। हरियाणा के डबवाली(सिरसा) क्षेत्र की 27 वर्षीय महिला को बुखार के चलते शुक्रवार रात को सिविल अस्पताल में लाया गया था। हालत गंभीर देखते हुए चिकित्सकों ने उसे सिरसा रेफर कर दिया। बाद में परिजन उसे एक निजी चिकित्सक के पास लेकर पहुंचे, जिसने महिला को मृत करार दे दिया। सुबह करीब आठ बजे परिजन शव को लेकर घर पहुंचे।
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दाह संस्कार की तैयारी थी। इसी दौरान नब्ज चलने की बात कहकर परिजनों ने दाह संस्कार से इनकार कर दिया। अंधविश्वासी परिवार शव को लेकर डिंपल बाबा के पास जा पहुंचा। बाबा ने दरबार में बीड़ी फूंकते हुए चुटकियां बजानी शुरू कर दी और मृत महिला को जिंदा करने का दावा करते हुए उसके शव को रख लिया। वैद्य के वेश में पहुंचे तथाकथित व्यक्ति ने बाबा से नब्ज चलने का दावा किया। बाबा ने तंत्र विद्या से प्राण लौटाने का विश्वास परिजनों को दिया।
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सुबह से शाम हो गई। न तो महिला जीवित हुई और न ही परिवार दरबार से बाहर आ सका। कुछ लोगों ने शव उठाने का प्रयास किया। पर बाबा ने उन्हें रोक दिया, बोले ट्राई मारने में क्या जाता है। और बीड़ी के धुएं के छल्लों में बाबा ने खूब चुटकियां बजाईं, मगर महिला जीवित नहीं हुई। शरीर पूरी तरह से काला पड़ने लगा पर बाबा ने अपना गरुर नहीं तोड़ा। रात करीब नौ बजे करीबी रिश्तेदारों ने एक आरएमपी को मौके पर बुलाया। उसने भी महिला को मृत करार दिया।
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बाबा और अंधविश्वासी परिवार को बात हजम नहीं हुई। परिवार बाबा बचा लो और बाबा मुर्दे खड़ा हो जा दोनों यही कहते रहे। बाबा का कहना था कि औरत मरी नहीं है, इसे किसी ने पकड़ रखा है। यह आधी रात को जरूर बोलेगी। मौके पर पहुंची पत्रकारों की टीम देखकर बाबा ने अपने तेवर बदल दिए। करीब 13 घंटों तक महिला को जीवित करने का दावा करने वाला शव उठा ले जाने की बात करने लगा। मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई।
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लोगों ने पुलिस कार्रवाई होने का भय दिखाया, जिस पर परिवार ने झट से शव को उठा लिया और अपने गांव की ओर चल दिए। करीब 24 घंटे बाद रविवार सुबह करीब आठ बजे महिला का अंतिम संस्कार किया गया। पीके अग्रवाल, हृदय रोग विशेषज्ञ डबवाली ने बताया कि शनिवार सुबह कुछ लोग महिला को लेकर आए थे। अस्पताल के बाहर ही मैंने महिला का चेकअप किया। वह मृत थी। हरबंस सिंह, सरपंच गांव जोगेवाला ने बताया कि वैद्य ने गरीब परिवार को उलझा दिया और वे बाबा के चक्कर में फंस गए।