ऐसे भी लुट जाती हैं खुशियां...शादी से ठीक पहले लड़की पर ऐसा कहर टूट पड़ा कि उसके सारे सपने टूट कर कांच की तरह बिखर गए, दर्दनाक तस्वीरें।
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पंचकूला घर में फटा सिलेंडर
घटना हरियाणा के पंचकूला की है। एक घर में सिलेंडर ब्लास्ट हो गया और आग लग गई। आग की लपटों ने साथ वाले घर को भी अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी भयानक थी कि दोनों घर जलकर खाक हो गए और इसमें दफन हो गए लक्ष्मी के सपने, दुल्हन बनने के। अगले महीने ही उसकी शादी थी, तैयारियां चल रही थी। शॉपिंग की गई थी, लेकिन सब कुछ जल गया। एक-एक चीज जलकर राख हो गई। अब बारात में आए लोगों की खातिरदारी कैसे करेंगे?
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पंचकूला घर में फटा सिलेंडर
परिवार के लोग इसी बात से परेशान है यही सोचकर परिवार के लोगों की आंखों से निकले आंसू भी नहीं थम रहे हैं। क्योंकि लंबे समय से की गई शादी की तैयारी राख के ढेर में बदल गई। एक लाख रुपये कैश, ज्वैलरी व शादी के लिए खरीदे गए कपड़े जलकर राख हो गए। लक्ष्मी के पिता शंकर महतो ने बताया कि जब आग लगी तो घर पर कोई मौजूद नहीं था। बच्चे बाहर खेलने और वह और उसकी पत्नी काम पर गए थे। आग और जलते सामान को बुझाने का मौका तक नहीं मिला।
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पंचकूला घर में फटा सिलेंडर
बेटी को घर से विदा करने के लिए एक जोड़ी कपड़े तक नहीं बचे
लक्ष्मी की मां की आंखों से निकलते आंसू और उसकी खामोशी इस बात की गवाही दे रहे थे, कि उसकी बेटी की शादी के बाद घर से विदा करने के लिए एक जोड़ी कपड़े तक उसके पास नहीं बचे हैं। वहीं, बेटी के फेरों के लिए लक्ष्मी की मां ने जो चुंदरी और साड़ी खरीदे थे, वह राख के ढेर में अधजले चमक रहे थे। लक्ष्मी की छोटी बहन सुनिता उसे बटोरने में जुटी थी। इस उम्मीद में कि शायद उसकी बहन की शादी में मदद के लिए कोई आगे आए।
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पंचकूला घर में फटा सिलेंडर
वर पक्ष वालों के हाथ-पैर जोड़ शादी टालने में जुटा परिवार
लक्ष्मी के पिता शंकर महतो ने बताया कि उसकी बेटी की शादी अगले महीने है। बेटी की शादी के लिए जो पैसे, ज्वैलरी व कपड़े खरीदे थे, वह आग की भेंट चढ़ गए। समझ नहीं आ रहा कि बेटी की शादी के लिए कहां से पैसे लाएं। शंकर का कहना है कि वर पक्ष वालों के हाथ-पैर जोड़कर किसी तरह शादी टालने की कोशिश में जुटे हैं, क्योंकि पैसों के अभाव में परिवार पालना उनके लिए मुश्किल हो रहा है, वह बेटी की शादी कैसे करेंगे।
किताबें जलीं, स्कूल कैसे जाएं
लक्ष्मी का छोटा भाई राजा की किताबें और स्कूल ड्रेस भी जलकर राख बन गईं हैं। राजा पंचकूला के सेक्टर-21 गवर्नमेंट स्कूल में छठीं क्लास का स्टूडेंट है। वह किताबें और वर्दी जलने के बाद स्कूल भी नहीं जा पा रहा है। बार-बार उसकी बड़ी बहन लक्ष्मी उन जली किताबों को देखती है, कि काश सब कुछ पहले जैसा हो जाता। वह घर से खुशी-खुशी शादी के बाद विदा हो पाती, उसका भाई स्कूल जा पाता। उसके घर का उजड़ा आशियाना फिर से बस पाता।