SDO बनने की खुशी में परिवार भगवान के दर्शन को गया था लेकिन रास्ते में एक भयानक हादसा हो गया। एक झटके में पूरी फैमिली खत्म हो गई, न बीवी रही न बेटा और न भाई-भाभी, देखिए तस्वीरें।
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सालासर से लौट रहे SDO और परिवार संग हादसा
सालासर बालाजी के दर्शन कर लौट रहा परिवार दो गाड़ियों मे भरकर गया था। बीएंडआर में एसडीओ पद पर प्रमोशन होने की खुशी में परिवार के लोग हनुमानजी के मंदिर में सवामणी लगाकर वापस लौट रहा था।
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सालासर से लौट रहे SDO और परिवार संग हादसा
आते वक्त चुरू के नजदीक गांव रामसरा के पास, जो स्विफ्ट गाड़ी एसडीओ वीरेंद्र सिंह चला रहे थे, वह तेल के टैंकर के साथ टकरा गई। हादसे में उनकी पत्नी, बेटा, छोटा भाई, भाई की पत्नी की मौत हो गई।
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सालासर से लौट रहे SDO और परिवार संग हादसा
इस घटना का पता चलते ही गांव ढाणा खुर्द में मातम पसर गया। परिजनों का कहना है कि विरेंद्र के एसडीओ के पद पर प्रमोट होने के खुशी में पूरा परिवार एकत्रित होकर दो गाड़ियों में सालासर धाम के दर्शन करने गया था। एक स्विफ्ट गाड़ी थी, दूसरी क्रूजर में परिवार के अन्य लोग सवार थे।
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सालासर से लौट रहे SDO और परिवार संग हादसा
हादसे में मरने वाले को क्या पता था कि उन्हें अपना घर भी नसीब नहीं होगा और यह उनके सालासर धाम के आखिरी दर्शन होंगे। मृतकों का दाह संस्कार शाम को गांव के श्मशान घाट में किया गया। परिवार के पांच लोगों की चिताएं एक साथ जलीं।
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सालासर से लौट रहे SDO और परिवार संग हादसा
परिजनों ने बताया है कि सौरभ ने बीटेक की हुई थी, वह चंडीगढ़ में एमटेक की कोचिंग ले रहा था। वह पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ सालासर में बालाजी के दर्शन कर वापस लौट रहा था। उनकी गाड़ी रामसरा गांव के पास तेल के टैंकर से भिड़ गई।
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सालासर से लौट रहे SDO और परिवार संग हादसा
हादसे में एसडीओ वीरेंद्र सिंह यादव (50), पत्नी रेखा (48), भाई रामअवतार (40), बेटा सौरभ (25), भाभी शकुंतला (60) की मौत हो गई, जबकि छह वर्षीय भतीजा गौरव गंभीर रूप से घायल है।
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Hisar Accident
एसडीओ वीरेंद्र मूल रूप से ढाणा खुर्द के निवासी थे। वे फिलहाल पंचकूला तैनात थे। इससे पहले वे हिसार बीएंडआर कार्यालय में ड्राफ्ट्समैन के पद पर भी रहे थे। वे ड्राइंग एसोसिएशन के स्टेट के प्रधान भी रह चुके हैं।
एसडीओ, पत्नी और उनके बेटे की मौत के बाद उनके परिवार में इकलौती बेटी गीतांजलि बची है। वह चंडीगढ़ में फैशन डिजाइनिंग का कोर्स कर रही है। पिता के साथ पूरा परिवार पंचकूला में रह रहा था। तीन दिन की सरकारी छुट्टी के चलते वे अपने पैतृक गांव ढाणा खुर्द में आए हुए थे। परिवार के लोगों ने सालासर जाने का कार्यक्रम बनाया। गीतांजलि भी जाना चाहती थी, लेकिन वह अपने ननिहाल दिल्ली के लिए निकल गई।