अपने ही भाई के मर्डर केस का इकलौता गवाह था युवक, जिसे सरेआम बीच सड़क गोलियों से छलनी कर दिया गया। देखिए वारदात के बाद की तस्वीरें।
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Sarpanch shot dead in Chandigarh
- फोटो : अमर उजाला
पंजाब के होशियारपुर के गांव खुर्दा का सरपंच सतनाम सिंह बिट्टू गवाही न दे सके, इसलिए रविवार सुबह चंडीगढ़ के सेक्टर-38 वेस्ट के गुरुद्वारे के बाहर दो युवकों ने उसे गोलियों से भून दिया। दोनों ने सरपंच पर सात राउंड फायर किए। वारदात से गुरुद्वारे में आयोजित समागम में आए लोगों में हड़कंप मच गया। वहीं दोनों युवक दो साथियों की मदद से लुधियाना नंबर की आई-20 कार से फरार हो गए।
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पुलिस ने आरोपी गांव खुर्दा के चारों युवकों के खिलाफ केस दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है। सतनाम सिंह की 30 अप्रैल को जिला अदालत में हत्या के मामले में गवाही होनी थी। इसमें हमलावर पक्ष के लोग आरोपी थे। होशियारपुर के गांव खुर्दा के सरपंच सतनाम सिंह बिट्टू दो दिन से सेक्टर-38 वेस्ट स्थित गुरुद्वारे में संगत लेकर आ रहे थे। रविवार को भी गुरुद्वारे में समागम चल रहा था।
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सतनाम सिंह गांव से ट्रक में संगत लेकर आए थे। करीब साढ़े 11 बजे वह गुरुद्वारे से बाहर ट्रक की ओर आए। इसी दौरान यहां पहले से घात लगाए बैठे दो युवक ट्रक के पास खड़ी आई-20 कार से बाहर निकले और सतनाम सिंह पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। एक ने .12 बोर और दूसरे ने पिस्टल से फायर किए। गोली लगने के बावजूद सतनाम सिंह लहूलुहान हालत में वहां से भागे और ट्रक के नीचे टायर के पीछे छिप गए।
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सरपंच को अधिकांश गोलियां शरीर के निचले हिस्से में लगी थीं। सरपंच के साथ समागम में आए परिजन और गांव के लोग पीजीआई पहुंच गए। दोपहर बाद अधिक खून बहने के कारण सतनाम सिंह ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इसके बाद मलोया थाना पुलिस ने खुर्दा गांव निवासी तीरथ, बॉबी, अर्शदीप सिंह और एक अज्ञात (कार चालक) के खिलाफ हत्या की धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।
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ये है मर्डर केसः सरपंच सतनाम सिंह बिट्टू की हत्या का संबंध करीब चार साल पहले उसके भाई शाना की हत्या से है। इस मामले में बिट्टू इकलौता ही गवाह बचा था। बिट्टू के पिता की भी 1990 में आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। 2013 में 11 जुलाई को गांव खुर्दा निवासी निशान सिंह उर्फ शाना को गढ़दीवाला में गोली मार दी गई थी।
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खुर्दा निवासी संपूर्ण सिंह का पुत्र निशान सिंह शाना अपनी गाड़ी में अपनी पत्नी और बेटी के साथ गढ़दीवाला में एक रिश्तेदार के घर में पार्टी में हिस्सा लेने के लिए गया था। वह देर रात घर लौट रहा था। इस दौरान कुछ लोगों ने उसे कार रोकने के लिए इशारा किया। जैसे ही उसने कार रोकी, वे उसके पास आए और एक ने उस पर एक रिवाल्वर तान दी। इसके बाद उन्होंने निशान सिंह शाना की छाती पर गोलियां दाग दीं और भाग गए।
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शाना को सिविल अस्पताल होशियारपुर ले जाया गया, लेकिन उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। इस मामले में पुलिस ने राजविंदर सिंह राजा, प्रदीप सिंह, कुलदीप सिंह, उसकी पत्नी और चन्नप्रीत सिंह चन्ना के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। इस मामले में शाना का भाई सरपंच जौबन सिंह बिट्टू और शाना की पत्नी ही गवाह थे। बताया जाता है कि शाना की पत्नी तो दूसरी शादी कर विदेश में जा बसी थी।
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अब सिर्फ बिट्टू ही इकलौता गवाह बचा था। इस महीने के अंत में जिला अदालत में उसे गवाही देनी थी। बताया जाता है कि शाना हत्याकांड में आरोपी चन्ना विक्की गौंडर का करीबी माना जाता है और उसके साथ जेल में भी रहा है। बाद में उसे जमानत मिल गई थी, लेकिन वह बेल जंप कर गया था जिसके बाद उसे अदालत ने भगोड़ा करार दिया था। नाभा जेल ब्रेक कांड के बाद पुलिस उसकी तलाश में गढ़दीवाला की खाक भी छानती रही है।
घटना के प्रत्यक्षदर्शी और गांव से संगत को ट्रक में लेकर आए निर्मल सिंह ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि हमलावर उनके ही गांव के हैं। दोनों पक्षों में रंजिश रही है। इससे पहले भी आरोपी उन पर जानलेवा हमले कर चुके हैं। निर्मल के अनुसार दरअसल सतनाम सिंह की इस 30 अप्रैल को जिला अदालत में हत्या के मामले में गवाही होनी थी। इसमें हमलावर पक्ष के लोग आरोपी हैं।