एक पूर्व मंत्री और उसके परिवार का दिलदहला देने वाला हत्याकांड एक बार फिर चर्चाओं में है। क्योंकि पूर्व मंत्री के छोटे भाई की भी मौत हो गई है। देखिए क्या है अपनो के कत्ल का ये सच
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murder mystry
हरियाणा के बहुचर्चित पूर्व मंत्री रेलू राम पूनिया के बड़े भाई राम सिंह की मंगलवार को हिसार-टोहाना रोड पर कोठी से ठीक 100 मीटर की दूर लितानी मोड़ पर सड़क हादसे में पूर्व मंत्री रेलू राम पूनिया के बड़े भाई रामसिंह की मौत हो गई।
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आज हम आपको रिश्तों के कत्ल की वही खौफनाक कहानी याद करवा रहे है, जिसमें रेलू राम की अपने ही बेटी ने मां-बाप, भाई और बच्चों समेत 8 लोगों की हत्या कर पूरी फैमिली को खत्म कर दिया था। बाद में भाई की फैमिली को इंसाफ दिलाने के लिए राम सिंह ने लंबी लड़ाई लड़ी।
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घटना 23 अगस्त 2001 की है, जिसके बारे में लाई डिटेक्टर पर 8 हत्याओं के मास्टरमाइंड एवं मृतक पूर्व मंत्री रेलूराम के दामाद संजीव ने बताया था कि उसने अपनी पत्नी सोनिया (रेलू राम की बेटी) ने रात 11 बजे से सुबह 4 बजे के बीच पूरे हत्याकांड को अंजाम दिया था।
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सबसे पहले उन्होंने सोनिया के जन्मदिन की पार्टी के बहाने पटाखे के शोर में पिस्तौल से सबकी हत्या करने की योजना बनाई। पार्टी के बाद जब पटाखे चलाए गए तो कृष्णा ने रेलूराम की नींद में खलल पड़ने की बात कहकर पटाखे चलाने से मना कर दिया।
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तब संजीव और सोनिया ने लोहे की रॉड से हत्या करने की योजना बनाई और दोनों ने सबसे पहले मकान की दूसरी मंजिल पर सो रहे रेलूराम की रॉड से हत्या कर दी।
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फिर दोनों मकान की आखिरी मंजिल पर पहुंचे, जहां उन्होंने रेलूराम की पत्नी कृष्णा और तीन माह की पोती प्रीति की सोते हुए में हत्या कर दी। तीन हत्याएं कर सोनिया और संजीव नीचे आए तो वहां सोनिया का भाई सुनील, भाभी शकुंतला, बहन पम्मा एक कमरे में बच्चे लोकेश व शिवानी के साथ बैठे बातें कर रहे थे।
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दोनों पम्मा का ताइक्वांडो चैंपियनशिप में चयन करवाने का बहाना बनाकर दूसरे कमरे में ले गए और वहां उसकी हत्या कर दी। हत्या के समय कुछ शोर हुआ तो उन्होंने अटैची गिरने की बात कहकर मामले को दबा दिया।
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बाद में दोनों सुनील को प्राॅपर्टी का फैसला करने के लिए मां कृष्णा देवी (जिसकी पहले ही हत्या कर दी थी) के पास ले जाने लगे। शकुंतला ने भी साथ चलने के लिए कहा, लेकिन उसे झगड़े की जड़ बताते हुए उन्होंने उसे साथ ले जाने से मना कर दिया। इसी दौरान सुनील ने संजीव के कपड़ों पर खून के निशान देख लिए तो उन्होंने कृष्णा की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली।
इसके बाद सोनिया और संजीव प्राॅपर्टी का फैसला करने की बात कहकर सुनील को दूसरे कमरे में ले गए। शकुंतला वहां न पहुंचे, इसके लिए दोनों ने सुनील की मदद से ही उसे चारपाई से बांध दिया। फिर दोनों ने सुनील को दूसरे कमरे में ले जाकर उसकी हत्या कर दी। उसके बाद उन्होंने शकुंतला, उसके पुत्र लोकेश व पुत्री शिवानी की भी हत्या कर दी।