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छेड़छाड़ केस में पहली बार बोले बराला, 'वर्णिका मेरी बेटी, बेटे पर कानून मुताबिक कार्रवाई हो'

Wed, 09 Aug 2017 10:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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barala
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आईएएस की बेटी से छेड़छाड़ केस में बेटे पर आरोप लगने के बाद हरियाणा बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला पहली बार मीडिया के सामने आए और उन्होंने बड़ा बयान दिया। सुभाष बराला ने कहा कि वर्निका मेरी बेटी की तरह है। उसे न्याय जरूर मिलेगा। विकास के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। मेरा और बीजेपी का इस मामले से कोई लेना देना नहीं। 
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बता दें कि हरियाणा बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला के बेटे विकास बराला पर वर्णिका कुंडू से छेड़छाड़ के आरोप लगे हैं। मामले ने अब राजनीतिक रूप ले लिया और यह दिन प्रतिदिन गरमाता जा रहा है। वहीं मामले में पीड़िता वर्णिका कुंडू और उसके पिता खुलकर सामने आ गए हैं। वर्णिका का कहना है कि वह पीछे नहीं हटेगी और आरोपियों को सजा दिलवा कर रहेगी, चाहे कोई भी जो मर्जी कर ले।

दूसरी ओर, मामले में चंडीगढ़ पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। पहले सीसीटीवी फुटेज गायब हो गए, अब पुलिस 5 सीसीटीवी फुटेज मिलने का दावा कर रही है। 
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बराला विरोधी लॉबी सक्रिय हुई, नए चेहरे की तलाश शुरू

प्रदेशाध्यक्ष के बेटे की करतूत से भाजपा असहज
मामले का साइड इफेक्ट ये कि सुभाष बराला के बेटे के एक करनामे ने हरियाणा में पार्टी की अंदरुनी राजनीति के समीकरण बिल्कुल बदलकर रख दिए हैं। किसी भी समय कुछ भी बदलाव हो सकता है। बराला विरोधी लॉबी इस मुद्दे पर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला को घेर सकती है। बराला को सीएम का करीबी भी माना जाता है।

ऐसे में असंतुष्ट खेमा भी इस मौके का फायदा उठाने की कोशिश में लग सकता है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के रोहतक प्रवास में मजबूत बनकर उभरे बराला के लिए आने वाले दिन और कठिन हो सकते हैं। हालांकि अभी तक भाजपा के आला नेता बराला के साथ दिखाई दे रहे हैं।

नए चेहरे को लेकर भी होने लगीं चर्चाएं
 बेटे के फंसने के बाद से ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला के भविष्य को लेकर चर्चाएं जारी हैं। बराला के हटने की दशा में भाजपा के अंदर ही नए चेहरे पर कयास लगाए जाने लगे हैं। पिछले दिनों भाजपा ओबीसी के मुद्दे को ज्यादा उठाती रही है। अमित शाह ने अपने रोहतक प्रवास के दौरान कांग्रेस पर ओबीसी विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए थे।

ऐसे में माना जा रहा है कि बदले जाने की स्थिति में नया अध्यक्ष ओबीसी वर्ग का ही हो सकता है। राजकुमार सैनी के मोर्चे से निपटने के लिए किसी सैनी को अध्यक्ष बनाने की वकालत पहले ही हो चुकी है। अहीरवाल में पकड़ और मजबूत बनाने के लिए किसी यादव चेहरे को भी सामने लाया जा सकता है।

 
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