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एक थे पियरे जेनरे : इस स्विस वास्तुकार को चंडीगढ़ से थी बेपनाह मोहब्बत, ये थी आखिरी ख्वाहिश

Mon, 22 Mar 2021 10:23 AM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
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स्विस वास्तुकार पियरे जेनरे की 125वीं जयंती पर विशेष - फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ को एक अलग रूप देने वाले स्विस आर्किटेक्ट पियरे जेनरे की 22 मार्च को 125वीं जयंती है। देश के सबसे खूबसूरत शहरों में शुमार चंडीगढ़ को व्यवस्थित और खूबसूरत बनाने में ली कार्बूजिए के साथ पियरे जेनरे का अहम रोल रहा है।कई जानकारों का कहना है कि पियरे जेनरे ने चंडीगढ़ के लिए ली कार्बूजिए से भी ज्यादा काम किया है लेकिन वह अपने काम के बारे में ज्यादा बताते नहीं थे। 15 साल चंडीगढ़ में रहकर उन्होंने स्कूल, घर, कॉलेज, अस्पताल, फर्नीचर, होटल आदि को डिजाइन किया। शहर में आर्किटेक्ट्स की पहली पीढ़ी को प्रशिक्षित करने का श्रेय भी पियरे जेनरे को ही जाता है। चंडीगढ़ से उन्हें इस कदर प्यार था कि उन्होंने कहा- वह आखिरी सांस चाहे कहीं भी लें, उनकी अस्थियों को चंडीगढ़ में ही प्रवाहित किया जाए। स्विट्जरलैंड के जिनेवा में 1967 में उनकी मृत्यु हुई थी। साल 1970 में उनकी भतीजी पियरे जेनरे की अस्थियां लेकर चंडीगढ़ पहुंची और उन्हें सुखना लेक में प्रवाहित किया गया।
 
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पियरे जेनरे - फोटो : फाइल फोटो
पियरे जेनरे 1950 से लेकर 1965 तक चंडीगढ़ में रहे। उन्होंने शहर के कई सरकारी स्कूल, घर, ली-कार्बुजिए सेंटर, पीयू स्थित गांधी भवन को डिजाइन किया। इसके अलावा फर्नीचर व मेनहोल कवर भी उन्होंने ही डिजाइन किए। जानकार बताते हैं कि पियरे ने तीन तरह के मेनहोल कवर डिजाइन किए थे। ये तीनों भले ही देखने में एक से लगते हों, लेकिन गौर से देखने पर डिजाइन अलग-अलग नजर आते हैं। कवर का एक डिजाइन ऐसा है, जिसमें सेक्टर-17 और कैपिटल कांप्लेक्स दिखाया गया है। दूसरे कवर में सेक्टर बाहर की तरफ और सड़क अंदर की तरफ दिखाई गई है। तीसरे में लिखा है कि मेनहोल कवर पियरे जेनरे ने डिजाइन किया है। 
 
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पियरे जनरे द्वारा डिजाइन किया गया फर्नीचर। - फोटो : अमर उजाला
सेक्टर-5 में 11 साल रहे जेनरे, खुद से डिजाइन किया था घर
पियरे जेनरे ने चंडीगढ़ निर्माण के दौरान अपने जीवन के 11 साल सेक्टर-5 के मकान नंबर-57 में गुजारे थे। इसे अब जेनरे म्यूजियम का रूप दिया जा चुका है। यह घर भी उन्होंने खुद ही डिजाइन किया था। वर्ष 2017 में इसे ठीक कराने के बाद प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने उद्घाटन किया था। यह घर सुखना लेक के ठीक सामने पार्किंग की पिछली साइड में कुछ मीटर की दूरी पर है। यहां सिर्फ जेनरे से जुड़ी चीजें ही रखी गई हैं। उनकी डिजाइन की गई इमारतों के चित्र, दुर्लभ ड्राइंग-मैप भी यहां देखे जा सकते हैं। शहर के सभी मुख्य भवनों के लिए फर्नीचर जेनरे ने ही डिजाइन किए थे, जो अब हेरिटेज बन चुके हैं। इस फर्नीचरों के बेहतरीन नमूने म्यूजियम मौजूद हैं। जानकार कहते हैं कि जेनरे के डिजाइन ली कार्बूजिए से काफी अलग होते थे। वे इमारतों में बड़े पत्थरों की दीवारें बनाते थे। 
 

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पीयू का गांधी भवन। - फोटो : फाइल फोटो
ये हैं पियरे जेनरे की निशानियां...
  • ली कार्बूजिए सेंटर
  • एमएलए हॉस्टल, सेक्टर-3 और 4
  • टाउन हॉल बिल्डिंग, सेक्टर-17
  • पीयू का गांधी भवन
  • सेंट्रल लाइब्रेरी (पीयू)
  • पीयू का एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिस
  • एसी जोशी लाइब्रेरी (पीयू)
  • फाइन आर्ट्स बिल्डिंग और म्यूजियम (पीयू)
  • पीयू के कई हॉस्टल
  • सेक्टर-2, 3, 7, 11, 15, 20, 22, 24, 27, 28 में सरकारी घर
  • सीसीईटी-26
  • सेक्टर-7, 16, 22 और 23 में नर्सरी स्कूल
  • सेक्टर-22 का सेकेंडरी स्कूल
  • जीएमएसएसएस-10
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सेक्टर पांच स्थित पियरे जेनरे का घर। - फोटो : फाइल फोटो
कई लोग होते हैं, जो अपने काम के बारे में लोगों को ज्यादा बताते नहीं हैं, पियरे जेनरे उनमें से ही थे। उन्होंने शहर को 15 साल दिए और सबसे ज्यादा काम किया, लेकिन लोगों ने उनके काम को सराहा नहीं। जेनरे ने शहर को स्कूल, घर, कॉलेज, अस्पताल, फर्नीचर, होटल आदि तो दिए ही, चंडीगढ़ में आर्किटेक्ट्स की पहली पीढ़ी को प्रशिक्षित भी किया और रास्ता दिखाया। - दीपिका गांधी, निदेशक, ली कार्बूजिए सेंटर
 
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