प्रॉपर्टी को आधार कार्ड से लिंक कराने की जो खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, उसका असली सच तो कुछ और ही निकला है। आप खुद देख लीजिए।
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प्रॉपर्टी
सोशल मीडिया पर चल रही खबर के मुताबिक, केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ प्रशासन को 14 अगस्त से पहले सभी प्रॉपर्टी को आधार से लिंक करने के आदेश दिए हैं ताकि बेनामी प्रापर्टी की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाई जा सके। जारी आदेश के मुताबिक वर्ष 1950 के बाद की सभी जमीनों व प्रॉपटी रिकार्ड का डिजिटलाइजेशन और आधार से लिंक करने को कहा गया है।
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वहीं, जब सरकार को इसका पता चला तो ऐसे किसी निर्देश को जारी करने से इंकार कर दिया गया। सरकार ने ऐसे निर्देश से जुड़ा लेटर जारी करने की बात का खंडन किया। वहीं इस बात की जांच करने को भी कहा कि ये लेटर कहां से आया? साथ ही सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चिट्ठी जारी करके इसकी सूचना भी दे दी है।
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दरअसल, कुछ दिन पहले राष्ट्रपति भवन के नाम से एक लेटर सामने आया, जिसमें सभी राज्यों को 14 अगस्त तक प्रॉपर्टी को आधार कार्ड से लिंक कराने के निर्देश जारी किए गए थे। इसके बाद प्रशासन अधिकारियों ने इस पर काम भी शुरू कर दिया था। बेनामी प्रॉपर्टी को रिकार्ड जुटाया जाने लगा। एस्टेट आफिस ने शहर के साथ लगते गांवों के किसानों की जमीन भी आधार से लिंक करनी शुरू कर दी।
चंडीगढ़ प्रापर्टी कंसल्टेंट फर्म के मालिक रमन यादव ने कहा कि शहर में इस समय हजारों प्रापर्टी लीज पर है। ऐसे में जो जमीनें लीज पर है, उन्हें आधार से लिंक करना मुश्किल होगा। प्रशासन ने अब तक लोगों को इन प्रॉपर्टी का मालिकाना हक भी नहीं दिया है। लीज होल्ड प्रॉपर्टी को फ्री होल्ड करने के लिए प्रशासन को कई बार गुजारिश की जा चुकी है। इसके बावजूद लीज होल्ड टू फ्री होल्ड प्रापर्टी का मुद्दा एमएचए में विचारधीन है।