बीएसएफ जवान तेजबादुर के बाद अब उनकी मां ने भी मोर्चा खोल दिया है।
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तेजबहादुर के बाद मां ने भी खोला मोर्चा
तेज बहादुर जब भी घर आता था, कहता था ‘मां खाना ऐसा बनता है कि अक्सर भूखा रहता हूं।’ ऐसी नौकरी का क्या मतलब, जिसमें भर पेट ढंग का खाना भी नसीब न हो।
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तेजबहादुर के बाद मां ने भी खोला मोर्चा
बीएसएफ में खाने की घटिया क्वालिटी को लेकर वीडियो पर अपना दर्द बयां करने वाले महेंद्रगढ़ के राताकलां गांव निवासी तेजबहादुर यादव की मां निहालकौर यह कहते हुए निराश दिखी कि उसके बेटे ने सच बयां किया है, न जाने अब उसके साथ अब क्या होगा। उसकी जान को भी खतरा हो सकता है।
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तेजबहादुर के बाद मां ने भी खोला मोर्चा
तेजबहादुर के पिता शेरसिंह का कहना था कि बेटा कहता था पशुओं जैसा खाना मिलता है। जब भी छुट्टी पर आता है तो हरदम खाने की शिकायत करता था।
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खाना सही नहीं मिलने के कारण वह अक्सर भूखा रहता था। ऐसे में वह नौकरी छोड़ने का मन बना चुका था। वो कहता था कि विरोध करता हूं तो अधिकारी कई तरह के आरोप लगाकर फंसा देते हैं।
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- फोटो : SELF
वो इससे दुखी था कि कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही। तेजबहादुर के भाई किशन और हनुमान सिंह ने बताया कि वह 20 दिन पहले ही छुट्टी काट कर लौटा था।
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तेजबहादुर के बाद मां ने भी खोला मोर्चा
जब भी गांव आता था कहता था कि फौज में खाना अच्छा नहीं मिलता। नौकरी छोड़ूंगा। वो कहता था कि जान जोखिम में डालकर दुगर्म जगहों पर ड्यूटी करते हैं, परंतु खाना भी सही नहीं मिले तो फिर ऐसी नौकरी का क्या मतलब। ऐसे में उसका कहना था कि वीआरएस लेकर घर आऊंगा।
शेरसिंह ने तेजबहादुर पर बीएसएफ के अधिकारियों की ओर से लगाए आरोपों पर कहा कि इसके बारे में उन्हें कुछ पता नहीं है। हां केस चल रहे हैं इसके बारे में अक्सर कहता था, लेकिन क्या मामला था, इसका पता नहीं है।