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लोग ताने मारते थे...पर बेटी ने छोटी उम्र में लेफ्टिनेंट बनकर दिया करारा जवाब, पढ़ें कहानी

Wed, 14 Mar 2018 10:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत(हरियाणा)
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लेफ्टिनेंट प्रीति चौधरी
लड़की होने के कारण इस बेटी ने लोगों के ताने सुनते-सुनते कुछ कर दिखाने की ठानी और छोटी उम्र में लेफ्टिनेंट बनकर विरोधियों को करारा जवाब दिया।
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लेफ्टिनेंट प्रीति चौधरी
वाकई इस बेटी का जज्बा हैरान करने वाला है। लोग ताने मारते थे, कहते थे छोरियां घर की चार दिवारी में अच्छी लगती हैं। लेकिन मैं भी हार मानने वाली नहीं थी, मां-बाप ने आगे बढ़ने का हौंसला दिया और मैंने लेफ्टिनेंट बनकर जवाब दिया। कड़े संघर्ष की ये कहानी है, सॉर्ड ऑफ ऑनर जीतने वाली देश की तीसरी महिला लेफ्टिनेंट प्रीति चौधरी की, जिन्होंने छोटी उम्र में ही लेफ्टिनेंट बनकर मां-बाप, प्रदेश और देश का नाम रोशन कर दिया।

 
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लेफ्टिनेंट प्रीति चौधरी
इस सफलता के बाद प्रीति ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा कि यह अचीवमेंट उनके लिए एक सपने जैसा है, जिसे वह शब्दों से बयां नहीं कर सकती हैं। बचपन से ही लेफ्टिनेंट बनने का सपना देख रही थीं, जो आज पूरा हुआ है। उन्होंने कहा कि वे उनके पिता भी आर्मी ऑफिसर हैं, उनकी यूनिफार्म को देखकर वह भी उनकी तरह आर्मी को ज्वाइन करनी चाहती थीं। पापा की वर्दी पहनकर कहती थी मैं भी फौजी बनूंगी और बन गई।

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लेफ्टिनेंट प्रीति चौधरी
हरियाणा में पानीपत जिले के गांव बिंझौल गांव की रहने वाली 20 वर्षीय प्रीति चौधरी कहती हैं कि पिता से प्रेरणा लेकर ही मैंने पढ़ाई के साथ-साथ एनसीसी में समय दिया और इस मेहनत का फल तब मिला, जब ऑल इंडिया एनसीसी स्पेशल एंट्रेंस के तहत मेरा चयन हुआ। 2016 दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह में हरियाणा की टुकड़ी में भी मैं शामिल हुईं और मुझे देश की बेस्ट 144 लड़कियों में मुझे ऑल इंडिया बेस्ट कैडेट चुना गया और प्रधानमंत्री से सम्मान मिला था।
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लेफ्टिनेंट प्रीति चौधरी
प्रीति चौधरी बताती हैं कि जब मैं छोटी थी और बाहर जाती थी तो गांव में लोग ताने मारते थे। सुनने को मिलता था कि बेटियां तो घर में काम करने के लिए होती हैं। माता-पिता को भी लोग समझा कर जाते थे कि लड़की को ज्यादा बाहर मत भेजो। पारिवारिक स्थिति भी ज्यादा अच्छी नहीं थी। पिता आर्मी से बहुत कम छुट्टी ले पाते थे। ऐसे में मां ने हर कदम पर साथ दिया। सारे खर्च उठाए और बाहर भी भेजा।
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लेफ्टिनेंट प्रीति चौधरी
प्रीति की मां सुनीता देवी कहती हैं कि प्रीति के पिता इंद्र सिंह आर्मी से 4 वर्ष पहले रिटायर हुए हैं। जहां से उन्होंने छोड़ा था, प्रीति वहीं से शुरूआत कर रही है। वे लेफ्टिनेंट की पोस्ट से रिटायर हुए और प्रीति का इसी पद पर सिलेक्शन हुआ है। प्रीति ने आर्मी में भर्ती होने के लिए जीसीसी सेक्टर-11 चंडीगढ़ में एडमिशन ली, ताकि वह यहां एनसीसी ज्वाइन कर सकें। 2016 में उसने 26 जनवरी को राजपथ पर पैरेड की और बेस्ट एनसीसी कैडेट अवार्ड जीता।
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लेफ्टिनेंट प्रीति चौधरी
सुनीता देवी कहती हैं कि इस जीत के बाद उसे आर्मी हेडक्वार्टर से सेना में शामिल होने के लिए बुलावा आया तो वह इंटरव्यू देने गई। फिर चेन्नई स्थित सेना की एकडेमी में 209 पुरुष व 40 महिला कैडेटों में प्रथम स्थान हासिल किया। उनकी इंटेलीजेंसी व अनुशासन को देखते हुए लेफ्टिनेंट जनरल ने उन्हें गार्ड ऑफ स्वॉर्ड से सम्मानित किया है। उन से पहले ये सम्मान भारत की दो और महिला लेफ्टिनेंट जीत 2010 में दिव्या और 2015 में एम. अंजना चुकी हैं और अब मेरी बेटी ने यह खिताब जीता है।

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बता दें कि प्रीति का का परिवार अब जीरकपुर में रहता है। उनके पिता इंदर सिंह ऑनरेरी कैप्टन (रिटायर्ड) हैं। मां सुमता देवी टीचर हैं, जबकि व्रीति के पिता बैंकिंग प्रोफेशनल और मां लेक्चरर हैं। प्रीति के पिता की पोस्टिंग कई जगह होने के कारण उसे 12वीं तक 8 स्कूल बदलने पड़े। प्रीति चौधरी ‘सॉर्ड ऑफ ऑनर’ पाने वाली ओटीए की तीसरी महिला कैडेट हैं। ओटीए में पहली बार ऐसा हुआ है, जब सॉर्ड ऑफ ऑनर और सिल्वर मेडल अवॉर्ड महिला कैडेट को मिले हैं।
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गौरतलब है कि चेन्नई में शनिवार को ऑफिसर ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) में पासिंग आउट परेड हुई। इस बार 255 कैडेट अफसर बने हैं। इनमें 37 महिलाएं हैं। कैडेट प्रीति चौधरी को ‘सॉर्ड ऑफ ऑनर’ और व्रीति को सिल्वर मेडल अवॉर्ड से नवाजा गया। ये दोनों महिला ऑफिसर हरियाणा की रहने वाली हैं। इन्होंने 250 से ज्यादा कैडेट को पछाड़ कर एकेडमी का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान हासिल किया। गोल्ड मेडल कैडेट विवेक सूरज को मिला। 22 विदेशी कैडेट भी पास आउट हुए।
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