जिंदादिली सीखनी है तो इस बच्ची से सीखिए। जन्म से दोनों हाथ नहीं और एक पैर काम नहीं करता, पर हिम्मत नहीं छोड़ी और आज मिसाल बनकर दुनिया के सामने खड़ी है।
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बहादुर बेटी रहनुमा
कहते हैं तालीम नहीं दी जाती परिंदों को उड़ानों की...वो तो खुद ही समझ जाते हैं, ऊंचाई आसमां की। ऐसा ही जज्बा देखने को मिला चंडीगढ़ की रहनुमा में। रहनुमा के दोनों हाथ काम नहीं करते, पर उससे ज्यादा काम करते हैं उसके पैर। जिनसे रहनुमा ने वो कर दिखाया कि देखने वाले दांतों तले अंगुली दबा लेते हैं।
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बहादुर बेटी रहनुमा
रहनुमा के लिए सोमवार का दिन बेहद खास था। मौका था टीएफटी द्वारा आयोजित नेशनल विंटर थियेटर फेस्टिवल का और रहनुमा को मिल रहा था अवार्ड। सेक्टर-23 स्थित बाल भवन में हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने उनको सम्मानित किया। वहीं रहनुमा को अवार्ड लेता देख उनके माता पिता की आंखों में आंसू आ गए। आएं भी क्यों न, रहनुमा ने छोटी सी उम्र में अपने हौंसले की उड़ान से सभी का दिल जो जीत लिया था।
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बहादुर बेटी रहनुमा
रहनुमा बड़ी होकर कलेक्टर बनना चाहती है
दसवीं की छात्रा रहनुमा ने कभी खुद को लाचार महसूस नहीं किया। हाथ नहीं, पर कभी हिम्मत नहीं हारी और पढ़ने के साथ लिखना पांव से लिखना सीखा। महज तीन साल की उम्र में उन्होंने कोयले की सहायता से लिखने की शुरुआत की। इसके बाद चॉक से लिखना शुरू किया। धीरे-धीरे वह पेन से भी लिखने लगीं। अब वह गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल मौली जागरां कालोनी में दसवीं कक्षा में की छात्रा हैं। वह पढ़ाई के साथ ड्राइंग भी करती हैं।
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बहादुर बेटी रहनुमा
ड्राइंग से जीती है जीवन के हर पल को
रहनुमा अपने पैर से बेहद खूबसूरत ड्राइंग बनाती हैं। उन्हें ड्राइंग करना इतना पसंद है कि उनके पैशन को देखते हुए उनकी ड्राइंग टीचर पूनम राणा उनकी खासी मदद करती हैं। पूनम रहनुमा को अपनी स्कूटर से हर कंपीटीशन में लेकर जाती भी हैं। रहनुमा ने बताया कि उन्हें ड्राइंग के जरिए कुदरत की खूबसूरती को बयां करना बेहद पसंद है। वह ड्राइंग में ही आगे भविष्य बनाना चाहती हैं। रहनुमा ने बताया कि उनकी टीचर पूनम उन्हें बहुत गाइड करती हैं।
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बहादुर बेटी रहनुमा
जुड़वां बहनों में से एक ठीक हो गई
छात्रा रहनुमा की मां गुलनाज बानो ने बताया कि जुड़वां बहनों में से रहनुमा की बहन तो ठीक हो गई, मगर इसका इलाज पीजीआई में भी संभव नहीं है। पिता शफीक अहमद ने बताया कि रहनुमा की मां ने उसे तीन साल की उम्र से ही पढ़ाना-लिखाना शुरू कर दिया था। बेटी की पढ़ाई को लेकर उनकी मां अभी तक गंभीर हैं और रोजाना उनकी पढ़ाई पर ध्यान देती हैं। रहनुमा के पिता मजदूरी करते हैं।
ड्राइंग से देती है पानी बचाओ, सेव गर्ल चाइल्ड का संदेश
रहनुमा ने बताया कि वह ड्राइंग के जरिए समाज को पानी बचाने, सेव गर्ल चाइल्ड आदि का संदेश देती हैं। पिछले साल चिल्ड्रेन ट्रैफिक पार्क में स्कूली स्तर पर आयोजित ड्राइंग कंपीटीशन में रहनुमा को तीसरा स्थान मिला था। इसके अलावा वे स्कूल के हर कंपीटीशन में हिस्सा भी लेती हैं।