वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की वजह से सालाना एक करोड़ का कारोबार करने वाली रोहतक की इंडस्ट्री के नट-बोल्ट ढीले हो गए हैं।
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gst
नट-बोल्ट बनाने वाली यहां छोटी-बड़ी करीब एक जार से ज्यादा इकाइयां हैं। जीएसटी की वजह से इन पर कर का बोझ सीधे दस फीसदी बढ़ा है और मांग में तीस फीसदी की गिरावट है। रोहतक के नट-बोल्ट अमेरिका, जर्मनी, इस्राइल और फ्रांस तक सप्लाई होते हैं।
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जीएसटी बिल
देश में भी दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, जमशेदपुर और सूरत जैसे शहरों में माल जाता है। उद्यमियों का कहना है कि जीएसटी लागू होने से पहले इसे लेकर असमंजस था और इसके लागू होने के बाद यह इतना पेचीदा है कि सीधा कारोबार पर असर पड़ा है। दो माह से इंडस्ट्री में डिमांड कम हो रही है। जीएसटी लागू होने के बाद ऑर्डर 30 फीसदी घट गए हैं।
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जीएसटी
बिक्री पर दस फीसदी बोझ
पहले नट-बोल्ट इंडस्ट्री पर साढ़े 12 प्रतिशत टैक्स और 5.25 वेट लगाया जाता था। अब 18 प्रतिशत है। मगर बिक्री पर यह 18 से 28 प्रतिशत कर दिया है। इतना ही नहीं टैक्स की राशि अब दस दिन के अंदर सरकार के अकाउंट में जमा करानी होगी।
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GST BILL
खरीददार से यह राशि उन्हें 90 से 120 दिन में वापस मिलेगी। पहले टैक्स तिमाही में जमा होता था और इससे ज्यादा असर नहीं पड़ता था, तब तक खरीददार से टैक्स की राशि वापस आ जाती थी। अब उद्यमी को दो से तीन माह तक यह बोझ खुद उठाना होगा।
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अनिल मित्तल, संचालक अभि इंडस्ट्री।
नई व्यवस्था में हर 10वें दिन उद्योगपति को अपना रिटर्न जमा कराना होगा। पहले तीन माह में एक बार जमा होता है। इस कारण दो अकाउंटेंट अलग से रखने होंगे, जिनका मुख्य काम केवल रिटर्न जमा कराने का होगा। अगर सरकार प्रति माह रिटर्न जमा कराने का नियम बना दे तो उद्योगपतियों को भागदौड़ से राहत मिल जाएगी।
- अनिल मित्तल, संचालक अभि इंडस्ट्री।
हमारा माल विदेशों में भी जाता है। विदेश से पहले की तरह डिमांड बनी हुई है, लेकिन देश के अंदर 30 फीसदी घट गई है। जीएसटी लागू होने के एक माह तक असमंजस की स्थिति बनी रहने की संभावना है। हालांकि भविष्य के लिए जीएसटी फायदेमंद रहेगी।
- राजेश जैन, मालिक एलपीएस बोसार्ड।