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फूल टूटने पर कितना दर्द होता है, इनसे जानिए

Mon, 25 Aug 2014 05:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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फूलों के टूटने पर कितना दर्द होता है, जानिए इनसे। इन्होंने अपने बगीचे को बेहद प्यार से सजाया और संवारा है।
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फूल टूटने का दर्द हर किसी को नहीं होता। इसके विपरीत कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, फूल टूटने का दर्द इतना अधिक महसूस होता है कि वह उसे ताउम्र नही भुला पाते। ऐसा ही अहसास हुआ अमरजीत कौर को।
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अमरजीत कौर फूलों से इतना लगाव कि गुलदस्ते में टूटे हुए फूल देखते ही उनकी आंखों में दर्द भर आता है। कोई फूल तोड़ता है, तो उनके दिल में कांटे से चुभते हैं।

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फूलों से इसी लगाव ने अमरजीत कौर को गुलदस्ते से दूर कर दिया। आलम यह है कि वह किसी को तोहफे में गुलदस्ता देती ही नहीं हैं। कारण, एक गुलदस्ते को सजाने में कई फूलों को तोड़ना पड़ता है।
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सेक्टर-8 के मकान नंबर-1101 की रहने वाली अमरजीत कौर ने अपने सपनों के घर के बगीचे को बड़े दिल से तैयार किया है।
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इसमें महकने वाले फूल उनके बच्चों की तरह हैं, जिनकी देखभाल वह बड़ी ही आत्मीयता से करती हैं। बगीचे की पूरी लैंडस्केपिंग उन्होंने खुद की है।
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अमरजीत कौर रोज सुबह साढ़े पांच बजे उठती हैं और सैर से वापस आकर सीधे बगीचे में चली जाती हैं। वहां एक-एक पौधे की बड़े सलीके से देखभाल करती हैं।

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अमरजी कौर अपने मिलने वालों को भी यही सलाह देती हैं कि फूलों से हमेशा प्यार करें, उन्हें तोड़े नहीं। फूल जब खिलते हैं, तो देखने वाले का मन भी उसी तरह खिल उठता है।

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अमरजीत कौर ने बताया कि वे कहीं घूमने जाती हैं, तो वहां से पौधे जरूर लाती हैं। करीब पांच साल पहले वह जर्मनी गई थीं। वहां से भी कुछ पौधे लाई थीं।

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लेकिन पर्यावरण अलग होने के कारण वे पौधे यहां पनप नहीं सके। हाल ही में वह श्रीनगर से भी कॉरनेशन, मैरीगोल्ड, साल्विया, पटूनिया और डेहलिया आदि के पौधे लाई हैं, जिन्हें वह सर्दियों में लगाएंगी।

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देखभाल का ही नतीजा है कि वर्षों पुराने फर्न (एरिका पाम) अमरजीत कौर के बगीचे की शोभा बढ़ा रहे हैं। इनमें से कई फर्न तो उन्होंने 20 साल पहले लगाए थे।

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आज भी अमरजीत कौर के पौधों की खूबसूरती कायम है। पाम का एक पेड़ वह सेक्टर-8 के मार्केट में भी लगवा चुकी हैं।

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अमरजीत ने अपने बगीचे में फाइकस, हिबिस्कस, बोगनविला, मैरीगोल्ड, जेबरा, एल्जोरा, चांदनी, साइकोरिया, ब्लैडियम, मॉस्टेरा, पोटोलॉका आदि के पौधे लगाए हैं।

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बगीचे में अमरजीत कौर ने 200 से ज्यादा गुलदाउदी के पौधे लगाए हुए हैं। नवंबर तक इनमें फूल खिलने शुरू हो जाएंगे। अमरजीत कहती हैं कि उन्हें गुलदाउदी का फूल बेहद पसंद है।

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अमरजीत कौर ने बगीचे के साथ ही एक किचन गार्डन भी बनाया हुआ है। यहां उन्होंने भिंडी, करेला, बैंगन, पुदीना, मिर्च आदि सब्जियां उगाई हुई हैं। इसमें उन्होंने अंगूर की बेल भी लगा रखी है।
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अमरजीत कौर बताती हैं कि गुलदाउदी के पौधे को बहुत अधिक देखभाल की जरूरत पड़ती है। गुलदाउदी लगाने का सबसे सही समय मानसून होता है।
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