अगर आप ब्रांडेड मल्टीनेशनल कंपनी के रेंज पहनने के शौकीन हैं तो हो जाएं सावधान। खरीदारी करने से पहले शूज के बार कोड को जरूर देख लें और साइट पर जाकर चेक कर लें कि यह असली भी है या नहीं।
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मल्टीनेशनल कंपनी का ब्रांडेड शूज जो बाजार में पांच हजार का बिक रहा है, चाइना से आई उसकी कॉपी महज 500 रुपये से शुरू होकर एक हजार तक आसानी से मिल जाती है। कलाकारी इतनी कि कंपनी वाले भी धोखा खा जाते हैं कि शूज असली भी है या नहीं।
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दिल्ली और मुंबई के आयात व्यापारी जहां चीन के माल को मार्केट में खपा रहे हैं, वहीं करोड़ों रुपये की चांदी हर माह कूट रहे हैं। हालात यह है कि नाइकी, एडीडास या फिर रिब्बॉक कंपनी का जो नया शूज बाजार में उतरता है, उसके चंद दिन बाद ही उसकी कॉपी चाइना से तैयार होकर मार्केट में आ जाती है।
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कारोबारी यहां से ब्रांडेड शूज का जोड़ा चीन ले जाते हैं और उसके जैसे ही कंपनी के स्टीकर व फिनिशिंग करवाकर लाखों जोड़े भारत में आयात करवा लेते हैं। इसको बाजार में औने पौने दाम पर बेच दिया जाता है हालात यह है कि कई अच्छे शोरूम पर भी चीन के डुप्लीकेट कॉपी शूज को असली कहकर बाजार में बेचा जा रहा है।
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जालंधर में बुधवार को 400 जोड़े ब्रांडेड कंपनी के पकड़े गए, जो मल्टीनेशनल कंपनी के नाम से बिक रहे थे। हालात यह थे कि छापामारी के लिए कंपनी के जो अधिकारी आए थे, वे भी चकरा गए। बार कोड को चेक किया तो पता चला कि शूज नकली हैं और इनको चीन से मंगवाया गया है। दिल्ली, मुंबई से शुरू हुआ नेटवर्क इस कदर फैल चुका है कि इसको तोड़ पाना एजेंसियों के लिए आसान कार्य नहीं।
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कारोबार से जुड़े एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चीन निर्मित नकली शूज की सेल असली शूज के कई गुना अधिक है, कीमत कम होने से मिडल क्लास ग्राहक इन शूज को खरीदने में प्राथमिकता देता है। इसके लिए दिल्ली और मुंबई के व्यापारी ही माल डिलिवर करते हैं।
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खरीदारी करने से पहले रखें ध्यान
- ब्रांडेंड शूज खरीदना है तो कंपनी के शोरूम को ही प्राथमिकता दें।
- शूज खरीदने से पहले उस पर लगे स्टीकर को देखा जाए और उस पर लिखे बार कोड को इंटरनेट पर जाकर चेक किया जाए।
- डुप्लीकेट कापी शूज कुछ हार्ड होते हैं, जबकि असली शूज काफी सॉफ्ट होते हैं।
- शूज खरीदने के तत्काल बाद इसका बिल लिया जाए, जिस पर बार कोड अंकित हो।
‘हमारी सेल पर फर्क पड़ा है, बार कोड को जरूर चेक करें’
एडीडास कंपनी के प्रबंधक कुलविंदर सिंह का कहना है चीन निर्मित फर्सट कापी शूज और असली में फर्क खोजना काफी मुश्किल होता है। ग्राहकों के लिए तो नामुमकिन है। हमारी ब्रांडेड शोरूम की सेल पर काफी असर पड़ा है। नाइकी के संदीप का कहना है कि चीन निर्मित फर्सट कापी में कुछ हलका सा चेंज जरूर होता है, लेकिन ग्राहक के लिए उसे पहचान पाना मुश्किल है। इसलिए ग्राहक सस्ती देखकर फर्सट कापी को खरीद लेते हैं।