ओलंपियन खिलाड़ी को हराया था और अब इस बेटी ने वो इतिहास रच दिया कि मां के आंसू छलक आए। जानिए कौन हैं ये और इनके बारे में सब कुछ।
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अंजुम मौदगिल
हम बात कर रहे हैं चंडीगढ़ की रहने वाली शूटर अंजुम मौदगिल की। अंजुम ने इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फेडरेशन (आईएसएसएफ) विश्वकप में सटीक निशाना लगाते हुए सिल्वर मेडल झटक लिया। लगभग दस साल के अंतराल के बाद विश्वकप के जरिए चंडीगढ़ की शूटर की झोली में सिल्वर मेडल आया है। इससे पहले 2008 में अभिनव बिंद्रा ने पदक जीता था।
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अंजुम मौदगिल
आईएसएसएफ विश्व कप मैक्सिको में चल रहा है। इसमें देशभर से टॉप शूटर हिस्सा ले रहे हैं। अंजुम मौदगिल ने विश्वकप में अपना पहला मेडल 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन में 454.2 के स्कोर के साथ जीता। तेज हवाओं के बीच अंजुम ने चीन की टिंग सुन को 442.2 से पछाड़कर जीता। अंजुम ने यह पदक महिला दिवस यानि 8 मार्च को देर रात तक चले टूर्नामेंट में जीता।
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अंजुम मौदगिल
महिला दिवस पर जीते विश्वकप में अपने पहल मेडल को अंजुम ने अपनी मां शुभ मौदगिल को समर्पित किया, जिनका अपनी बेटी को टॉप रैंकिंग का शूटर बनाने में अहम योगदान रहा है। विश्वकप में सिटी की बेटी की ओर से यह पहला मेडल मिला। मेडल जीतने के बाद अंजुम के परिवार में खुशी का माहौल बना है। शूटिंग में शानदार सफर के चलते हाल ही में पंजाब पुलिस ने अंजुम मौदगिल को पंजाब पुलिस में नौकरी भी दी है।
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अंजुम मौदगिल
ओलंपियन अंजलि भागवत को हराकर आई थीं सुर्खियों में
अंजुम मौदगिल उस समय सबसे अधिक सुर्खियों में आईं थीं जब उन्होंने ओलंपियन अंजलि भागवत को नेशनल में हराकर गोल्ड मेडल पर निशाना साधा। एनसीसी की कैडेट रहीं अंजुम मौदगिल को निशानेबाजी में बेहतरीन प्रदर्शन करने पर देश के पूर्वरक्षामंत्री प्रशंसा पत्र देकर उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। यह सम्मान पूरे देश में एनसीसी की ओर से विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को दिया जाता है। अंजुम को अब तक शूटिंग में किए गए प्रदर्शन की बदौलत इस सम्मान केलिए चुना गया था।
कामयाबी में मां शुभ मौदगिल का बड़ा हाथ
अंजुम की मां शुभ मौदगिल एक समय में एनसीसी की कैडेट और शूटर रही हैं। उन दिनों जब भी समय मिलता था, वह अपनी बेटी को शूटिंग रेंज साथ लेकर जाती थीं। वहीं से अंजुम को भी शूटिंग में रुचि होने लगी। मां से प्ररेणा लेकर शूटिंग कंपीटीशन में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। अंजुम के मुकाम तक पहुंचाने में मां का कड़ा संघर्ष रहा है। अंजुम ने भी कड़ी मेहनत की। शुरू में निशानेबाजी के लिए उनके पास जरूरी संसाधन नहीं थे।