अगर आप सोचते हैं कि एवरेस्ट पर चढ़ना आसान है तो पढ़िए इनकी कहानी, 8 लोगों में से चोटी पर सिर्फ दो लोग ही पहुंच पाए।
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हरियाणा पुलिस की सब इंस्पेक्टर और हिसार के किसान की बेटी अनीता ने इस बार चीन की तरफ से एवरेस्ट पर चढ़ाई कर यह उपलब्धि हासिल की है, इससे पहले वह सन 2013 में नेपाल की तरफ से एवरेस्ट पर तिरंगा फहरा चुकी हैं।
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अनीता ने दो साल पहले वर्ष 2015 में भी चीन की तरफ से एवरेस्ट फतह करने का प्रयास किया था, लेकिन उस दौरान आए विध्वंसकारी भूकंप के कारण उन्हें 22 हजार फीट से वापस लौटना पड़ा था। इसके बाद अनीता ने इस बार चीन की तरफ से एवरेस्ट फतेह करने का फिर से प्रयास किया और कामयाब रही।
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एवरेस्ट पर लिख डाला बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश
आज करनाल में मिडिया से बातचीत में अनीता कुंडू ने बताया की उसने 11 अप्रैल को एवरेस्ट फतह का अपना मिशन शुरू किया, 41 दिनों तक बाद वह 21 मई सुबह सात बजकर 15 मिनट पर विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट की 29 हजार फीट चोटी पर पहुंचीं और तिरंगा फहराया।
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अनीता कुंडू ने कहा की जब चीन की ओर से एवरेस्ट फतह मिशन शुरू किया था तब टीम में कुल आठ सदस्य शामिल थे। इसमें एक 22 हजार फीट की ऊंचाई से वापस आ गया था, उसके बाद चोटी के पास पहुंचने से पहले एक-एक करके पांच सदस्य वापस आ गए। चोटी के पास पहुंचने से चंद कदम पहले आस्ट्रेलियाई पर्वतारोही की मौत हो गई, मिशन को पूरा करने में वे और उनका एक साथी कामयाब रहा।
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अनीता के मुताबिक इस मिशन पर लगभग 30 लाख रुपये का खर्च आया है, जिसके लिए करीबन दस लाख रुपये की मदद सामाजिक संगठनों ने की और 20 लाख रुपये परिवार ने कर्ज लिया है। उसने कहा की पिछली बार 2015 में एवरेस्ट पर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ लिखने की हसरत अधूरी रह गई थी। दो साल बाद अपने सपने को पूरा कर दिया।
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अपनी भूतकाल के बारे में उन्होंने कहा की वे जाट स्कूल की छात्रा थी। इसके बाद जाट कॉलेज से बीए की। अनीता ने कहा की उसका अगला लक्ष्य दुनिया की ऊंची सबसे 14 चोटियों पर बेटी बचाओ बेटी, पढ़ाओ लिखकर तिरंगा लहराने का है।
एवरेस्ट को फतह करने के लिए 8 सदस्यों का दल निकला था, जिसमें अनीता अकेली महिला थी। भारत की ओर से भी केवल अनीता कुंडू ही प्रतिनिधि थी, अनीता ने कहा कि लड़कियां किसी मायने में लड़कों से कम नहीं होतीं और वे सब कुछ कर सकती हैं जो कोई अन्य इंसान करता है, केवल हौसले और कड़ी मेहनत जरूरत है। उन्होंने कहा कि पर्वतारोहण को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा सरकार ने उन्हें भरोसा दिलाया है।