इधर उधर कूद फांद करती काली ग्रे कलर की पट्टियों वाली गिलहरी देखी है, पर क्या आपने कभी इस रंग की गिलहरी देखी है। जानिए इनसे जुड़ी रोचक बातें। सभी फोटोः अजय वर्मा
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सफेद गिलहरी
दरअसल, गिलहरी की बेहद दुर्लभ प्रजाति, सफेद गिलहरी पहली बार चंडीगढ़ में देखने को मिली। पंजाब यूनिवर्सिटी में यह गिलहरी देखने को मिली तो फोटोग्राफर ने इसे तुरंत कैमरे में कैद कर लिया। गिलहरी हमेशा हरी भरी जगह पर रहना पसन्द करती है और यह लोगों को देखते ही दूर भाग जाती है, लेकिन किसी को नुकसान नहीं पहुंचाती।
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सफेद गिलहरी
जीव विशेषज्ञ एमएस सेखों बताते हैं कि रंग का निर्धारण करने वाले जीन में बदलाव होने पर गिलहरी का रंग बदलता है। वैसे यह जैनेटिक कोड गिलहरी के शरीर पर सिर्फ सफेद धारियां ही बनाते हैं। इस कोड में जरा फेरबदल होने पर यह पूरी तरह सफेद हो जाती हैं, हालांकि इनकी आंखें काली ही रहती हैं।
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सफेद गिलहरी
गिलहरी एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में सबसे ज्यादा पाई जाती है। गिलहरी दो तीन रंगों में होती है और इसके शरीर पर काले रंग की पट्टियां भी होती हैं। गिलहरी पेड़ों पर रहती है। यह 3 से 5 फीट की छलांग भी लगा सकती है। गिलहरी अपने अगले पैरों से हाथों का काम लेती है। यह जो भी खाती है, वह उसे अगले पैरों में पकड़कर खाती है।
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सफेद गिलहरी
यह छोटे से आकार की जानवर सर्वहारी है और विलुप्त होने की कगार पर है। भारत में गिलहरी की दो प्रजातियां पाई जाती हैं। गिलहरी की नज़र मनुष्य से तेज होती है। यह छोटी से छोटी चीज बड़ी आसानी से देख सकती है। गिलहरी एक साल में दो बार प्रजनन करती हैं। दुनिया भर में लगभग 250 से भी ज्यादा प्रजातियां पायी जाती हैं।
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सफेद गिलहरी
गिलहरी की कुछ ऐसी भी प्रजातियां है, जो उड़ सकती हैं। बिल्कुल पक्षी की तरह तो नहीं उड़,बल्कि एक पेड़ से दूसरे पर हवा में कूद सकती हैं। जितनी लंबाई गिलहरी की होती है, उतनी बड़ी ही इसकी पूंछ होती है। यह ज्यादातर अखरोट, फल, बीज और पेड़ की छाल खाती हैं। गिलहरी अपने साथी को संकेत देने के लिए ज्यादातर पूंछ का इस्तेमाल करती हैं।
गिलहरी का बच्चा जन्म के समय अंधा होता है, धीरे धीरे उसे दिखाई देने लगता है। गिलहरी को खतरा महसूस होने पर यह तुरंत पेड़ पर चढ़ जाती हैं। गिलहरी के पिछले पैर की पांच उंगलियां और अगले पैर में चार उंगलियां होती हैं। यह 20 मील प्रति घंटे की रफ़्तार से दौड़ सकती हैं। गिलहरी के बच्चे 3 महीनों तक अपनी माँ का दूध पीते हैं। गिलहरी के अगले चार दांत हमेशा बढ़ते रहते हैं।