गिरफ्तारी से बचने के लिए राखी सावंत ने जो जाल बुना था, उसने वह खुद ही बुरी तरह से फंस गई हैं। अब वे कभी भी गिरफ्तार हो सकती है।
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दरअसल, सोमवार को लुधियाना में राखी सावंत की जमानत अर्जी की सुनवाई एडिशनल सेशन जज दिनेश कुमार की अदालत में हुई। इसमें राखी के वकीलों और शिकायतकर्ता के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अगली तारीख 17 अप्रैल तय की है। तब तक के लिए राखी को अग्रिम जमानत नहीं मिली है, जिसका मतलब है कि पुलिस राखी सावंत को अब भी गिरफ्तार कर सकती है।
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न्यायधीश दिनेश कुमार ने निचली अदालत में चल रही इस मामले शिकायत से संबंधित फाइल को अदालत में तलब कर लिया है। वहीं निचली अदालत से राखी की शिकायत वाली फाइल नए नियुक्त हुए न्यायधीश विश्व गुप्ता की अदालत में स्थानांतरित हुई। इसमें शिकायतकर्ता वकील नरेंद्र आदिया ने एक अर्जी देते हुए राखी सावंत को भगौड़ा घोषित किए जाने की कार्रवाई शुरू करने की मांग की।
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वहीं अग्रिम जमानत याचिका लगाते वक्त राखी के वकील रजनीश लखनपाल ने तर्क दिया कि उनकी भगवान वाल्मीकि में पूरी आस्था है। उन्होंने कभी भगवान वाल्मीकि के बारे में कुछ भी गलत नहीं कहा। बावजूद इसके वे पूरे समाज से इस संबंध में माफी भी मांग चुकी हैं। न्यायधीश ने मामले की अगली सुनवाई 11 मई के लिए स्थगित करते हुए राखी की पुन: गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश दिये।
मामले में शिकायतकर्ता वकील नरेंद्र आदिया का कहना है कि राखी सावंत जानबूझ कर केस में पेश नहीं हो रहीं, जबकि वो मीडिया के सामने पेश होकर वाल्मीकि भाईचारे से माफी मांग कर साबित कर चुकी हैं कि उन्हें अदालती हुकमों की कोई परवाह नहीं है, जबकि लुधियाना पुलिस भी उन्हें अदालत में पेश करने को नाकाम रही। अदालत के ध्यान में पुलिस का व्यवहार और पक्षपात वाला रवैया जरूर लाऊंगा।